#WorldAIDSDay: ‘Know Your Status’ के जरिये बचें, इस बीमारी से, जानें कहां जन्मा था इस बीमारी का वायरस…

आज विश्व एड्‌स दिवस है. आज से 30 साल पह़ले विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ल्ड एड्‌स डे मनाने की शुरुआत की थी, लेकिन समय के साथ इस दिवस और इसके उद्देश्यों की उपयोगिता बढ़ती जा रही है. इस बार WHO ने इस दिवस का थीम रखा है “Know Your Status”. कहने का आशय यह है कि इस बीमारी से आप कितना दूर हैं इसके प्रति जागरूकता. संगठन की यह कोशिश है कि इस दिवस के आयोजन के साथ-साथ लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करें, ताकि वे इसकी चपेट में ना आयें. साथ ही हर व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना भी इस दिवस का उद्देश्य है.

2014 के आंकड़ों के अनुसार विश्व में 3.20 करोड़ एचआईवी पीड़ित हैं जिनमें से 20,88,683 कुल पीड़ित भारत में हैं जिनमें बच्चों की संख्या 1,45,466 है. भारत में एड्‌स पीड़ितों की संख्या दक्षिण भारत में ज्यादा है.  बावजूद इसके खुशखबरी यह है कि भारत में नये एड्‌स पीड़ितों की संख्या में गिरावट आयी है. बिहार में जारी हालिया आंकड़ों के अनुसार यहां एड्‌स पीड़ितों की संख्या में गिरावट आयी है. यह सब संभव हो पाया है, एड्‌स के प्रति लोगों में आयी जागरूकता से. हालांकि अभी भी किशनगंज और कटिहार जैसे जिले ऐसे हैं जहां एड्‌स मरीजों की संख्या ज्यादा है. नेशनल एड्स कंट्रोल सोसायटी के अनुमान के अनुसार यहां 1.60 लाख एचआइवी संक्रमित हैं. इनमें 90 हजार चिह्नित किए जा चुके हैं, जिनमें करीब 80 हजार का इलाज एआरटी (एंटी रेट्रोवायरल ट्रीटमेंट) सेंटरों में चल रहा है. बिहार में एचआइवी से सालाना करीब सात हजार लोग संक्रमित हो रहे हैं. राजधानी से लेकर गांवों तक लोग इसके शिकार हो रहे हैं। सर्वाधिक युवा इस बीमारी के चपेट में आ रहे हैं.

झारखंड ऐसा राज्य है जहां पलायन की समस्या आम है, इस वजह से भी यहां एड्‌स के मरीज काफी हैं. आंकड़ों के अनुसार गुमला जिले में एड्स से पांच साल में पांच पुरुष, चार महिला व एक बच्चे की मौत हुई है. जिले में 184 लोग एड्स से अभी भी प्रभावित हैं. इनमें 12 बच्चे भी पीड़ित हैं. हालांकि इनका दवा चल रहा है. सभी एड्स पीड़ित रांची से एआरटी दवा ले रहे हैं. गुमला शहर में सबसे ज्यादा 20 लोग एड्स से पीड़ित हैं. झारखंड में करीब 26000 एड्स पीड़ित हैं. परामर्श केंद्र के अनुसार पूरे झारखंड राज्य में करीब 26 हजार लोग एड्स से पीड़ित हैं. जिनका इलाज चल रहा है.

किस देश में हुआ था एड्‌स बीमारी का जन्म

एड्‌स की शुरुआत किन्शासा शहर में हुई, जो डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कॉन्गो की राजधानी है. इस बीमारी के सामने आने के 30 साल बाद इसकी उत्पत्ति का पता चल पाया . साइंस जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया कि प्रमाणों में इसकी उत्पत्ति किन्शासा में होने का पता चला. रिपोर्ट के मुताबिक तेज़ी से बढ़ती वेश्यावृत्ति, आबादी और दवाखानों में संक्रमित सुइयों का उपयोग संभवत इस वायरस के फैलने का कारण बना. दुनिया भर की नज़रों में एचआईवी 1980 के दशक में आया था. वैज्ञानिकों का कहना है कि असुरक्षित यौन संबंधों से एड्स तेज़ी से फैला. वैज्ञानिकों के मुताबिक एचआईवी चिंपैज़ी वायरस का परिवर्तित रूप है, यह सिमियन इम्युनोडिफिसिएंसी वायरस के नाम से भी जाना जाता है. किन्शासा बुशमीट का बड़ा बाज़ार था और संभवत संक्रमित खून के संपर्क में आने से यह मनुष्यों तक पहुंचा. वायरस कई तरीके से फैला. इन वायरस ने चिंपैंज़ी, गोरिल्ला, बंदर और फिर मनुष्यों को अपने प्रभाव में लिया.


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