#HappyBirthday: मोनिका सेलेस जिसका करियर स्टेफी ग्राफ के दीवाने ने चाक़ू की वार से तबाह कर दिया

30 अप्रैल1993 का दिन था. कोर्ट पर धुप खिली खिली थी. नंबर वन टेनिस खिलाड़ी मोनिका सेलेस जर्मनी के हैम्बर्ग शहर में सिटीजन कप में मग्दालीना मालीवा के खिलाफ खेल रही थी. पहला सेट जीतकर दुसरे सेट में 4-3 से आगे थी, और बस कुछ ही देर में वो आराम से मैच जीत जाने वाली थी.

पर उस दिन कुछ ऐसा होने वाला था जो टेनिस से चैंपियन खिलाड़ी को छीनने वाला था. ब्रेक के दौरान सेलेस चेयर पर बैठी हुई पानी पी रही थी, तभी दर्शक दीर्घा से उठकर 38 वर्षीय गुंटर पार्श तेजी से सेलेस की ओर बढ़ा और इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, गुंटर पार्श ने सेलेस की पीठ पर 9 इंच लम्बे चाक़ू से हमला कर दिया. उसी समय सेलेस उठने के लिए आगे की ओर झुकी थी, ऐसे में गुंटर पार्श का चाक़ू उसकी रीढ़ की हड्डी को मिस कर गया और चाक़ू डेढ़ इंच अन्दर पीठ में धंस गया. पहला हमला नाकाम होते देख हमलावर ने फिर से सेलेस पर दुसरा हमला करना चाहा, पर इस बार सुरक्षाकर्मी initial shock से निकल चुके थे. उन्होंने हमलावर को दबोच लिया.

उस समय सेलेस महज 19 साल की थी और उसने स्टेफी ग्राफ से नंबर वन का ख़िताब छीन लिया था. लगातार 21 टूर्नामेंट जीत कर वो हैम्बर्ग आई थी, जिसमे आठ ग्रैंड स्लैम ट्रोफी थे. महज 16 साल की उम्र में फ्रेंच ओपन जीतकर युगोस्लाविया की मोनिका सेलेस सबसे कम उम्र की ग्रैंड स्लैम चैंपियन बन गयी थी. टेनिस की दुनिया को स्टेफी ग्राफ और मोनिका सेलेस की प्रतिस्पर्धा में मार्टिना नवरातिलोवा और क्रिस एवर्ट की legendary rivalry की झलक मिलने वाली थी.

पर उस एक पल ने सब बदल कर रख दिया. सेलेस के हमलावर ने इस पल के लिए पिछले चार दिन से इन्तजार किया था. पकडे जाने के बाद उसके पास से 650 डॉलर और इटली का टिकट मिला था, जहाँ सेलेस हैम्बर्ग के बाद रोम टूर्नामेंट में खेलने वाली थी. गुंटर पार्श ने स्वीकार किया कि वो स्टेफी ग्राफ का दीवाना था और सेलेस के हाथों स्टेफी ग्राफ की लगातार हार से सेलेस से चिढा हुआ था. वो सेलेस को मारना नहीं चाहता था, बस अपने हमले से उसे आगे खेलने से रोकना चाहता था.

सेलेस को हालाँकि शारीरिक जख्म ज्यादा खतरनाक नहीं मिला, पर वो मनोवैज्ञानिक जख्म से बाहर नहीं निकल पायी. अपने करियर के पीक पर वो टेनिस की दुनिया से दो साल के लिए बाहर हो गयी. इस दौरान वो डिप्रेशन में चली गयी.  bing eating के चलते उसका वजन बढ़ता गया. और बढ़ता बढ़ता 30 किलो बढ़ गया.

दो साल बाद 1995 में सेलेस टेनिस की दुनिया में वापस लौटी और इस दौरान स्टेफी ग्राफ बिना प्रतिद्वंदी के टूर्नामेंट पर टूर्नामेंट जीतती चली गयी और अपने करियर में कुल मिलाकर सबसे ज्यादा 22 ग्रैंड स्लैम टाइटल जीता. दो साल बाद लौटी सेलेस महज 21 साल की थी, पर वो पुरानी सेलेस नहीं थी, वो अपना आत्मविश्वास खो चुकी थी. हमले से पहले आठ ग्रैंड स्लैम जीतने वाली सेलेस महज एक और ग्रैंड स्लैम (1996 में ऑस्ट्रलियन ओपन)  और 2000 में ओलिंपिक ब्रोंज मैडल जीत पायी. 2008 में सेलेस ने टेनिस की दुनिया से संन्यास ले लिया. और उसे टेनिस हॉल ऑफ़ फेम में शामिल किया गया.

सेलेस पर हमला करने वाले गुंटर पार्श को जर्मनी की अदालत ने महज दो साल की सजा दी. सेलेस ने इतनी कम सजा के चलते फिर कभी जर्मनी में कदम नहीं रखा.

सेलेस पर हमले ने गेम को बदल कर रख दिया: 

 सेलेस पर हुए हमले और फिर हमलावर को सख्त सजा न मिलने की टेनिस जगत ने कड़े शब्दों में निंदा की. पर सेलेस अपनी आत्मकथा में लिखती हैं: मै हजारों लोगों के सामने निशाने पर ली गयी. इस भुला पाना इतना आसान नहीं है. इसने मेरे करियर को बदल कर रख दिया और मेरी आत्मा को जख्मी कर दिया. उस एक पल ने मुझे एक अलग इंसान बना दिया.”

सेलेस पर हमले ने टेनिस जगत को बदल कर रख दिया. खिलाड़ियों ने अपनी सुरक्षा के लिए उपाय करने शुरू कर दिए. उनके बॉडीगार्ड की फ़ौज अब उनके साथ कोर्ट पर होती है, जो लगातार दर्शकों पर नज़र बनाए रखती है. खिलाड़ी अपने फैन्स से अपने बॉडीगार्ड्स के साए में मिलते हैं. एक घबराहट, एक बेचैनी ने खेल को जकड लिया है. अब खेल की दुनिया 30 अप्रैल १९९३ के पहले की दुनिया की तरह मासूम नहीं रह गयी है.

सेलेस के रिटायर होने के बाद भी सवाल बना हुआ है: क्या होता अगर 19 साल की मोनिका सेलेस पर 30 अप्रैल १९९३ की दोपहरी में स्टेफी ग्राफ के पागल दीवाने ने चाक़ू से हमला नहीं किया होता !


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