पोषाहार के प्रति जागरूक नहीं भारतीय, 80 प्रतिशत लोग नहीं लेते पोषाहार

रांची : पोषाहार के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए एक ‘ स्वस्थ भारत यात्रा का शुभांरभ’ हुआ था, जिसका समापन जनवरी 2019 में दिल्ली में होगा. इस समापन यात्रा के लिए रांची से सैकड़ों की संख्या में साइकिल सवार दिल्ली के लिए रवाना हुए. देशभर में करीब 7500 साइकिल सवार इस यात्रा में हिस्सा ले रहे हैं जो 2000 स्थानों से गुजरते हुए और 18,000 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए दिल्ली पहुंचेंगे. यह काफिला 27 जनवरी, 2019 को दिल्ली पहुंचेगा, जहां उसका समापन होगा. कहा जा रहा है कि इससे पहले पोषण संबंधी सूचना को लोगों तक पहुंचाने के लिए इस तरह की कोई पहल नहीं हुई थी.

पोषण संबंधी बीमारियों के बोझ को महसूस करते हुए केंद्र सरकार ने स्वस्थ खानपान के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए ‘ईट राइट अभियान’ की शुरुआत की है. ‘ईट राइट मूवमेंट’ के तहत फूड फोर्टिफिकेशन, खाद्य सुरक्षा, चीनी, नमक और तेल के उपभोग में कमी और प्रथम 1,000 दिवसों के पोषण को लेकर जागरूकता फैलाने का आंदोलन है. फूड फोर्टिफिकेशन झारखंड के लिए आज के समय की मांग है क्योंकि यह राज्य देश के सबसे अधिक कुपोषित राज्यों में से एक है. भारत में हाल के समय में गैर संक्रामक रोग में तेज वृद्धि देखने को मिल रही है. ऐसे में यह जरूरी है कि लोग पोषण के महत्व और मिलावटी खाद्य वस्तुओं के बारे में समझें, क्योंकि ह्रदय रोग, आघात और कैंसर जैसी बीमारियों का यह मुख्य कारण है. खाद्य में मिलावट कैंसर के सबसे महत्वपूर्ण कारणों में से एक है और अधिक नमक, चीनी और तेल के सेवन से कई तरह की बीमारियां होती हैं.

आरआईएमएस, रांची की आहार विशेषज्ञ कुमारी मीनाक्षी का कहना है, “झारखंड में प्रत्येक एक लाख प्रसव के मामलों मे 165 माताएं गर्भावस्था के दौरान, प्रसव और प्रसव उपरांत मर जाती हैं. अधिक संख्या में मौत माताओं की पोषण की स्थिति से जुड़ी होती हैं. झारखंड में प्रजनन की आयु के करीब एक तिहाई महिलाएं या तो कुपोषण की शिकार हैं या 18.5 kg/m2 से कम बॉडी मास इंडेक्स के साथ उनमें पोषण की कमी है. प्रजनन की आयु वाली करीब 65.2 प्रतिशत महिलाओं में खून की कमी होने से स्थिति और भी जटिल हो जाती है जोकि अक्सर पोषण की कमी की वजह से है. चौंकाने वाली इस संख्या के पीछे जागरूकता की कमी और गर्भावस्था पूर्व धारणा जिम्मेदार है.”

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 4 के मुताबिक, 6 से 23 माह के आयु समूह के भीतर केवल 7.2 प्रतिशत बच्चों को पर्याप्त आहार मिलता है. राष्ट्रीय औसत की तुलना में यह संख्या काफी कम है. बच्चों में पोषण की कमी अक्सर मां के पोषण की स्थिति से जुड़ी होती है. झारखंड में 67 प्रतिशत नवजात शिशुओं को जन्म के पहले घंटे में स्तनपान नहीं कराया जाता है.

एफएसएसएआई के सीईओ पवन अग्रवाल का कहना है, “एक स्वस्थ शरीर के लिए सही पोषण जरूरी है और गलत पोषण कई बीमारियों को दावत देता है. लोगों द्वारा पोषण को तब तक गंभीरता से नहीं लिया जाता जब तक यह किसी बीमारी का कारण नहीं बन जाता है. जागरूकता की कमी को इस तथ्य से समझा जा सकता है कि पिछले वर्ष एक अध्ययन में पाया गया कि 80 प्रतिशत भारतीयों के भोजन में पोषण की कमी है.


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