सृजन घोटाले में आरोपियों पर कसता सिकंजा; घोटाले के पैसे की वसूली के लिए कदम उठाये जा रहे

भागलपुर: 2000 करोड़ के सृजन घोटाले में जिला प्रशासन कार्यवाही करने जा रहा है.  सृजन संस्था की संचालिका मनोरमा को जिन अफसरों ने सबौर के ट्राइसम भवन में  24,275 वर्गफीट जमीन महज 2400 रुपए सालाना में दे दी थी, उन पर भी कार्यवाही की तैयारी है. सरकारी भवन में चल रहा सृजन का दफ्तर बंद किया जाएगा.  इसकी लीज रद्द करने के लिए डीएम प्रणव कुमार ने शनिवार को आदेश जारी कर दिए. साथ ही 8 विभागों के सरकारी खातों से 919.41 करोड़ की लूट में सृजन के साथ शामिल बैंकों से राशि की वसूली होगी. इसके लिए सभी विभाग अब सीधे कोर्ट में मनी सूट दाखिल करेंगे.

भागलपुर के जिलाधिकारी ने ये दिए आदेश  

  • कोई भी विभाग एक से ज्यादा बैंकों में अनावश्यक खाते नहीं रखेंगे. वित्त विभाग की गाइडलाइन के अनुसार अधिकृत बैंक में खाते रहेंगे. यदि किसी विभाग के ज्यादा खाते हैं तो राशि निकालकर बाकी खाते बंद कर दें.
  •  बैंक स्टेटमेंट की नियमित जांच करें. पूरी राशि की जानकारी लेकर इसकी सुरक्षा तय करनी होगी.
  •  हमेशा बैंकिंग काम के लिए एक मैसेंजर न तैनात करें।
  • सृजन घोटाले में  सीबीआई और जांच एजेंसी अपना काम कर रही है, लेकिन विभाग ऐसे कर्मचारी-अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करें.

 संस्था की संचालिका मनोरमा को सबौर ब्लॉक परिसर में करोड़ों की जमीन महज 200 रुपए प्रतिमाह में किराये पर दी, वह अब छिनेगी.

किस किस विभाग से सृजन के खाते में पैसे अवैध तरीके से ट्रान्सफर  हुए: 

को-ऑपरेटिव  विभाग के 48 करोड़ रुपए सृजन के खाते में गए. 2014 तक जिला सहकारिता अधिकारी पंकज झा थे. उनके हस्ताक्षर किए चेक से राशि सृजन महिला विकास सहयोग समिति के बैंक खाते में गई थी.

स्वास्थ्य विभाग से करीब 41 लाख की अवैध निकासी हुई.  जिला कल्याण विभाग से 241 करोड़ की अवैध निकासी में दो एफआईआर दर्ज है.  कल्याण पदाधिकारी अरुण कुमार सिंह और नाजिर महेश मंडल की गिरफ्तारी हुई थी. घोटाले में अहम गवाह मंडल की मौत हो चुकी है.

जिला नजारत में 220 करोड़ का घाेटाला हुआ.  इंडियन बैंक से राशि निकली. विभाग ने जो चेक भेजे थे, वे इस खाते की जगह सीधे सृजन के खाते में जमा कर दिए गए. डीआरडीए  से 83 करोड़ की निकासी की जांच सीबीआई कर रही है.  जिला परिषद  के खाते से 89 करोड़ सीधे सृजन के खाते में जमा हो गए. मुख्यमंत्री शहरी विकास योजना की आवंटित राशि बैंक में जमा नहीं हुई. करीब 16 करोड़ सृजन के खाते में बैंकों ने भेज दिए. भू- अर्जन से  270 करोड़ की अवैध निकासी हुई। इस दौरान पूर्व भू-अर्जन पदाधिकारी राजीव रंजन सिंह थे. वे फरार हैं.

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