केंद्र सरकार से मतभेद के चलते RBI गवर्नर उर्जित पटेल ने इस्तीफा दिया

नयी दिल्ली: आज रिज़र्व बैंक के 24वे गवर्नर उर्जित पटेल ने केंद्र सरकार के साथ तनातनी के बीच इस्तीफा दे दिया है. भारत सरकार के साथ काम करने का पिछले गवर्नर रघुराम राजन का अनुभव भी अच्छा नहीं रहा था और अपना कार्यकाल पूरा होने पर कटु रिश्तों और बयानबाजी के बीच वे अपने अकादमिक कार्यों के लिए शिकागो यूनिवर्सिटी वापस लौट गये.

उर्जित पटेल को RBI के 24वें गवर्नर के तौर पर सितंबर 2016 में तीन साल के लिए नियुक्‍त किया गया था. ऐसे में अभी उनके पास लगभग दस महीने का कार्यकाल शेष था. अक्‍टूबर से वित्‍त मंत्रालय और रिजर्व बैंक के बीच तनातनी भी चल रही थी. जबसे वित्‍त मंत्रालय ने अबतक कभी इस्‍तेमाल नहीं किए गए RBI Act की धारा 7 पर चर्चा शुरू की थी तभी से रिश्‍तों में खटास आ गई थी. आरबीआई एक्‍ट की धारा 7 सरकार को यह अधिकार देता है कि वह जनहित में उसके कहे मुताबिक निश्चित नीतिगत उपाय करे.सरकार RBI से मुख्‍य रूप से यह चाहती थी कि वह संकटग्रस्‍त गैर-बैंक कर्जदाताओं और MSME की लिक्विडिटी बढ़ाने में कुछ मदद करे. सरकार के अनुसार, आरबीआई को सीआरआर की दर को कम कर अर्थव्यवस्था में नकदी बढ़ाने का काम करना चाहिए. उसका पक्ष है कि आर्थिक विकास दर को बरकरार रखने के लिए बैंकों को अधिक से अधिक कर्ज देना होगा. इसलिए सीआरआर की दर 6.5 फीसदी से घटाकर कम की जाए. वहीं, आरबीआई का मानना है कि लिक्विडिटी दर में कमी करने से महंगाई बढ़ सकती है. तरलता दर कम करने से बैंक अधिक से अधिक कर्ज देने की स्थिति में आ जाएंगे. इससे एनपीए के जाल में फंसा बैंकिंग सिस्टम एक नए कर्ज संकट में आ सकता है.

11 सरकारी बैंक जो प्रॉम्‍प्‍ट करेक्टिव एक्‍शन (PCA) के दायरे में आए थे उन्‍हें कुछ छूट दे और ग्रोथ को बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए. दूसरी तरफ, RBI रुढि़वादी रुख अपनाते हुए किसी भी तरह के दुष्‍परिणाम से बचना चाहता था.

रिजर्व बैंक और सरकार के बीच तनाव की बात तब सामने आई, जब डेपुटी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा कि केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता को कमजोर करना “सशक्त रूप से विनाशकारी” हो सकता है. साफ है कि बैंक पर अगले साल मई के आम चुनाव से पहले सरकार की तरफ से नीतियों में छूट और अपने अधिकारों को कम करने के लिए दबाव है और वह उसके खिलाफ जोर लगा रही है.

निवेशक इस बात से चिंता में हैं कि सरकार और रिजर्व बैंक के बीच चली आ रही तनातनी फैसले लेने को प्रभावित कर सकती है. खासतौर पर ऐसे वक्त में जब भारत का वित्तीय बाजार बड़े बुनियादी निर्माण के लिए धन देने वाली कंपनियों के कर्ज भुगतान में नाकामी के कारण संकट में है. इसकी वजह से पूरे नॉन बैंकिंग फाइनेंस सेक्टर में तरलता(लिक्विडिटी) की भारी कमी आ सकती है.

सरकार और रिजर्व बैंक के बीच 48.73 अरब डॉलर के रिजर्व को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी.  देश के आर्थिक घाटे को कम करने के लिए रिजर्व बैंक इस रिजर्व का इस्तेमाल करे या नहीं इसे लेकर दोनों में विवाद बना हुआ था. वित्त मंत्री भी रिज़र्व बैंक के खिलाफ लगातार हमलावर रुख अपनाए हुए थे. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने केंद्रीय बैंक पर 2008-2014 के दौरान कर्ज लेने में आई तेजी को रोकने में नाकम रहने का आरोप लगाया. जेटली के मुताबिक इसकी वजह से बैंक पर 150 अरब डॉलर का कर्ज चढ़ गया.

विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक 2017 में भारत की अर्थव्यवस्था फ्रांस को पीछे छोड़ दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई और अब यह ब्रिटेन से ज्यादा पीछे नहीं है.

उर्जित पटेल से पहले पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के भी सरकार से मतभेद रहे हैं. इसमें एनपीए बहुत बड़ा मुद्दा रहा था.  इससे पहले पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराम का भी तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम से भी विवाद रहा था.

पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उर्जित पटेल का इस्तीफा देना बड़ी चिंता की बात है. उन्होंने कहा कि  अब सरकार को रिजर्व बैंक के साथ बहुत संभलकर चलना होगा. राजन के मुताबिक इस्तीफा देना विरोध का तरीका होता है.

उर्जित पटेल की इस्तीफे की खबर से शेयर मार्किट में गिरावट दर्ज की गयी.

कौन हैं उर्जित पटेल?

उर्जित पटेल (Urjit Patel) का जन्म 28 अक्टूबर 1963 को नैरोबी, केन्या में हुआ था. वे लंदन स्कूल इकोनॉमिक्स से स्नातक हैं. उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से एम. फिल और येल यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र से पीएचडी कर रखी है. उन्हें मोदी सरकार द्वारा 4 सितंबर 2016 को RBI के गवर्नर के पद पर नियुक्त किया गया था. इससे पहले वे रिज़र्व बैंक के डिप्टी गवर्नर रह चुके हैं. उर्जित पटेल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में काम कर चुके हैं. वे  1990 से 1995 के बीच IMF में भारत, अमरीका, म्यांमार और बहामास आदि डेस्क पर काम कर चुके हैं. उनके पास दो दशकों का ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर और वित्त क्षेत्र में कार्य करने का अनुभव है. वह 1998 से 2001 तक भारत सरकार के ऊर्जा, आर्थिक मामले विभाग में बतौर कंसल्टेंट कार्य कर चुके हैं. उर्जित पटेल (RBI Governor Urjit Patel) रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिडेट के अध्यक्ष रह चुके हैं.

भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर बनने से पहले तक उर्जित पटेल अमरीकन थिंक टैंक माने जाने वाले बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप के सलाहकार थे. उर्जित पटेल वित्त मंत्रालय के प्रत्यक्ष कर को लेकर बने टास्क फोर्स, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग आदि में कार्य कर चुके हैं. वे  स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के निदेशक भी रह चुके हैं. वह साल 2000 से 2004 के बीच केंद्र और राज्य सरकारों की उच्च स्तरीय समितियों में काम कर चुके हैं. इसके अलावा वे  गुजरात पेट्रोलियम लिमिटेड और राष्ट्रीय आवास बैंक के निदेशक के रूप में कार्य कर चुके हैं.


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