MeToo से नोबेल पुरस्कार तक जानें महिलाओं से संबंधित कौन से मुद्दे वर्ष 2018 में बने हाॅट टाॅपिक

तमाम दावों प्रतिदावों के बीच यह एक सच्चाई है कि वर्ष 2018 में भी महिला शक्ति ने अपने हक और अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी है. देश की जनसंख्या की लगभग आधी आबादी होने के बावजूद भी उनकी यह स्थिति है. सकारात्मक बात यह है कि महिलाओं ने अब आवाज बुलंद करना सीख लिया है, वह यह जान गयी है कि जबतक वह चुप रहेगी उसकी स्थिति नहीं बदलेगी. इस सोच ने कई चीजों को बदला और सरकार भी यह सोचने पर मजबूर हुई कि महिलाओं को उनका हक देना बहुत जरूरी है. इस वर्ष महिलाओं से जुड़ी जो बातें चर्चा में रहीं उनमें प्रमुख हैं-

MeToo प्लेटफाॅर्म में बेहिचक बोलीं महिलाएं तो हुए कई बेनकाब
MeToo के जरिये इस वर्ष भारतीय महिलाओं ने कई ऐसे चेहरे को बेनकाब किया, जिनपर सवाल उठाने की हिमाकत भी कोई करते डरता था. जी हां, मीटू के जरिये एमजे अकबर, नाना पाटेकर, आलोकनाथ जैसे दिग्गज लोगों पर सवाल उठे और उनके खिलाफ कार्रवाई भी हुई. एमजे अकबर जैसे बड़े पत्रकार पर 20 से अधिक महिलाओं ने यौन शोषण और रेप का आरोप लगाया, तो आलोकनाथ जैसे संस्कारी चरित्र वाले बाबूजी पर भी रेप का आरोप लगा. नाना पाटेकर पर तनुश्री दत्ता ने यौन शोषण का आरोप लगाया. साजिद खान पर भी कई अभिनेत्रियों ने गंभीर आरोप लगाये.

ट्रिपल तलाक के खिलाफ बिल नहीं बन सका कानून
ट्रिपल तलाक बिल वर्ष 2018 में भी चर्चा में तो रहा, लेकिन यह बिल अब तक पास नहीं हो सका है. हालांकि 22 अगस्त वर्ष 2017 देश के सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक घोषित कर दिया था और सरकार से कहा था कि वह छह माह के भीतर इसके खिलाफ कानून बनाये. दिसंबर 2017 में ही लोकसभा ने इस बिल को पारित कर दिया, लेकिन पूरे एक साल बाद भी यह बिल कानून नहीं बन पाया, जबकि इसमें आवश्यक संशोधन भी किये गये. मसलन जमानत की व्यवस्था इसमें की गयी है.

12 साल से कम उम्र की लड़कियों के साथ बलात्कार पर फांसी की सजा
जम्मू-कश्मीर के कठुआ में एक सात साल की बच्ची के साथ गैंगरेप और हैवानियत के बाद अप्रैल 2018 में सरकार ने यह इंडियन पैनल कोड में संशोधन किया और यह व्यवस्था बना दी है कि 12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ बलात्कार होने पर दोषी को फांसी की सजा दी जायेगी. अकसरहां दोषी सात साल की सजा पाकर बच जाता था, लेकिन बच्चियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को देखते हुए सरकार ने यह कानून में यह संशोधन किया, जिसे महिलाओं के लिए शुभ संकेत माना जा सकता है.

दो महिला को मिला नोबेल पुरस्कार
वर्ष 2018 में दो महिला को नोबेल पुरस्कार मिला जिसमें से एक नादिया मुराद को शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया, जबकि दूसरी महिला डोना स्ट्रिकलैंड वैज्ञानिक हैं और उन्हें फिजिक्स के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए यह पुरस्कार मिला है. गौरतलब है कि नादिया आईएस की सेक्स स्लेव रह चुकी हैं और उन्होंने यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं और बच्चों के लिए बहुत कार्य किया है.


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