विधानसभा चुनाव 2018 : भाजपा और कांग्रेस दोनों को सबक, हिंदीपट्टी में भाजपा हारी, कांग्रेस के ‘अच्छे दिन’ आये

विधानसभा चुनाव 2018 के नतीजों ने ना सिर्फ सत्ताधारी दल भाजपा के विजयरथ को लगाम लगायी है बल्कि उसे एक बड़ा झटका भी दिया है. पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए थे जिसमें हिंदीपट्टी के तीन राज्य मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ तीनों में सत्ता की चाबी भाजपा से कांग्रेस ने छिन ली है. तेलंगाना में टीआरएस को जीत मिली जबकि नार्थ ईस्ट के राज्य मिजोरम में क्षेत्रीय पार्टी मिजो नेशनल फ्रंट ने जीत हासिल की है. हिंदी पट्टी में भाजपा की हार पार्टी के लिए मंथन का विषय हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं है कि यह हार कोई अप्रत्याशित है. इससे पह़ले वह बिहार और पंजाब जैसे राज्यों में चुनाव हार चुकी थी. वैसे भी लोकतंत्र में हार-जीत का खेल चलता रहता है, जो स्वस्थ लोकतंत्र के लिए बेहतर ही माना जायेगा. क़ल का दिन तो भागमभाग में बीता, लेकिन आज इत्मीनान से आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जा सकती है. तो सबसे पहले बात मध्यप्रदेश की.

मध्यप्रदेश : जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए उनमें यह सबसे बड़ा और प्रमुख माना जा रहा था. यहां 230 विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें से 116 सीट जीतने वा़ली पार्टी सरकार बना सकती है. पिछली विधानसभा में भाजपा के पास 166 सीट थी और कांग्रेस के पास 57 सीट थी. इस चुनाव ने तस्वीर बदल दी है और कांग्रेस के पास 115 सीट है, जबकि भाजपा के पास 108 है. बसपा के पास दो, सपा के पास एक और निर्दलीय चार हैं. ऐसे में जादुई आंकड़ा प्राप्त करने के लिए कांग्रेस को महज एक़ और विधायक के समर्थन की जरूरत है, जो सहजता से उसे प्राप्त हो जायेगा. मध्यप्रदेश का चुनाव बहुत रोचक रहा, बिलकुल नेक टू नेक कंपीटिशन. कभी भाजपा आगे तो कभी कांग्रेस. परिणाम भी जो सामने आये हैं, वह किसी तरह बहुमत प्राप्त कर लेने वाला है, यानी कि विपक्ष भी बहुत मजबूत स्थिति में है. ऐसे में यह कहना है कि एंटी इनकंबेंसी का असर है जिससे भाजपा हार गयी कुछ सही नहीं मालूम पड़ता. हालांकि पिछले 15 सालों से सत्ता में जमी भाजपा के लिए यह हार बड़ा झटका है. लेकिन यहां यह सोचना होगा कि आखिर हार क्यों? जनता ने आखिर किन मुद्दों पर वोट किया. क्या उसके अंदर गुस्सा था? महिलाओं के खिलाफ अपराध , व्यापमं घोटाले जैसे मुद्दे प्रभावी रहे? केंद्र की नीतियां नोटबंदी?जैसे कई मुद्दे सामने दिखते हैं, जिसका असर इस चुनाव पर पड़ा. इस चुनाव में कांग्रेस के बड़े नेताओं ने जिस तरह का तालमेल दिखाया है, वह बेहतर राजनीतिक रणनीति का परिचय देता है. आपसी सामंजस्य के साथ दिग्विजय सिंह ने एक-एक सीट पर जाकर कार्यकर्ताओं से बात की, बिना कोई गैर-जरूरी बयान दिये, इसका परिणाम सामने है.

राजस्थान : राजस्थान में वसुंधरा राजे की सरकार चली गयी है और कांग्रेस को जीत मिली है. यहां कुल सीट 200 थे लेकिन चुनाव हुए 199 पर , जिसमें से बहुमत का आंकड़ा 100 है. कांग्रेस पार्टी ने 99 सीट पर जीत दर्ज की, जबकि भाजपा को 73 सीट पर जीत मिली बसपा को छह सीट मिली है. 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के पास 163 सीट थी इस बार घटकर 73 हो गयी है. कांग्रेस के पास सिर्फ 21 सीट थी जबकि इस बार वह 99 पर पहुंच गयी है, जिसे बड़ा फायदा माना जाना चाहिए. यहां कांग्रेस की सरकार बनना तय है. उस वक्त भी यहां बसपा को दो सीट मिली थी. वसुंधरा राजे ने हार स्वीकार लिया है. हालांकि राजस्थान में हमेशा से एक चुनाव के बाद बदलाव के लिए जनता वोट डालती रही है. वैसे कहा जा रहा था कि वसुंधरा का तानाशाही रवैया और लोगों में उसके प्रति नाराजगी हार का प्रमख कारण बना.

छत्तीसगढ़ : मध्यप्रदेश से अलग हुए राज्य छत्तीसगढ़ में 15 साल से भाजपा की सरकार थी और रमन सिंह मुख्यमंत्री. लेकिन इस चुनाव में भाजपा बुरी तरह हारी और कांग्रेस स्पष्ट प्राप्त कर चुकी है. 90 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस ने कुल 68 सीट जीती है जबकि भाजपा को सिर्फ 15 सीट मिली है. बसपा के पास दो सीट है. 2013 के चुनाव में यह आंकड़ा भाजपा 49 और कांग्रेस 39 का था. कहा जा रहा है कि आदिवासियों की नाराजगी के कारण रमन सिंह हारे हैं. नक्सल समस्या भी एक वजह है.

तेलंगाना : दक्षिण के राज्य तेलंगाना में विधानसभा चुनाव पहली बार हुआ जिसमें टीआरएस को 88 सीट मिली है, कांग्रेस को 19 और भाजपा को एक सीट मिली है. एआईएमआईएम ओवैसी की पार्टी को सात सीट मिली है.

मिजोरम : 40 सदस्यीय विधानसभा में इस बार क्षेत्रीय दल मिजो नेशनल फ्रंट ने जीत हासिल की है. इससे पहले यहां कांग्रेस की सरकार थी. मिजो नेशनल फ्रंट ने 26 सीट पर, कांग्रेस ने 5, भाजपा ने एक और अन्य को 8 सीट पर जीत मिली है. जबकि पिछले चुनाव में आंकड़ा उल्टा था और कांग्रेस को 40 में से 34 सीट पर जीत मिली थी. लेकिन इस बार कांग्रेस के मुख्यमंत्री
ललथनहवला सेरछिप और चम्फाई दक्षिण दोनों सीटों से चुनाव हार गये हैं.


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