#RafaleDeal:क्या राफेल मुद्दा 2019 के लोकसभा चुनाव में महत्वपूर्ण मुद्दा बनेगा ?

नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के मामले में मोदी सरकार को शुक्रवार को क्लीन चिट दे दी है. इसके साथ ही सौदे में सीबीआइ को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने से भी मना कर दिया. उसके बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह  ने प्रेस कांफ्रेंस करके राहुल गांधी से माफ़ी मांगने की मांग कर दी और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सत्य की जीत बताया. राहुल देश की जनता को जवाब दें कि वह किस आधार पर उसे गुमराह कर रहे थे? उनके आरोपों के बारे में जानकारी का स्रोत क्या था? ऐसे में लग रहा था कि कांग्रेस अध्यक्ष जो पिछले कई महीनों से राफेल मुद्दे पर मुखर थे और हर मंच से सरकार को घेरने में लगे हुए थे, और इस सन्दर्भ में नारा बुलंद किया था: “चौकीदार ही चोर है”, बैक फूट पर चले जायेंगे. पर कांग्रेस और साथ ही अन्य विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला जारी रखा है. ऐसे में लगता है कि राफेल मुद्दा प्रमुख रूप से 2019 लोक सभा चुनाव में मुद्दा रहेगा और अभी  सरकार को जनता के सामने जवाब देना है.

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने दावा किया कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को गलत जानकारी दी है. पीएसी को कैग रिपोर्ट दिखायी, ऐसा क्यों कहा गया ? सीएजी से हम रिपोर्ट के बारे में पूछेंगे. हम चाहते हैं कि जाइंट पार्लियामेंट्री कमिटी  (JPC) बिठायी जाए जो इस मामले की जांच करे, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में जो रिपोर्ट और सबूत कोर्ट के सामने रखे जाते हैं, सुप्रीम कोर्ट उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर अपना फैसला देता है. ज्ञात हो कि राफेल से संबंधित सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि देश को लड़ाकू विमानों की जरूरत है. देश इसके बगैर नहीं रह सकता है. ऑफसेट साझेदार के मामले में किसी भी निजी फर्म को व्यावसायिक लाभ पहुंचाने का कोई ठोस सबूत नहीं है.राफेल मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को बड़ी राहत दी. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल व जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ ने कहा कि अरबों डॉलर कीमत के राफेल सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर संदेह का कोई कारण नहीं है. न ही लड़ाकू विमानों की खरीद की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का कोई कारण है. वैसे भी कीमतों के तुलनात्मक विवरण पर फैसला लेना अदालत का काम नहीं है. खरीद, कीमत व ऑफसेट साझेदार के मामले में हस्तक्षेप के लिए उसके पास कोई ठोस साक्ष्य नहीं है.

कांग्रेस ने कहा कि पार्टी यह साबित करके रहेगी कि सौदे में चोरी हुई है. इस मामले पर कोर्ट में कैग रिपोर्ट का उल्लेख है, जबकि ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं है. कांग्रेस ने सत्ता पक्ष को विशेषाधिकार नोटिस लाने की चुनौती दी.  कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस विमान सौदे में भ्रष्टाचार होने का आरोप दोहराते हुए  कहा कि सरकार बताये कि इस मामले पर कैग की रिपोर्ट कहां है, जिसका उल्लेख अदालत में किया गया है? जेपीसी से जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि यह जांच हो गयी, तो पीएम मोदी और अनिल अंबानी का नाम ही सामने आयेगा.

राजद के राज्य सभा सांसद मनोज झा ने भी ट्वीट करके सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट को गलत जानकारी देने का आरोप लगाया.


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