संघर्ष सफल हुआ; प्रेमी जोड़े सचिन पायलट और सारा अब्दुल्ला जिन्होंने अपनी राह खुद बनायी

जयपुर: कांग्रेस ने दो राज्यों में युवा नेतृत्व के भरोसे पर जीत हासिल की, पर दोनों राज्यों में युवा नेतृत्व का अलग अलग हश्र हुआ. जहाना मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस आलाकमान पर पर्याप्त दवाब नहीं बना सके और उन्हें कहना पडा: अपने पिता की तरह मैंने सत्ता की लालसा नहीं की. वही राजस्थान में युवा नेता सचिन पायलट अपनी रणनीति में सफल हुआ और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को उन्हें राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलौत का डिप्टी बनाना पडा.

सचिन पायलट के हिस्से महज राजस्थान चुनाव में जीत का श्रेय ही नहीं आया, बल्कि उप मुख्यमंत्री का पद भी उनके हिस्से आया. अब वे राजनीति में एक अहम् पारी खेलने जा रहे हैं और ऐसा यकीन किया जा रहा है कि २०१९ के लोक सभा चुनाव में वे और बड़ी पारी खेलेंगे और अगर राजस्थान में कांग्रेस को जीत दिला सके, तो उनके आभामंडल में और बढ़ोत्तरी होगी और साथ ही वे मुख्यमंत्री अशोक गहलौत के लिए भी बड़ी चुनौती बनकर उभरेंगे.

भूतपूर्व कांग्रेसी नेता राजेश पायलट के सुपुत्र सचिन पायलट ने अपनी पढ़ाई एयरफोर्स बाल भारती स्कूल, नई दिल्ली और दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफंस कॉलेज से बीए की डिग्री हासिल की है. इसके बाद उन्होंने गाजियाबाद के आई.एम.टी से मार्केटिंग में डिप्लोमा किया. आगे की पढ़ाई के लिए वह लंदन चले गए. वहां उन्होंने पेनसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई की.

लंदन में पढ़ाई के दौरान सचिन की मुलाकात जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला की बेटी और उमर अब्दुल्ला की बहन साराह अब्दुल्ला से हुई और कुछ दिनों के बाद दोनों एक दूसरे को डेट करने लगे.

लंदन में पढ़ाई पूरी करने के बाद सचिन वापस दिल्ली लौट आए. वहीं, सारा अपनी पढ़ाई के लिए लंदन में रहीं.  ऐसे में  दोनों ई-मेल और फोन के जरिए सम्पर्क में बने रहे. दोनों ने लगभग तीन साल तक एक-दूसरे को डेट किया और इसके बाद दोनों ने  शादी करने का फैसला कर लिया.

पर शादी में मजहब की दीवार उठ खड़ी हुई. रास्ता आसान नहीं था.   सचिन के परिवार ने दोनों की शादी के लिए इनकार कर दिया. सारा के पिता फारुख अब्दुल्ला ने भी  उनसे इस बारे में बात करने से ही मना कर दिया था. उसने अपने पिता को मनाने के लिए सारे प्रयास किए लेकिन उनके पिता नहीं माने.

अंत में सचिन और सारा (Sara Abdullah) ने किसी की परवाह किए बिना जनवरी 2004 में शादी कर ली. जैसा कि स्वाभाविक था,  इस शादी में अब्दुल्ला परिवार का कोई भी सदस्य शामिल नहीं हुआ.  सचिन के परिवार ने सारा का साथ दिया.  समय के साथ अब्दुल्ला परिवार ने भी दोनों के रिश्ते को स्वीकार लिया.

सचिन (Sachin Pilot) ने शादी से पहले पॉलिटिक्स में कदम रखने के बारे में कभी नहीं सोचा था. लेकिन पिता राजेश पायलट की मौत के बाद वे  राजनीति में उतरे. सचिन ने 2004 के लोकसभा चुनावों में दौसा (राजस्थान) से बड़ी जीत हासिल की. उस समय सचिन पायलट की उम्र महज़ 26 साल थी.

आज सचिन पायलट चालीस साल के हो चुके हैं और राजस्थान की जनता को उनसे भविष्य में काफी उम्मीदें हैं. साथ ही उनके समर्थकों को यकीन है कि आने वाले वर्षों में वे राष्ट्रीय राजनीति में भी शानदार दखल देंगे.


[jetpack_subscription_form title="Subscribe to Marginalised.in" subscribe_text=" Enter your email address to subscribe and receive notifications of Latest news updates by email."]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.