1984 के सिख-विरोधी दंगों के मामले में कांग्रेसी नेता सज्जन कुमार दोषी करार

नयी दिल्ली:  1984 के सिख-विरोधी दंगों के एक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को दोषी करार दिया है. दिल्ली छावनी के राजपुर में हुई हिंसा के एक मामले में पांच लोगों की मौत से जुड़े इस केस में अप्रैल, 2013 में निचली अदालत ने सज्जन कुमार को बरी कर दिया था.

ज्ञात हो कि 31 अक्टूबर को इंदिरा गांधी की ह्त्या उनके सिख अंगरक्षकों बेअंत सिंह और सतवंत सिंह ने कर दी थी. ऑपरेशन ब्लू स्टार को लेकर सिखों में इंदिरा गांधी के खिलाफ रोष था. ऑपरेशन ब्लू स्टार में सिख अलगाववादी जनरैल सिंह भिंडरावाले अपने समर्थकों के साथ मारा गया था, बल्कि इस मिलिट्री ऑपरेशन में सिखों के प्रसिद्द गुरुद्वारा स्वर्ण मंदिर और अकाल तख़्त को भारी नुकसान पहुंचा था. इससे सिखों की धार्मिक भावना को चोट पहुंची थी. और इंदिरा गाँधी की सुरक्षा चिंता का विषय बन गयी थी. इंदिरा गाँधी से इंटेलिजेंस के सूत्रों ने कहा था कि वे अपनी सुरक्षा में लगे सिख अंगरक्षकों को हटा दें. पर इंदिरा गाँधी ने 1 सफदरजंग रोड पर तैनात सिख पुलिसकर्मियों को नहीं हटाया.


31 अक्टूबर को इंदिरा गाँधी की ह्त्या के बाद दिल्ली के कुछ इलाकों में कुछ सिखों को खुशियाँ मनाते देखा गया और एक दुसरे को मिठाई बांटते पाया गया. ऐसे में जनता में रोष बढ़ गया. और 1 नवम्बर से सिखों के खिलाफ लूटपाट, आगजनी, बलात्कार की घटनाएँ तेज गति से शुरू हो गयीं. इस दंगे में यूथ कांग्रेस के नेता भीड़ का नेतृत्व करते पाए गये. उनके हाथों में  वोटर लिस्ट थे, जिससे सिखों को आसानी से identify किया जा सका. दो दिनों के बाद आर्मी को बुलाया गया, लेकिन तब तक 3200 से अधिक सिखों की ह्त्या की जा चुकी थी. अकेले दिल्ली में 2500से अधिक सिख मारे गये. पुरे देश भर से सिख भाग कर पंजाब में बसने लगे.

राजीव गांधी ने इस दंगे पर अफ़सोस जाहिर करने के बजाय सफाई दी कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है, तो आसपास धरती पर कम्पन होता है.

सज्जन कुमार को दोषी करार दिया गया है और साथ ही उम्र कैद की सजा सुनाई गयी है:

कोर्ट ने कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को दोषी करारा दिया है. इसी के साथ उन्हें उम्रकैद की सजा भी सुना दी गई है. कोर्ट के फैसले के मुताबिक सज्जन कुमार 31 दिसंबर तक सरेंडर करना होगा. हाईकोर्ट का ये फैसला निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आया है. दरअसल इस मामले में निचली अदालत ने फैसला सुनाते हुए कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को बरी कर दिया था. इसके बाद निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई. 1 नवंबर 1984 को दिल्ली छावनी के राजनगर क्षेत्र में एक सिख परिवार के पांच सदस्यों की हत्या से जुड़े मामले में सज्जन कुमार को ये सजा सुनाई गयी है.

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