एनडीए छोड़ने के बाद भी महागठबंधन में शामिल होने के स्पष्ट संकेत नहीं दिए रालोसपा प्रमुख ने

पटना: एनडीए से बाहर निकलने के बाद भी रालोसपा अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा अभी महागठबंधन में शामिल होने के बारे में स्पष्ट संकेत नहीं दे रहे हैं. बल्कि उन्होंने अपने आप्शन खुले रखने का संकेत दिया है. बिहार में महागठबंधन में फिलहाल राजद, कांग्रेस के अलावा जीतन राम मांझी की हिन्दुस्तानी अवामी पार्टी है. ऐसे में अगर उपेन्द्र कुशवाहा की रालोसपा इसका हिस्सा बनती है, तो महागठबंधन की स्थिति मज़बूत होगी. और नीतीश कुमार (Nitish Kumar) और एनडीए (NDA) अन्य छोटे छोटे राजनीतिक खिलाडियों को अपनी ओर झुकाने के लिये दबाब में आ जायेंगे. इन छोटे लेकिन महत्वपूर्ण खिलाडियों में सन ऑफ़ मल्लाह मुकेश सहनी (Mukesh Sahni) की भूमिका महत्वपूर्ण हो जायेगी. बिहार में निषादों की अच्छी खासी संख्या है और कई विधान सभा क्षेत्रों में वे हार और जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, अगर मुकेश सहनी निषादों को एक जुट होकर वोट करने के लिए मनवा सकें.

रालोसपा (RLSP) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा( Upendra Kushwaha) का कहना है कि कांग्रेस नीत महागठबंधन में शामिल होना उनके पास मौजूद कई विकल्पों में से एक है. अभी उन्होंने कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है. कुशवाहा दिल्ली में वरिष्ठ कांग्रेस नेता अहमद पटेल और अखिलेश प्रसाद सिंह से मुलाकात से जुड़े पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे.

कुशवाहा ने कहा, ‘मैं इस बात को स्वीकार करता हूं कि मुलाकात हुई है लेकिन मैं यह सार्वजनिक नहीं कर सकता कि क्या बात हुई है… महागठबंधन में शामिल होना मेरे पास मौजूद कई विकल्पों में से एक है. हालांकि, हमने अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है.’ कुशवाहा ने हालांकि बिहार में पार्टी के तीन सदस्यों के बगावत के संबंध में किसी सवाल का जवाब नहीं दिया. रालोसपा के ‘मिलन समारोह में कुशवाहा ने पार्टी में उठ रही आवाज को दबाने का प्रयास किया.’

मालूम हो कि लोकसभा में पार्टी के कुशवाहा समेत तीन सांसद हैं. जबकि पार्टी के जहानाबाद से सांसद अरुण कुमार ने पिछले दो साल से अलग राह चुनी हुई है. वहीं दूसरे सांसद राम कुमार शर्मा ने पहले तो नीतीश की तरफ झुकाव दिखाया था लेकिन बाद में वह कुशवाहा के साथ ही आ गए.

फिलहाल कुशवाहा की एक बात बिहार में महागठबंधन में हलचल मचा सकती है. हो सकता है कि उन्होंने जान बुझ कर कांग्रेस के नेतृत्व में महागठबंधन शब्द का इस्तेमाल किया हो. बिहार में राजद ने कई मौकों पर  स्पष्ट  किया है कि भले कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी हो, पर बिहार में महागठबंधन का नेतृत्व राजद करेगा, वहीँ तीन विधानसभा चुनावों में जीत हासिल कर कांग्रेस के हौसले बुलंद हैं और बिहार में कांग्रेस झुकने के लिए कम तैयार है. वो पहले से ही कुशवाहा को 7 सीट देने के खिलाफ थी, अब बदली हुई परिस्थितियों में कुशवाहा का वक्तव्य क्या रंग लाता है, देखने वाली बात होगी.


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