आंदोलनरत पारा शिक्षकों के प्रति झारखंड सरकार लापरवाह, एक पारा शिक्षक की मौत

दुमका (झारखंड) : पारा शिक्षकों के प्रति झारखंड की सरकार कितनी बेरुखी कर रही है इसका प्रमाण यहां कल्याण मंत्री लुईस मरांडी के आवास के बाहर हुई एक पारा शिक्षक की मौत ने साबित कर दिया है. गौरतलब है कि उत्क्रमित मध्य विद्यालय के पारा शिक्षक कंचन कुमार दास की मौत कल मंत्री के आवास के बाहर हो गयी.

कंचन दास अपने साथियों के साथ 22 दिनों से मंत्री के आवास के बाहर धरना पर थे और ‘घेरा डालो, धरना डालो’ आंदोलन चल रहा था. उस वक्त हो गयी, जब वे अपने कुछ साथियों के साथ बेमियादी धरना में शामिल थे कंचन शनिवार रात धरना में शामिल हुए थे जहां ठंड के कारण उनकी मौत हो गयी. रविवार सुबह जब उनके साथी उठे तो पाया कि कंचनदास का पूरा शरीर अकड़ा हुआ है और .नाक से खून भी निकला था. उसे अस्पताल पहुंचाया गया जहां डाॅक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

अस्पताल के चिकित्सक डॉ दिलीप कुमार भगत ने बताया कि उक्त पारा शिक्षक को जब अस्पताल लाया गया, तो उसकी मौत हो चुकी थी. मौत की वजह का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही हो पायेगा. हालांकि कल रिपोर्ट आने के बाद भी उसे सार्वजनिक नहीं किया गया. उसके साथ धरना पर बैठे एक साथी ने बताया कि वह रात दस बजे आया और कंबल ओढ़कर हमारे साथ सो गया और सुबह यह हादसा हो गया.
कंचनदास की मौत के बाद सोशल मीडिया में लोगों का आक्रोश दिख रहा है. लोग सरकार के प्रति नाराजगी जता रहे हैं. जामा की विधायक सीता सोरेन ने कहा है कि सरकार का रवैया तानाशाह जैसा है.सीता सोरेन ने कहा कि पारा शिक्षकों के आंदोलन में झामुमो उनके साथ है. विधानसभा का सत्र शुरू होने के साथ ही यह मामला उनके विधायक सदन में उठायेंगे.

ज्ञात हो कि पारा शिक्षक 15 नवंबर से ही आंदोलन कर रहे हैं. प्रदेश की राजधानी रांची में भी मानदेय को लेकर पारा शिक्षकों ने झारखंड स्थापना दिवस के मौके पर प्रदर्शन किया था और जवाब में सरकार ने उनपर लाठी चार्ज कर उन्हें पिटवाया था. यहां तक की कवरेज कर रहे मीडिया कर्मियों को भी पीटा गया था. इस पूरे मामले में सरकार की चुप्पी बड़े सवाल खड़े कर रही है कि आखिर क्यों पारा शिक्षकों के साथ सरकार इस तरह की बेरुखी कर रही है.


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