छत्तीसगढ़ में भी तस्वीर स्पष्ट;अशोक गहलोत, कमलनाथ और भूपेश बघेल आज लेंगे शपथ

रायपुर: आखिरकार सस्पेंस से पर्दा उठ गया और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के परिणामों की घोषणा के छट्ठे दिन छत्तीसगढ़ के नए मुख्यमंत्री का नाम सामने आया. इसके साथ ही कांग्रेस ने जिन तीन राज्यों में भाजपा को हराकर सत्ता में लम्बे अरसे के बाद वापसी की, वहां के मुख्यमंत्रियों के नाम तय हो गए.

छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) के नाम पर कांग्रेस आलाकमान ने मुहर लगाई है. बघेल बतौर सीएम सोमवार शाम करीब 4.30 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. राजस्थान में अशोक गहलौत (Ashok Gahlaut) और मध्यप्रदेश में  कमलनाथ (Kamal Nath)भी आज सोमवार को ही मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे.

कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में  एंटी इन्कमबेंसी का जबर्दस्त फायदा उठाते हुए प्रचंड बहुमत से जीत हासिल कर 15 वर्षों से सत्ता में काबिज बीजेपी को उखाड़ फेंका. छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री की रेस में भूपेश बघेल के अलावा टीएस सिंहदेव, ताम्रध्वज साहू और चरण दास महंत शामिल थे.  1980 के दशक में  बघेल ने  यूथ कांग्रेस में शामिल होकर  अपनी राजनीतिक पारी शुरू की, 1993 में मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में भूपेश  दुर्ग की पाटन सीट से कांग्रेस के  उम्मीदवार बने और विधानसभा पहुंचे.  दिग्विजय सिंह की सरकार में भूपेश कैबिनेट मंत्री बने.

जब छत्तीसगढ़ बना, तब झीरम घाटी में कांग्रेस के  बड़े नेताओं की मौत के बाद बघेल ने नेतृत्व के संकट में फंसी कांग्रेस को नेतृत्व संकट से निकाला. पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए दिग्गज कांग्रेसी नेता एवं  पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी  और उनके बेटे अमित जोगी को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने का साहस किया. 2003 में रमन सिंह सरकार के सामने भूपेश विपक्ष में उपनेता बने. रमन सिंह सरकार के कई कथित घोटालों के खिलाफ कई हिस्सों में बघेल ने पदयात्रा निकालकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया जोश भरा.

कुछ महीनों पहले बीजेपी के मंत्री राजेश मूणत से जुड़ी एक कथित सेक्स सीडी के मामले में भूपेश बघेल को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया, तब उन्होंने जमानत लेने से इनकार कर दिया.

बघेल के पक्ष में जातिगत समीकरण भी बैठा क्योंकि बघेल कुर्मी जाति से आते हैं, जिनकी हिस्सेदारी राज्य की ओबीसी आबादी में लगभग 36 फीसद है.

अब राजनीतिक विश्लेषकों की नज़र होगी कि इन तीनों राज्यों में कांग्रेस किस तरह गवर्नेंस के अजेंडा में परिवर्तन लाती है. छत्तीसगढ़ में विकास परियोजनाओं के नाम पर आदिवासियों के अपने जमीन से हटाने के मुद्दे पर कैसे आगे बढती है, माओवादियों के प्रति कैसी रणनीति अपनाती है, क्या बातचीत का दौर शुरू होगा या फिर रमण सिंह सरकार की ही ताकत के  इस्तेमाल की रणनीति पर ही काम होगा.


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