#2019लोकसभाचुनाव: खरमास के बाद सीट शेयरिंग पर बात होगी: राजद सुप्रीमो लालू यादव

पटना: छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में भाजपा की सत्ता से बेदखली और कांग्रेस की जीत ने बिहार में भी महागठबंधन के नेताओं में एक नया जोश भर दिया है. साथ ही एनडीए के घटक भी अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य हुए हैं. चुनाव के नतीजे आने के बाद से  लोक सभा चुनाव के लिए रांची जमघट बन गया है. कारण साफ़ है. चारा घोटाले में सजा के बाद से राजद सुप्रीमो रांची में राजेंद्र मेडिकल कॉलेज ( रिम्स) में स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं.

भले ही कांग्रेस ने उन तीन राज्यों में भाजपा को बेदखल की है, पर बिहार में राजद बड़े भाई की भूमिका में है और राजद नेता बार बार इस ओर इशारा भी कर चुके हैं कि सीटों के बारे में अंतिम फैसला राजद का होगा. कांग्रेस ने भी रह रहकर आवाज उठायी है और खासकर रालोसपा प्रमुख उपेन्द्र कुशवाहा के अधिक सीट के दावे पर ऐतराज जताया है. हालाँकि कांग्रेस के बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने बार बार उपेन्द्र कुशवाहा को एनडीए छोड़कर महागठबंधन में शामिल होने का न्योता दिया था.

इन  तीन राज्यों के अलावा जिन दो राज्यों में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया वो है मिज़ोरम और तेलंगाना. फिलहाल जीत के जश्न में इन दो राज्यों में हार की बात नहीं हो रही है, पर राजनीतिक विश्लेषकों की नज़र से ये बात नहीं छुपी है कि जिन राज्यों में क्षेत्रीय पार्टियाँ और मज़बूत क्षेत्रीय नेता थे, वहां जनता में अन्य विकल्प पर ध्यान दिया. इस बात की ओर रह रहकर राजद के नेता कांग्रेस का इशारा खींचने से चूक नहीं रहे हैं.

बिहार की तस्वीर रोचक है: 
बिहार की तस्वीर रोचक है. यहाँ दोनों राष्ट्रीय पार्टियों कांग्रेस और भाजपा के लिए बहुत स्कोप नहीं है. एनडीए में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार सबसे कद्दावर नेता हैं, वहीँ दूसरी ओर महागठबंधन में लालू यादव सबसे बड़े नेता हैं. लालू यादव के अलावा जीतन राम मांझी की हम पार्टी, कुशवाहा की रालोस्पा भी सीट शेयरिंग में अधिक से अधिक सीट अपने नाम करना चाहेगी. ऐसे में अभी काफी बारगेनिंग चलेगी. उधर एनडीए में कुशवाहा के बाहर निकलने से रामबिलास पासवान की लोजपा फायदे में रहेगी और ऐसा माना जा रहा है कि एक्स्ट्रा सीट जदयू या भाजपा के खाते में न जाकर लोजपा के खाते में जायेगी.

अब जबकि एनडीए में सीटों का बंटवारा फाइनल हो गया है, अब सारी नज़र टिक गयी है रिम्स पर, जहाँ राजद सुप्रीमो हैं. भले वे जेल की सजा काट रहे हैं, पर पार्टी और बिहार की राजनीति पर उनकी पकड़ ढीली नहीं हुई है. और न ही उनके कोर वोटर बैंक में में किसी तरह की सेंध लगी है.
ऐसे में महागठबंधन के नेता रिम्स का चक्कर लगा रहे हैं, पर लालू एक बेहद तेज नेता हैं. उन्होंने अभी किसी तरह की टिप्पणी से बचते हुए स्पष्ट कर दिया है:

सीट शेयरिंग पर खरमास के बाद बात होगी.

दिसम्बर 15 से 13 जनवरी तक खरमास का समय चलता है और इस दौरान कोई भी नया काम करने से लोग अमूमन बचते हैं. 14 जनवरी के बाद से मकर संक्रांति के दिन से शुभ कार्य शुरू किये जाते हैं.

जेल के नियमों के अनुसार लालू से कोई भी मुलाकाती शनिवार को ही मिल सकता है और वो भी दो लोगों से ज्याद नहीं. ऐसे में लालू जेल के नियमों का पूरा फायदा उठा रहे हैं और आने वाले मुलाकातियों से मिलने से बच रहे हैं.
लालू को सीट शेयरिंग के दौरान कांग्रेस के बढे उत्साह से निपटना है. इस साल होने वाले तीनों उपचुनाव में राजद की जीत ने साबित किया कि नीतीश कुमार के महागठबंधन छोड़ने और लालू के जेल में जाने के बावजूद राजद का वोट बैंक पूरी तरह एकजुट है. इतना ही नहीं, अभी बिहार में सभी दलों में राजद का वोट बैंक सबसे बड़ा है.

राजद कम से कम 20 सीटों पर चुनाव लडेगा; ये संख्या बढ़कर 25 भी हो सकती है:

राजनीतिक विश्लेषकों  की राय है कि बिहार के 40 लोक सभा सीटों में राजद कम से कम 20 सीटों पर जरुर लडेगा, येसंख्या  बढ़कर 25 भी हो सकती  है. बाकी बचे  सीटों में कांग्रेस, लेफ्ट, शरद यादव, जीतन राम मांझी और उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टियों के दावें समाहित किये जायेंगे.
राजनीतिक विश्लेषकों की राय है कि लालू जिस तरह के घाघ नेता हैं, वे अपनी शर्त मनवाने के लिए समय हाथ में रख रहे हैं और इन सारे घटक दलों  को वे यकीन दिलाने में सफल हो जायेंगे कि अगर उन्हें अपनी राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई सफलतापूर्वक लड़नी है,
तो राजद के साथ रहने में ही फायदा है.

हालाँकि कई सीटों पर कई दावेदार हैं, पर एनडीए के विपरीत महागठबंधन में सीट शेयरिंग पर इतना विवाद नहीं होगा और तीन चार महीने हैं, ऐसे में नए साल की पहले महीने में सीट शेयरिंग की बात फाइनल हो जायेगी.

इस बीच लालू यादव की जमानत पर भी सुनवाई होनी है. अभी राजद को अपने ही अंदरूनी मामलों को सुलझाना है, तो ऐसे में खरमास का समय राजद के अपने घर को ठीक करने में जाएगा.


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