एनसीटीई  (NCTE) ने बीएड कोर्स की पढ़ाई की क्वालिटी बढ़ाने को लेकर कई तरह के कदम उठाये

पटना: एनसीटीई  (NCTE) ने बीएड कोर्स की पढ़ाई की क्वालिटी बढ़ाने को लेकर कई तरह के कदम उठाये हैं. बीएड के लिए एडहॉक या कांट्रैक्ट बेसिस पर शिक्षकों बहाली के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता को अब नेट या पीएचडी कर दिया गया है. इससे पहले एमए इन एजुकेशन या एमएड (M Ed) होने पर भी प्राइवेट कॉलेजों में शिक्षकों की बहाली की जा सकती थी. इसी तरह प्राचार्य के लिए पहले जहां किसी भी विषय में पीएचडी होना अनिवार्य था, अब एजुकेशन में ही पीएचडी होना अनिवार्य कर दिया गया है.

दो वर्ष के बीएड डिग्री की जगह अब चार साल का इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स:

नये नियम के बाद अब जो बीएड कॉलेजों में बहाली होगी, उसमें शिक्षकों की कमी हो सकती है. इसका कारण यह है कि एनसीटीई ने अब आगे चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स ( 4 year integrated BEd course) लागू करने की घोषणा कर रखी है. बिहार  में लगभग 300 प्राइवेट बीएड कॉलेज हैं. अब तक दो वर्षीय बीएड कोर्स लागू था. इसके मद्देनजर अभी इन कॉलेजों में लगभग दो हजार शिक्षकों की आवश्यकता थी. लेकिन अब एनसीटीई ने चार वर्षीय इंटीग्रेटेड  बीएड कोर्स लागू करने की घोषणा कर रखी है. ऐसे में इन कॉलेजों में लगभग चार हजार शिक्षकों की आवश्यकता होगी.
उम्मीद की जा रही है कि  एनसीटीई के नये नियमों के बाद शिक्षण के क्वालिटी में सुधार होगा.

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