NDA में घमासान: अब चिराग पासवान ने सीट शेयरिंग पर अंतिम फैसला के लिए अल्टीमेटम दिया

पटना: 2019 के लोक सभा चुनाव के लिए बिहार में रोचक परिदृश्य उभर रहे हैं. एनडीए में घमासान मचा हुआ है. उपेन्द्र कुशवाहा कम सीट और अपमान का हवाला देकर पहले ही एनडीए से निकल चुके हैं. जिन दिनों उपेन्द्र कुशवाहा नीतीश कुमार पर निशाना साधे हुए थे, उस दौरान लोजपा रालोसपा को गठबंधन धर्म सिखा रहा था. ये तय भी हो चुका था कि एनडीए से बाहर जाने की स्थिति में रालोसपा के हिस्से की सीट लोजपा के खाते में जायेगी. पर अब लोजपा के सुर बदले नज़र आ रहे हैं. लोजपा संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष चिराग पासवान ने एक ओर विधान सभा चुनावों के कांग्रेस के बेहतरीन प्रदर्शन के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की तारीफ की, तो दूसरी ओर एनडीए को नाज़ुक दौर से गुजरता बताकर भाजपा पर दबाब बनाने की राजनीति शुरू कर दी है.

लोजपा प्रदेश अध्यक्ष पशुपति पारस ने बुधवार को पटना में प्रेस कांफ्रेंस करके कहा कि भाजपा को 31 दिसम्बर तक सीटों के बंटवारे को अंतिम रूप दे देना चाहिए, नहीं तो लोजपा का एनडीए से मोह भंग हो सकता है. इतना ही नहीं, लोजपा ने अपनी मांगे बढाते हुए झारखण्ड और यूपी में भी सीटों की मांग की है. पशुपति पारस का कहना था, “हमें झारखंड और उत्तर प्रदेश में सीटें चाहिएं, क्योंकि हमारा वोटबैंक इन राज्यों में भी है. समय निकला जा रहा है. हम चाह रहे हैं कि अमित शाह इस पर 31 दिसंबर तक फैसला करें. हम चाहते हैं कि भाजपा गठबंधन की पवित्रता बनाए रखे.”


बता दें कि बता दें कि लोकसभा चुनाव 2014 में बीजेपी ने 22 सीटें जीती थीं. वहीं केंद्रीय मंत्री रामविलास की पार्टी लोजपा 7 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, जिसमें से 6 सीटों पर उसकी जीत हुई थी. इसके अलावा, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोसपा की पार्टी ने 3 सीटों पर चुनाव लड़ा था और तीनों सीटें अपने नाम की थी.

इस मौके पर रालोसपा अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने भाजपा पर निशाना साधते हुए लोजपा को यथाशीघ्र एनडीए से बाहर निकल आने की सलाह दे डाली, क्योंकि उनकी राय है कि भाजपा छोटी पार्टियों को खा जाती है. इस बीच खबर आ रही है कि ऐसी खबर है कि कुशवाहा आज दिल्ली में महागठबंधन में शामिल होने के फैसले का ऐलान कर सकते हैं. बताया जा रहा है कि राजद नेता तेजस्वी यादव, हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के जीतन राम मांझी और कांग्रेस के एक प्रतिनिधि की मौजूदगी में एक प्रेस कांफ्रेंस कर कुशवाहा महागठबंधन में शामिल होने का ऐलान कर सकते हैं. विपक्षी नेता शरद यादव भी कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं.

ऐसे में रोचक स्थित उभर गई है. कई सवाल उभरने लगे हैं. मसलन क्या लोजपा ने मान लिया है कि 2019 में केंद्र से एनडीए की विदाई तय है. भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह लोजपा की इस धमकी से कैसे निपटेंगे? क्या महज एक सीट के मुद्दे पर लोजपा एनडीए से बाहर निकल सकता है? खासकर जब उन्हें 6 सीटें मिल रही हैं और नए चुनावी समीकरण में भाजपा पहले से अपने जीते हुए 5 सांसदों की कुर्बानी दे रही है?

क्या एनडीए बिहार में दलित वोटों का फिसलना स्वीकार कर पायेगा? आंकड़ों के अनुसार, अगर लोजपा  एनडीए से अलग हो जाती है तो इसका काफी असर पड़ेगा, राज्य का सबसे कद्दावर दलित चेहरा हाथ से निकल जाएगा  और एनडीए  नुकसान की स्थिति में आ सकता है. बिहार की कुल आबादी में अनुसूचित जाति के वोटरों की संख्या करीब 17-18 फीसदी है और इन अनुसूचित जातियों में पासवान जाति के वोटरों की संख्या लगभग 5-7 फीसदी है. वहीं, राजद के साथ दलितों का एक और चेहरे के रूप में जीतनराम मांझी है.  और अगर एनडीए लोजपा को खोना नहीं चाहता, तो फिर भाजपा और जदयू में से कौन दल एक सीट की क़ुरबानी देकर लोजपा के लिए सात सीट का रास्ता बनाएगा? साथ ही, ये सवाल भी बड़ा मायने रखता है कि क्या भाजपा अध्यक्ष इस ब्लैकमेल से शांत बैठेंगे या उचित समय पर लोजपा सुप्रीमो के खिलाफ कोई दबी हुई फाइल खोलेंगे और उन्हें पिटारे में कैद करेंगे?

कुल मिलाकर 2019 के लिए रोचक राजनीतिक खिचड़ी पक रही है बिहार में. इस राजनीतिक डेवलपमेंट पर राजद की भी नज़र होगी.


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