सावधान !अब आपके कंप्यूटर में कोई भी डाटा नहीं रहेगा प्राइवेट, ये दस सरकारी एजेंसियां रखेंगी नजर

नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने भले ही निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार बता दिया है, लेकिन सरकार इस अधिकार का हनन करने की तैयारी कर चुकी है. चौंकिए मत यह बात सच है . सरकार ने दस सुरक्षा एजेंसियों को यह अधिकार दिये हैं, जिसके जरिये वो किसी व्यक्ति के कंप्यूटर पर रख सकेंगे.

सरकार के इस नये आदेश के अनुसार यह सुरक्षा एजेंसियां ना सिर्फ आपके मेल, फेसबुक और व्हाट्‌सएप पर नजर रखेंगी बल्कि आपके कंप्यूटर में स्टोर दस्तावेज की भी निगरानी कर सकेंगी. गृह मंत्रालय ने आईटी एक्ट, 2000 69 (1) के तहत यह आदेश दिया है. इस एक्ट के अनुसार केंद्र सरकार किसी भी एजेंसी को यह आदेश दे सकती है अगर सरकार को लगे कि देश की संप्रुभता और एकता अंखडता पर खतरा महसूस हो या फिर इसके अलावा अगर किसी देश से संबंध का सवाल हो या किसी मामले की जांच के लिए जरूरी हो.

जिन दस केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को यह अधिकार दिया गया है, उनके नाम हैं – खुफिया विभाग, नार्कोटिक्स, सीबीआई, रॉ, ईडी, डायरेक्टर अॅाफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस, एनआईए, डायरेक्टर अॅाफ सिग्नल इंटेलिजेंस, कमिश्नर अॅाफ दिल्ली पुलिस और सेंट्रल बोर्ड अॅाफ डायरेक्टर टैक्सेस.
इस अधिसूचना में कहा गया है कि आदेश के अनुसार ग्राहक और सर्विस प्रोवाइडर में से किसी को इन आरोपों के तहत दोषी पाया गया तो उसे सात साल की सजा और जुर्माना भरना पड़ सकता है.

गौरतलब है कि निजता के अधिकार को मुद्दा बनाकर सरकार ने कैंब्रिज एनालिटिका कंपनी की जांच की थी और कांग्रेस पार्टी पर उनसे सेवाएं लेने का आरोप भी आरोप लगाया था. कंपनी पर फेसबुक के 5 करोड़ यूजर का डेटा बिना अनुमति के इस्तेमाल करने का आरोप लगा था जिसके बाद कैंब्रिज एनालिटिका ने अपने चीफ एक्जीक्यूटिव अलेक्जेंडर निक्स को सस्पेंड कर दिया था. कैंब्रिज एनालिटिका ने अमेरिकी राष्ट्रपति पद के 2016 चुनाव के दौरान डोनाल्ड ट्रंप की कैंपेनिंग की थी.आधार डाटा लीक की भी देश में खूब चर्चाएं हुईं थी, जिसे निजता के अधिकार का उल्लंघन बताया गया था.

सरकार के इस कदम की पूरा विपक्ष आलोचना कर रहा है. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि यह सरकार के खतरनाक इरादों को बताता है. s


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