दबाब की राजनीति करने में पासवान सफल; राफेल, नोट्बंदी के मुद्दे ढंक दिए गये; एनडीए में रहेंगे

पटना: लोजपा प्रमुख दबाब की राजनीति करने में सिद्धहस्त हैं. उनकी राजनीति व्यक्तिवादी है और इसका मूल्यों से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं है. रामबिलास पासवान को अच्छी तरह पता था कि रालोसपा के एनडीए से निकल जाने के बाद भाजपा और जदयू दबाब में आ गये हैं और वोटों को संतुलन बिगड़ गया है, और अगर लोजपा भी महागठबंधन का हिस्सा बन जाता है, तो बिहार में दलित वोटों का बड़ा हिस्सा महागठबंधन के हिस्से में चला जाएगा. हाल के वर्षों में जदयू से कद्दावर दलित नेताओं के निकलने से पार्टी की दलित वोटों पर पकड़ कमजोर हुई है. हालाँकि पार्टी ने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी को एमएलसी बनाया और बात चल रही है कि अगले मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें मंत्रालय भी दिया जा सकता है, पर इसपर शक बना हुआ है कि क्या वे जीतन राम मांझी की कमी की भरपाई करने में सफल हो पायेंगे? इसके अलावा दो दिग्गज दलित नेता जदयू के पास हैं. एक, श्याम रजक और दुसरे महेश्वर हजारी. महेश्वर हजारी पासवान समुदाय से आते हैं और इस वोट बैंक पर लोजपा प्रमुख का एकाधिकार है. ऐसे में पासवान समाज में जदयू दलित नेता महेश्वर हजारी की अपने विधानसभा क्षेत्र के बाहर बहुत चलेगी, इसमें भी शक है. दूसरी ओर, श्याम रजक, हालाँकि इन दिनों नीतीश की नज़रों में पहले की तरह प्रिय नहीं हैं और मंत्रिमंडल में नहीं हैं, पर वे अपने इलाके फुलवारी शरीफ में अच्छे खासे लोकप्रिय हैं और वहां से वे लगातार चुनाव जीतते आये हैं. वे लालू और फिर नीतीश के साथ लम्बे समय से रहे हैं. पर श्याम रजक का कद भी मांझी के कद के आगे छोटा है. मांझी का कद मुख्यमंत्री बनने के बाद तेजी से बढ़ा है. राजद उनका वैल्यू समझ रहा है.

ऐसी परिस्थितियों में लोजपा सुप्रीमो ने तय किया कि एनडीए से अपनी कीमत वसूलने का सही वक्त है. चिराग पासवान ने नोट्बंदी और राफेल के मुद्दे पर भाजपा के सामने असहज स्थिति पैदा की. नयी परिस्थितियों से निबटने के लिए जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार  भी भाजपा के साथ बैठक करने के लिए दिल्ली गए.

अब समाचार आ रहा है कि रामविलास पासवान एनडीए का हिस्सा बने रहेंगे. सूत्रों के मुताबिक, संसद परिसर में कल  हुई बैठक में बिहार में सीट शेयरिंग का फाइनल फॉर्मूला तैयार कर लिया गया है.   सूत्रों के अनुसार, बीजेपी और जेडीयू को 17-17 सीटें तथा एलजेपी को 6 सीटें दी जाएंगी. वहीं खबर ये भी है कि एलजेपी को बीजेपी के कोटे से राज्यसभा की एक सीट भी दी जाएगी.   इस तरह लोजपा की सात सीटों की मांग पूरी की जायेगी.

ज्ञात हो कि राम विलास पासवान, पशुपति कुमार, चिराग पासवान और रामचंद्र पासवान की शुक्रवार सुबह अरुण जेटली के साथ मुलाकात हुई. संसद भवन में हुई इस बैठक में बिहार भाजपा प्रभारी भूपेंद्र यादव और बिहार भाजपा अध्यक्ष नित्यानंद राय भी मौजूद थे. इससे पहले बुधवार को एलजेपी संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष चिराग पासवान ने भी अपने तेवर तल्ख कर लिए थे. उन्होंने एनडीए के सहयोगियों को भाव नहीं दिए जाने की बात कहते हुए सीट शेयरिंग का समाधान नहीं होने पर नुकसान होने की चेतावनी के साथ 31 दिसंबर का अल्टीमेटम भी दिया था.


फिलहाल बिहार की राजनीति काफी तेजी से अप्रत्याशित टर्न ले रही है. हर दल अपनी पूरी कीमत वसूलने में लगा है. एनडीए की अंदरूनी गतिविधियों पर भले ही महागठबंधन की नज़र है, पर सीट शेयरिंग पर अभी महागठबंधन में भी काफी माथापच्ची होने वाली है. राजद सुप्रीमो ने कहा है कि सीट शेयरिंग पर बात खरमास के बाद होगी, पर वे जानते हैं कि आगे की राह फिलहाल आसान नहीं होने वाली है. लोजपा के एनडीए में रहने की खबर लालू यादव के लिए भी अच्छी नहीं है. वे फिलहाल चाहेंगे कि बिहार में महागठबंधन बनाया जाए, भाजपा को शिकस्त दिया जाए, केंद्र में भाजपा की सरकार को बेदखल करके अपने गले में पड़ी सीबीआई की फांस को भी हटाया जाए, जिसे मोदी सरकार ने भूत की तरह उनके पीछे लगा दिया है. ऐसे में पासवान को लुभाने के राजद के प्रयास अभी जारी रहेंगे, ऐसी उम्मीद है. ऐसी परिस्थियों में एनडीए भी अंतिम तौर पर आश्वस्त नहीं होगा. आखिर लालू यादव ने रामबिलास पासवान को यूं ही नहीं सबसे बड़ा मौसम वैज्ञानिक कहा था.


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