#2018:सर्वाधिक लोकप्रिय सांसद: आर के सिन्हा, जिन्होंने 250 रूपये से 5000 करोड़ का बिज़नस एम्पायर खड़ा किया

वर्ष 2018 में सामाजिक कार्यों के लिए जाने जायेंगे भाजपा सांसद आर के सिन्हा. 2018 में उन्होंने कई उल्लेखनीय कार्य किये:
1. गरीब मेधावी छात्र छात्राओं को विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं, इंजीनियरिंग, मेडिकल आदि में नामांकन के लिए अपनी तरफ से लगभग एक करोड़ रूपये खर्च किये.
2. अब तक दर्जनों गरीब लड़कियों की शादी में तक़रीबन 22 लाख रूपये खर्च किये.
३. चिकित्सा सहायता में अब तक लगभग 15 लाख रूपये खर्च किये.
४. मंदिर निर्माण और अन्य धार्मिक कार्यों में तक़रीबन 1 करोड़ 22 लाख खर्च किये.
5. अन्य सामाजिक कार्यों में लगभग डेढ़ करोड़ रूपये खर्च किये.
6. आदि चित्रगुप्त फाइनेंस लिमिटेड मुद्रा बैंक के द्वारा 16 ब्रांचों के तहत 40 करोड़ रूपये ऋण वितरण किया गया. यह ऋण बिना किसी ब्याज के वैसे लोगों को दिया गया जो समाज में सर्वाधिक उपेक्षित थे.

७. अवसर ट्रस्ट के द्वारा बिहार और झारखण्ड के करीब 50 गरीब मेधावी छात्र- छात्राओं को तकनिकी क्षेत्र में सहभागिता/ IIT का निःशुल्क कोचिंग कराया जा रहा है, जिसमे पढ़ाई, पठन सामग्री, आवास, भोजन, और हॉस्टल की सुविधा मुफ्त में दी जा रही है.

8. ओपीडी अम्बुलेंस सेवा द्वारा 3500 से अधिक रोगियों को चिकित्सा लाभ कराया गया.
9.सांसद आर के सिन्हा ने दर्जनों सेवानिवृत पत्रकारों को अपने संस्थानों में सम्मानजनक स्थान दिया.
पत्रकारिता से बिज़नस, फिर राजनीति और समाज सेवा. आर के सिन्हा ने पिछले 44 सालों में काफी लंबा सफ़र तय किया है, जो संघर्षों से भरा है, रोचक है, और साथ ही प्रेरणादायक भी है.

सेना के 14 रिटायर्ड जवानों को पहली बार बनाया सिक्योरिटी गार्ड 

सिन्हा का जन्म 22 सितंबर 1951 को लोअर मिडिल क्लास फैमिली में हुआ था. सात भाई-बहनों में से एक सिन्हा ने पॉलिटिकल साइंस में स्नातक  किया. फिर 1971 में 20 साल की उम्र में पटना के दैनिक अखबार द सर्चलाइट में ट्रेनी रिपोर्टर की नौकरी शुरू की.

बक्सर में जन्मे रविन्द्र किशोर सिन्हा ने 22 साल की उम्र में पटना में सैनिक दोस्तों की सलाह पर पटना में ही एक छोटा गैरेज लीज पर लिया और  सिर्फ 250 रुपए से एक कंपनी शुरू की थी. उन्होंने सबसे पहले सेना के 14 रिटायर्ड जवानों को सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी दी थी. आज ये कंपनी एसआइएस के नाम से जानी जाती है. इस कंपनी के शुरुआत करने की कहानी कम रोचक नहीं.

साल 1971 में जब बांग्लादेश की आजादी को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच जब युद्ध  चल रहा था तो आर के सिन्हा ने बॉर्डर पोस्ट पर बिहार रेजीमेंट के साथ रहकर रिर्पोटिंग की. वार फ्रंट से लौटने के बाद जयप्रकाश नारायण के विचारों से प्रेरित हुए और उनके जेपी आन्दोलन से जुड़ गए. देश में इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगा दिया था. मीडिया पर सरकार का दवाब था. 1974 में आर के सिन्हा की नौकरी चली गयी.  एक महीने की एडवांस सैलरी देकर सिन्हा को नौकरी से निकाल दिया गया.

ये उनके जीवन के कठिन दिन थे. पर उम्मीद की किरण बाकी थी. युवा पत्रकार ने हिम्मत नहीं हारी और अब दूसरी राह बनाने की ठान ली.

आर्थिक कठिनाईयों के दौर में मात्र 250 रुपए से शुरू की थी  SIS Securities: 

भारत-पाकिस्तान युद्ध की रिपोर्टिंग के दौरान आर के सिन्हा की दोस्ती बिहारी  सैनिकों से हो गई थी. नौकरी से निकाले जाने के बाद उन फौजियों ने सिन्हा की मदद की और सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेस सर्विस चलाने की एडवाइस दी. नौकरी से निकाले जाने के बाद उन्होंने उस आईडिया पर काम करना शुरू किया. उन्होंने 250 रूपये से अपनी कंपनी शुरू की. दानापुर में मिलिट्री रेजिमेंट गये. वहां जाकर रिटायर हो गये फौजियों के बारे में जानकारी जुटाई और फिर 14 फौजियों को 400 रूपये  की दर से नियुक्त कर उन्होंने SIS की नींव रखी. उस समय नौकरी से हटाये गये पत्रकार और संघर्षशील युवा उद्यमी को क्या पता था कि आने वाले दशकों में वे बिहार ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे जाने माने उद्यमियों में गिने जायेंगे.

उन दिनों उन्हें अप्रत्याशित तरीके से मदद मिली अपने एक दोस्त से. उनका एक दोस्त कंस्ट्रक्शन बिजनेस में था. उसे अपने प्रोजेक्ट साइट की सिक्योरिटी के लिए सिक्यूरिटी गार्ड्स की जरूरत थी.

आज 70 हजार वर्क फोर्स, टर्नओवर 5000 करोड़ से ज्यादा

सिन्हा को पहला कॉन्ट्रैक्ट अपने इसी दोस्त से मिला.  1974 में अपने दोस्त की रामगढ़ की फैक्ट्री की सुरक्षा के लिए उन्होंने 14 गार्ड्स की सप्लाई की.  दोस्त ने  हर गार्ड के लिए 400 रुपए प्रति माह के हिसाब से सिन्हा को भुगतान किया.

सिन्हा की मेहनत और कुशलता से एक साल बाद ही एसआइएस में गार्ड्स की संख्या 14 से बढ़कर 250-300 हो गई और इसका टर्नओवर भी 1 लाख से ऊपर पहुंच गया. 2014 के मुताबिक, इस कंपनी का टर्नओवर 3200 करोड़ रुपए था जो 2017 में बढ़कर 5000 करोड़ से ज्यादा हो गया है.

सिन्हा की इस कंपनी में 70 हजार से ज्यादा गार्ड्स काम करते हैं जिनमें से आधे बिहार के हैं.  सिन्हा को देश में चौकीदार सिस्टम खत्म करने का भी श्रेय जाता है.

2008 में आर के सिन्हा अपने बिज़नस को विदेश में लेकर गये, जब उन्होंने ऑस्ट्रलियाई सिक्यूरिटी एजेंसी Chubb Security को खरीद लिया. इसके लिए 300 मिलियन डॉलर की बोली लगी थी. इस टेक ओवर को अंजाम देने के लिए उन्होंने अपनी कंपनी के 14 परसेंट शेयर बेच दिए. इस खरीद के साथ SIS सिक्यूरिटी सर्विस इंडस्ट्री में पहला भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनी हो गया. बाद में कंपनी ने अन्य क्षेत्रों में भी अपने कदम रखे.

राजनीति में भी कदम रखा: 

एक अत्यंत सफल उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बनाने के बाद आर के सिन्हा ने राजनीति में भी अपने पाँव जमाये. 2014 में भाजपा ने उन्हें अपने टिकट से राज्य सभा भेजा. श्री सिन्हा की रुचियों का दायरा विशाल है. बिज़नस, राजनीति, समाज सेवा के अलावा वे लगातार सामाजिक राजनीतिक मुद्दों पर लिखते रहते हैं. वे सोशल मीडिया पर बेहद प्रभावशाली उपस्थिति रखते हैं, फेसबुक पर उनके पोस्ट लाखों की संख्या में पढ़े जाते हैं, वहां उनके फोलोवेर्स की संख्या लाखों में है.


[jetpack_subscription_form title="Subscribe to Marginalised.in" subscribe_text=" Enter your email address to subscribe and receive notifications of Latest news updates by email."]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.