मेघालय:20 लाख लीटर से अधिक पानी निकाला जा चूका है; खदान मजदूर अभी भी खदान के अन्दर फंसे हैं

मेघालय: दो सप्ताह से एक कोयले की खदान में फंसे 15 मजदूरों को बचाने लिए नेवी के डाइवर्स का एक दल शनिवार को विशाखापत्नम से मेघालय के जयंतिया हिल्स जिले में पहुंचा. नेवी के 15 और ओडिशा फायर ऐंड रेस्क्यू सर्विस के 21 डाइवर्स खदान के अंदर जाने में नाकाम रहे. ईस्ट जयंतिया हिल्स के पुलिस अधीक्षक सिलवेस्ट नांगटेंगर ने बताया कि तमाम टीमें मिल कर काम कर रही हैं. भीतर फंसे मजदूरों को बचाना हमारी शीर्ष प्राथमिकता है.


ध्यान रहे कि 14 दिसंबर से ही बचाव अभियान शुरू होने के बावजूद अब तक उन मजदूरों का कोई पता नहीं चल सका है. राज्य प्रशासन की ओर से तालमेल नहीं होने की वजह से ओडिशा से आने वाली टीम को गुवाहाटी से मौके पर पहुंचने में काफी देरी हुई.

पिछले दो हफ्तों राज्य की एजेंसी और एनडीआरएफ 20 लाख लीटर से ज्यादा पानी निकाल चुकी है, पानी का स्तर अब तक ज्यों का त्यों बना हुआ है. करीब 15 दिन पहले खदान से बाहर आए 5 मजदूरों में से एक साहिब अली ने बताया, ‘उस दिन हम 22 लोग खदान में गए थे. कई खुदाई करने वाले खदान के दूर के हिस्से में चले गए थे.’


साहिब ने बताया कि उन्होंने 13 दिसंबर को सुबह 5 बजे काम शुरू किया था.  7 बजे तक, खदान पानी से भर गई थी. मैं 5-6 फीट अंदर था और कोयले से भरा रेड़ा बाहर लाया था. मैं खदान के अंदर एक अजीब सी हवा महसूस कर सकता था, जो असामान्य थी. इसके साथ पानी के बहने की आवाज आ रही थी.’

अब ये सवाल पैदा होने लगा है कि क्या इतने दिनों के बाद भी खदान में मजदूर ज़िंदा हो सकते हैं. मजदूरों के परिवार वालों ने उम्मीद छोड़ दी है. साहिब का कहना है, ‘खदान में फंसे मजदूरों के जिंदा होने की कोई उम्मीद नहीं है. कोई भी आदमी आखिर कितना समय तक पानी के अंदर सांस ले सकता है.’

मुगुरमारी गांव के शोहोर अली का बेटा, भाई और दामाद इस खदान में फंसे हैं. अली ने कहा, ‘मेरी सिर्फ इतनी मांग है कि अंतिम संस्कार के लिए हमें कम से कम उनका शरीर तो मिल जाए.’


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