क्या नरेन्द्र मोदी 2019 में लोकसभा चुनाव पूरी से लड़ेंगे? क्या बंगाल और ओडिशा पर निशाना है?

पटना: जैसे जैसे 2019 का लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, राजनीतिक कयासों के दौर चलने शुरू हो गये हैं. इन्ही कयासों के दौर में चर्चा चल रही है कि शायद नरेंद्र मोदी अगला चुनाव पूरी से लड़ें.


ओडिशा में पदमपुर विधान सभा क्षेत्र के भाजपा विधायक प्रदीप पुरोहित ने दावा किया है कि 90 फीसदी सम्भावना है कि नरेंद्र मोदी पूरी लोक सभा सीट से चुनाव लड़ेंगे. उन्होंने कहा कि 2014में उन्होंने भगवान जगन्नाथ से आशीर्वाद लिया था और उन्हें वाराणसी से जीत हासिल हुई थी. ओडिशा की जनता की दिली इच्छा है कि वे इस बार पूरी लोक सभा सीट से चुनाव लड़ें. उन्हें जीत हासिल होगी.

ज्ञात हो कि  2014 में नरेंद्र मोदी ने दो लोक सभा क्षेत्रों- वाराणसी और वडोदरा सीट से चुनाव लड़ा था. उन्हें दोनों सीटों पर जीत हासिल हुई थी. पर उन्होंने वाराणसी सीट रखा और वरोदरा सीट से इस्तीफा दे दिया. वाराणसी सीट पर उन्हें कुल 5,81,022 वोट मिले   थे, वहीँ उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी   आप के अरविन्द केजरीवाल को 2,09,238 वोट और कांग्रेस के उम्मीदवार अजय राय को 75,614 वोट मिले, जबकि चौथे स्थान पर रहे बसपा उम्मीदवार  विजय प्रकाश जायसवाल को 60,579 वोट मिले थे.

अब जबकि 2019 का लोक सभा चुनाव नजदीक आ गया है, तो चर्चा जोरों पर है कि नरेन्द्र मोदी वाराणसी सीट छोड़ सकते हैं और ईस्ट इंडिया में प्रभाव पैदा करने के लिए पूरी सीट का चुनाव कर सकते हैं, जिस तरह से 2014 में उन्होंने उत्तर प्रदेश में भाजपा का प्रभावी चुनावी परफॉरमेंस को सुनिश्चित करने के लिए ये रणनीति अपनाई. ज्ञात हो कि पूर्वी भारत जिसमे बंगाल और ओडिशा आते हैं, में भाजपा की स्थिति कमजोर है. ऐसे में वे हिंदुत्व की राजनीति करते हुए मंदिरों के शहर पूरी का चयन कर सकते हैं.

2014 लोक सभा चुनाव में ओडिशा और बंगाल में मोदी मैजिक नहीं चला था: 

बता दें कि पश्चिम बंगाल में कुल 42 लोक सभा सीट हैं. और बंगाल उन चंद राज्यों में था जहाँ 2014 लोक सभा चुनाव में मोदी लहर नहीं असर छोड़ पायी. और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को 34 सीट हासिल हुआ और साथ ही वोटों का प्रतिशत भी 39.05 प्रतिशत हो गया, वही भाजपा को महज दो सीटों पर जीत हासिल हुई. भाजपा के वोटों का प्रतिशत 16.80 प्रतिशत था और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के बाद तीसरे नंबर की पार्टी थी. कांग्रेस चौथे नंबर की पार्टी थी.

वही ओडिशा में 21 लोक सभा सीट हैं. ओडिशा भी नरेंद्र मोदी लहर से पूरी तरह अप्रभावित रहा. नवीन पटनायक के नेतृत्व में बीजू जनता दल को 20 सीटों पर जीत हासिल हुई और वोट प्रतिशत रहा 44.10 प्रतिशत. वही भाजपा को केवल एक सीट मिला- सुंदरगढ़ से जुआल ओराम जीते. और इसके वोटों का प्रतिशत रहा 21.50 प्रतिशत. कांग्रेस को हालाँकि 26 फीसदी वोट मिले, पर उसका खाता नहीं खुल पाया.

ऐसे में बंगाल और ओडिशा को मिलाकर कुल 63 सीट होते हैं, और भाजपा को महज तीन सीट मिले. ऐसे में भाजपा के इन दोनों राज्यों में अच्छा प्रदर्शन करना बेहद जरुरी हो जाता है. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह इस बात से वाकिफ हैं और वे पूरी आक्रामकता से पश्चिम बंगाल पर फोकस किये हुए हैं.

हालाँकि ANI के साथ बातचीत में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे महज अफवाह बताया. हालांकि राजनीतिक विश्लेषक फिलहाल इसे अफवाह मानने को तैयार नहीं, बल्कि वे इसे भाजपा की चुनावी रणनीति से जोड़ कर देख रहे हैं.

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