पाटलिपुत्र लोकसभा सीट राजद के खाते में जा सकती है; गर भाई वीरेंद्र की जगह मीसा उम्मीदवार हों

पटना: राजद के लिये पाटलिपुत्र सीट बेहद महत्वपूर्ण है. यादव बहुल इस लोक सभा सीट से खुद राजद सुप्रीमो 2009 में हार चुके हैं और फिर 2014 में मीसा भारती भी हार चुकी हैं. हालाँकि 2016 से मीसा भारती  राज्य सभा सांसद हैं, पर तेजप्रताप यादव ने मीसा भारती के नाम को इस सीट के लिए आगे बढ़ाया है. कुछ समय से इस सीट पर मनेर के विधायक और लालू परिवार के भक्त भाई वीरेंद्र के चुनाव लड़ने की संभावना व्यक्त की जा रही थी. भाई वीरेंद्र के नाम पर तेजप्रताप  ने भड़क कर कह डाला: आखिर उसकी हैसियत क्या है?

इससे पशोपेश की स्थिति पैदा हो गयी है. तेज प्रताप के बयान के बाद बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और लालू के छोटे बेटे तेजस्वी यादव ने कहा कि इसका फैसला पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और संसदीय बोर्ड करेगा.

तेजस्वी ने कहा कि ऐसे बयानों का कोई महत्व नहीं है. इस पर फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष करेंगे कि कौन किस सीट से चुनाव लड़ेगा. उन्होंने कहा कि इससे पहले तो सीट शेयरिंग करना जरूरी है. कौन कितने सीटों पर चुनाव लड़ेगा, यह जरूरी है.

ऐसे में राबड़ी देवी को बीच बचाव में आना पडा. राबड़ी देवी ने सभी पक्षों को अनावश्यक बयानबाजी से बचने को कहा. तेज प्रताप ने शुक्रवार को पार्टी कार्यालय में जनता दरबार तो लगाया लेकिन मीडिया से विवादित बयान देने से बचते रहे. उन्होंने अपने बयान से यू टर्न लेते हुए कहा कि प्रत्याशी का चयन पार्टी सुप्रीमो काे करना है. भाई होने के नाते मैंने मीसा दीदी की सिर्फ वकालत की है.

उधर भाई वीरेंद्र भी राबड़ी देवी से मिलने पहुंचे. राबड़ी देवी से मिलने के बाद भाई वीरेंद्र ने भी कहा कि कहीं कोई गड़बड़ी नहीं है. सबकुछ ठीक है. लालू प्रसाद मेरे गॉड फादर हैं. राष्ट्रीय अध्यक्ष जो चाहेंगे वही होगा. लालू प्रसाद के निर्णय का वह सम्मान करेंगे.

यादव वोटों के बंटवारे का नुकसान राजद को उठाना पड़ा है: 

वोटिंग का पैटर्न और पाटलिपुत्र लोक सभा सीट का सामाजिक विश्लेषण तेज प्रताप यादव की राजनीतिक समझ की दाद देता है.

बता दें कि 2008 तक पटना के लिए एक ही लोकसभा सीट था. उसके बाद पटना लोक सभा सीट को दो भागों में बांटा गया. एक पटना साहिब सीट और दूसरा पटना के ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर पाटलिपुत्र सीट. पाटलिपुत्र लोक सभा क्षेत्र में दानापुर, मनेर, फुलवारी, मसौढ़ी, पालीगंज और बिक्रम विधान सभा सीट आते हैं. दो विधान सभा सीट अनुसूचित जातियों के लिए रिज़र्व हैं: मसौढ़ी और फुलवारी.

पाटलिपुत्र लोक सभा क्षेत्र की जनसँख्या करीब 16.5 लाख है, जिसमे सबसे अधिक यादव हैं. उनकी जनसंख्या 4.5 लाख. 3 लाख की जनसंख्या के साथ भूमिहार दुसरे स्थान पर हैं. इसके बाद दलित और मुस्लिम आबादी है.

2009 में पहले लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र से लालू के पूर्व सहयोगी जदयू उम्मीदवार रंजन यादव ने राजद नेता लालू यादव पर जीत हासिल की थी. रंजन यादव को

रंजन यादव को 2,69,298 वोट मिले थे जो कुल मतदान का 42.86 प्रतिशत था. दुसरे स्थान पर रहे लालू यादव को 2,45,७५७ वोट मिले थे, जो कुल मतों का 39.12 प्रतिशत था. तीसरे स्थान पर सीपीआई ( एमएल) के रामेश्वर प्रसाद रहे थे, उन्हें 5.86% मतों के साथ कुल 36,837 वोट मिले थे.

2014 में भाजपा के राम कृपाल यादव को 39.16 % मतों के साथ कुल 3,83,362 मत मिले थे. दुसरे स्थान पर रहीं राजद उम्मीदवार मीसा भारती. उन्हें 35.04% मतों के साथ कुल 3,42,940 मत मिले थे. तीसरे स्थान पर इस बार जदयू के रंजन यादव रहे. इस चुनाव में जदयू भाजपा से अलग होकरचुनाव लड़ रहा था.
रंजन यादव को 9.93% वोटों के साथ कुल 97,228 वोट मिले थे. चौथे स्थान पर सीपीआई ( एमएल) के रामेश्वर प्रसाद रहे. उन्हें 5.27% मतों के साथ कुल 51,623 मत मिले थे.
ऐसे में देखा जा रहा है कि यादव मतों के बंटवारे का नुकसान राजद को उठाना पड़ा है. फिर भी हार जीत का अंतर बहुत ज्यादा नहीं है. खासकर इस बार मोदी लहर के कमजोर पड़ने के चलते, उम्मीद व्यक्त की जा रही है कि पाटलिपुत्र लोक सभा सीट राजद के हिस्से जायेगी. बशर्ते राजद मज़बूत उम्मीदवार खड़ा करे.
तेज प्रताप कह चुके हैं कि मनेर विधायक भाई वीरेंद्र एक मज़बूत उम्मीदवार नहीं हैं. ऐसे में मीसा भारती के इस सीट से खड़े होने से राजद की दावेदारी मज़बूत होगी.


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