लड़कियों को गंदे भोजपुरी गानों पर डांस कराया जाता था; ड्रग्स देकर रेप किया जाता था:CBI चार्जशीट

मुजफ्फरपुर: ब्रजेश ठाकुर द्वारा मुजफ्फरपुर में संचालित शेल्टर होम में बच्चियों के साथ हुए यौन दुर्व्यवहार की घटनाओं से बिहार ही नहीं बल्कि देश हत्पभ है. सबसे पहले टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज की ऑडिट रिपोर्ट में इस शेल्टर होम में हो गयी गड़बड़ियों का खुलासा हुआ, पर रिपोर्ट आने के बाद भी न अधिकारियों और न ही समाज कल्याण विभाग की नींद टूटी. बल्कि कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका सामने आई. शुरूआती तफ्तीश में बात खुल कर सामने आई कि ब्रजेश ठाकुर का समाज कल्याण विभाग में दबदबा था. उससे सीधे संपर्क में खुद विभाग की मंत्री मंजू वर्मा के पति चंद्रशेखर वर्मा थे और वे खुद शेल्टर होम आया जाया करते थे.

अब दिल दहला देने वाले खुलासे में सीबीआई की चार्ज शीट ने  बालिकाओं के यौन शोषण के काले चिट्ठे को फिर से खोल कर रख दिया है. शेल्टर होम  यौन उत्पीड़न मामले में CBI ने मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर सहित 21 आरोपियों के खिलाफ विशेष पॉक्सो कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में गंभीर आरोप लगाए हैं. इसके अनुसार लड़कियों को गंदे भोजपुरी गानों पर डांस कराया जाता था. उन्हें नशे की सुई और दवा देकर सुला दिया जाता था. सोने के बाद उनके साथ दुष्कर्म किया जाता था.

चार्जशीट में इस बात का साफ जिक्र है कि बालिका गृह में रोज ब्रजेश ठाकुर की महफिल सजती थी.  ब्रजेश के अलावा शेल्टर होम के कर्मचारी और सीडब्ल्यूसी के सदस्य सहित अन्य लोग रात में पहुंचते थे.  नाबालिग बच्चियों को छोटे-छोटे कपड़े पहनाकर अश्लील गानों पर डांस के लिए मजबूर करते और इनकार करने पर उन्हें मारा पीटा जाता था.

चार्जशीट के अनुसार लड़कियों को ब्लू फिल्में भी दिखाई जाती थी. इसके बाद नशे का इंजेक्शन और दवा देकर दुष्कर्म किया जाता था. विरोध करने वाली किशोरियों को कुर्सी से बांधकर हवस का शिकार बनाया जाता था.

19 दिसंबर को सीबीआई ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी. इसमें 33 बच्चियों समेत 102 लोगों की गवाही दर्ज है. चार्जशीट के कवर पन्ने पर सीबीआई ने स्पष्ट कर दिया है कि बयान देने वाली किशोरियों का नाम चार्जशीट में नहीं खोला गया है. इनके नाम और केस स्टडी बंद लिफाफे में कोर्ट में दिया गया है. ताकि किशोरियों की गोपनीयता बनी रहे.

फिलहाल देश भर से मुजफ्फरपुर शेल्टर होम यौन दुराचार काण्ड में अभियुक्तों के खिलाफ कठोरतम क़ानूनी कार्यवाही की मांग उठ रही है.


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