झाबुआ के कड़कनाथ मुर्गे की मांग सिर्फ देश में नहीं, विदेशों में भी है; जानिए विस्तार से

हाल ही में कम फैट और अधिक प्रोटीन के लिए जाने वाले कड़कनाथ मुर्गे (चिकन) को टीम इंडिया की नियमित डाइट में शामिल करने की सलाह झाबुआ के कृषि विज्ञान केंद्र ने दी. इससे एक बार फिर से कड़कनाथ मुर्गा चर्चा में आ गया है.  मध्यप्रदेश सरकार ने  एक एप्प  डेवलप किया है,  ‘मध्यप्रदेश कड़कनाथ मोबाइल ऐप’  जिसे राज्य के सहकारी विभाग ने तैयार किया है. इसके जरिये प्रोटीन और स्वाद से भरपूर कड़कनाथ मुर्गे को ऑनलाइन आर्डर किया जा सकता है.

कड़कनाथ मुर्गे के गुण कम नहीं: 

कड़क नाथ मुर्गा आज अपनी खूबियों के चलते न केवल देश में, बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्द है:

  • सामान्य मुर्गे से प्रोटीन 13 फीसदी ज्यादा। लगभग 23 से 24 प्रतिशत प्रोटीन होता है.
  • फैट यानी वसा की मात्रा काफी कम, 1.94 से 2.6 प्रतिशत.
  • कोलेस्ट्रॉल की मात्रा 100 ग्राम में सिर्फ 59 से 60 मिलीग्राम.
  • इसके अलावा 13 तरह के एसिड इसमें पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए लाभदायक हैं.
  • (स्रोत: नेशनल रिसर्च सेंटर ऑफ मीट)

छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के बीच कड़कनाथ पर अधिकार की लम्बी लड़ाई चली: 

दरअसल मध्य प्रदेश के झाबुआ सहित कुछ अन्य जिलों में मुर्गा की खास नस्ल पाई जाती है, जिसे कड़कनाथ के नाम से पहचाना जाता है. इस मुर्गा की खासियत है कि इसके मांस में वसा  कम होता है और प्रोटीन ज्यादा. इस प्रजाति का मुख्य स्रोत उनके राज्य का झाबुआ जिला है. हालाँकि छत्तीसगढ़ का दावा है कि यह ब्रीड झाबुआ से ज्यादा दंतेवाड़ा में पाई जाती है. यहां उसका सरंक्षण और प्राकृतिक प्रजनन सदियों से होता आया है.

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच कड़कनाथ पर अधिकार को लेकर लड़ाई चल रही थी. लेकिन  मध्यप्रदेश ने इस मुर्गे की भौगोलिक पहचान से जुड़ा टैग हासिल कर लिया है. यह राज्य के पश्चिमी हिस्से के झाबुआ जिले में पाया जाने वाला मुर्गा है. वहीं पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ भी काफी वक्त से इस पर दावा करता आ रहा है.

राज्य सरकार द्वारा संचालित मुर्गी पालन के अहाते में कड़कनाथ के ढाई लाख चिकन पैदा किए जाते हैं. मध्यप्रदेश ने चिकन की इस प्रजाति के लिए पहला मुर्गा पालन केंद्र 1978 में स्थापित किया था.

जीआई टैग

जीआई टैग (भौगोलिक संकेतक) मुख्य रूप से कुछ विशिष्ट उत्पादों (कृषि, प्राक्रतिक, हस्तशिल्प और औधोगिक सामान) को दिया जाता है, जो एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में 10 वर्ष या उससे अधिक समय से उत्पन्न या निर्मित हो रहा है. इसका मुख्य उद्देश्य उन उत्पादों को संरक्षण प्रदान करना है.

कड़कनाथ मुर्गा मूल रूप से मध्य प्रदेश के झबुआ जिले से है लेकिन अब इस किस्म को धीरे धीरे पूरे देश में पहुंचाया जा रहा है. इस किस्म की मुर्गी पालन में मुनाफा अच्छा मिलने की वजह से मुर्गी पालक में इसमें काफी दिलचस्पी ले रहे है.

इस प्रजाति की मुर्गियां साल भर में 200 अंडे तक देती हैं, जबकि मुर्गे करीब दो माह में 1600 ग्राम तक हो जाते हैं. वहीं अन्य प्रजातियों के कुक्कुट साल भर में 80 से 85 के बीच अंडे देते हैं.

अन्य प्रजाति के मुर्गों से बेहतर कड़कनाथ मुर्गे: 

कड़कनाथ प्रजाति का मुर्गा अन्य प्रजातियों के मुर्गो से बेहतर होता है. इसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक और फैट की मात्रा न के बराबर पाई जाती है. यह विटामिन-बी-1, बी-2, बी-6, बी-12, सी, ई, नियासिन, कैल्शियम, फास्फोरस और हीमोग्लोबिन से भरपूर होता है. यह अन्य मुर्गो की तुलना में लाभकारी है. इसका रक्त, हड्डियां और सम्पूर्ण शरीर काला होता है. यह दुनिया में केवल मध्यप्रदेश के झाबुआ और अलीराजपुर में पाया जाता है.

कड़कनाथ चिकेन करी

कड़कनाथ किस्म की मुर्गी काले रंग की होती है और इनका पालन इन दिनों देश के कई हिस्सों में खूब किया जा रहा है. साथ ही इस किस्म की मुर्गी पालन में मुनाफा भी काफी अच्छा है. उत्तर प्रदेश के चित्रकूट के गनीवां कृषि विज्ञान केन्द्र में इन दिनों इस कड़कनाथ Kadaknath मुर्गी के पालन के लिए प्रोत्साहन कार्यक्रम चलाये जा रहे है.

 

कड़कनाथ Kadaknath मुर्गा आम चिकन की तुलना में महंगा बिकता है. जहाँ आम चिकन 300 रूपए प्रति किलो है वही कड़कनाथ चिकन के 1 किलो चिकन करीब 750 रूपए तक बिकता है. ये कई बीमारियों से लड़ने में कारगर है. ये अपने स्वाद और सेहतमंद गुणों के लिये अधिक मशहूर है.कड़कनाथ Kadaknath भारत का एकमात्र काले मांस वाला चिकन है. मांस और खून दोनों काले रंग का होते है और अन्य चिकन की तुलना में इस चिकन में कोलेस्ट्रॉल भी बहुत कम होता है.  इसका अंडा भी सफेद की जगह काला है. कड़कनाथ Kadaknath मुर्गी का अंडा भी लगभग 50 रूपए का बिकता है. ये मुर्गा आम चिकन की तुलना में ये मुर्गा जल्दी बड़ा होता है और करीब 3- 4 महीने में व्यसक हो जाता है.

कड़कनाथ मुर्गी के अंडे

जहां कड़कनाथ में 25 प्रतिशत प्रोटीन है, वहीं बाकी मुर्गों में 18-20 फीसदी प्रोटीन ही पाया जाता है.

स्थानीय भाषा में कड़कनाथ को कालीमासी भी कहते हैं क्योंकि इसका मांस, चोंच, जुबान, टांगे, चमड़ी, खून ( हीमोग्लोबिन की अत्यधिक मात्रा के चलते) आदि सब कुछ काला होता है. यह प्रोटीनयुक्त होता है और इसमें वसा नाममात्र रहता है. कहते हैं कि दिल और डायबिटीज के रोगियों के लिए कड़कनाथ बेहतरीन दवा है। इसके अलावा कड़कनाथ को सेक्स वर्धक भी माना जाता है.

कड़कनाथ प्रजाति का मुर्गा सदियों से आदिवासी बहुल्य राज्यों में ही उपलब्ध और संरक्षित रहा है. वास्तव में यह एक जंगली मुर्गा है,  जो पूरी तरह से प्राकृतिक वातावरण में रहने से सामान्य मुर्गो की तुलना में भारी भरकम और आक्रामक होता है. आमतौर पर यह जेट ब्लैक और काले में हल्का लाल रंग के पंखों वाला दो कलर में मिलता है. इसका मांश काफी कड़ा होता है. सामान्य मुर्गो के पकने की तुलना में कड़कनाथ का मांस दुगना समय लेता है। इसका स्वाद भी लाजवाब होता है.


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