बिना शुल्क पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन बँगला आवंटित करने के मामले में हाई कोर्ट का ऐतराज

पटना : ऐसा लग रहा है कि बँगला विवाद राजद नेता तेजस्वी यादव से शुरू होकर नीतीश कुमार को भी लपेटे में ले लेगा. पटना हाई कोर्ट के ताजातरीन कदम से इसकी झलक मिल रही है. दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्रियों को बिना शुल्क आजीवन सरकारी आवास देने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने कड़ा ऐतराज जताया है. कोर्ट ने सोमवार को स्वतः संज्ञान लेते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत अन्य सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को नोटिस जारी किया है, जो फिलहाल सरकारी आवास में रह रहे हैं. कोर्ट ने नोटिस जारी कर पूछा है कि आखिर पूर्व मुख्यमंत्रियों को सुरक्षा मुहैया करायी जाये तो वे पटना में स्थित अपने निजी आवासों में क्यों नहीं रह सकते? चीफ जस्टिस एपी शाही की खंडपीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए यह बताने को कहा कि क्यों नहीं ये सारे आवंटन रद्द कर दिये जाएं? मुख्य न्यायाधीश एपी शाही की खंडपीठ ने राज्य सरकार से इस मामले में 4 हफ्ते में जवाब मांगा है. इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 11 फरवरी को होगी.

सूत्रों के मुताबिक नीतीश कुमार ने अपने पिछले कार्यकाल के दौरान एक नियम बनाकर पटना में सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास दिए जाने का प्रावधान बनाया था. तत्कालीन नीतीश कुमार सरकार द्वारा बनाए गए इस नियम के कारण सतीश कुमार और जगन्नाथ मिश्रा को सरकारी बंगले मिले. पति पत्नी के नाम पर कटौती करते हुए लालू और राबड़ी को एक ही बंगला दिया गया, जबकि दोनों मुख्यमंत्री बने थे. लालू यादव  और राबड़ी देवी 10, सर्कुलर रोड स्थित जिस बंगले में रहते हैं, वह राबड़ी के नाम से आवंटित है.

जब बिहार में 20 मई 2014 को जीतन राम मांझी ने मुख्यमंत्री  पद की शपथ ली, तब नीतीश कुमार को 7 सर्कुलर रोड पर सरकारी बंगला आवंटित किया गया. फिर जब नीतीश कुमार  दोबारा मुख्यमंत्री बने, तब जीतन राम मांझी को पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत से एक बंगला दिया गया. सरकारी बंगले के अलावा इन सभी को कई और तरह की सुविधाएं भी मिल रही हैं। इन सभी को सरकारी खर्च पर 8 कर्मचारी और मुफ्त बिजली दी जाती है.

 


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