GST और नोट्बंदी से आई अस्थायी मंदी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था तेज गति से बढ़ेगी: विश्व बैंक

मंगलवार को विश्व बैंक द्वारा जारी ग्लोबल इकॉनोमिक प्रोसपेक्टस रिपोर्ट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर लेकर आया है. विश्व बैंक के अनुमान के अनुसार  FY 2018-19 में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 7.3% रह सकती है. वहीं, यह अगले दो वित्तीय वर्षों में 7.5% तक पहुंच जाएगी.  भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था वाला देश है. इसके विपरीत चीन का विकास दर 2019 और 2020 में धीमी रफ़्तार से बढ़ेगी और इसकी विकास दर 6.2 प्रतिशत रहने की उम्मीद है.  2021 में चीनी अर्थव्यवस्था की विकास दर और गिरकर 6 % के आसपास रहने का अनुमान है.

नोटबंदी और जीएसटी का जिक्र करते हुए विश्व बैंक ने अपने रिपोर्ट में कहा है कि जीएसटी और नोटबंदी के कारण आई अस्थायी मंदी के बाद अर्थव्यवस्था में फिर से तेजी आ रही है.

CSO के आंकड़े: 

CSO ने कहा कि कृषि और विनिर्माण क्षेत्र के प्रदर्शन में सुधार की बदौलत चालू FY 2018-19 में भारतीय अर्थव्यवस्था की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 7.2 % रहने का अनुमान है. इससे पिछले FY में आर्थिक वृद्धि दर 6.7% रही थी. हालांकि, सीएसओ का चालू FY की वृद्धि दर का अनुमान वर्ष के लिए रिजर्व बैंक के 7.4% के अनुमान से कम है.

CSO के आंकड़ों के अनुसार कृषि, वन और मत्स्यपालन जैसी गतिविधियों की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में 3.8% रहने का अनुमान है, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 3.4% रही थी. वहीं, विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर 2017-18 के 5.7% से बढ़कर 2018-19 में 8.3% पहुंचने का अनुमान है. हालांकि, वित्त वर्ष के दौरान खनन और संबद्ध क्षेत्र की वृद्धि दर घटकर 0.8% पर आने का अनुमान है, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 2.9% रही थी.

इसी तरह व्यापार, होटल, परिवहन, संचार और प्रसारण से संबंधित सेवाओं की वृद्धि दर पिछले FY के 8% से घटकर चालू FY में 6.9% पर आने का अनुमान है.   लोक प्रशासन, रक्षा और अन्य सेवाओं की वृद्धि दर पिछले FY के 10% से घटकर 8.9% रहने का अनुमान है. बिजली, गैस, जलापूर्ति एवं अन्य सेवाओं की वृद्धि दर 2018-19 में 9.4% रहने का अनुमान है, जो पिछले FY में 7.2% रही थी. इसी तरह निर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर के 8.9% पहुंच जाने का अनुमान CSO ने लगाया है, जो पिछले FY में 5.7% थी. वित्तीय, रीयल एस्टेट और पेशेवर सेवाओं की वृद्धि दर बढ़कर 6.8% रहने का अनुमान है, जो 2017-18 में 6.6% थी.


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