संविधान में हुआ 124वां संशोधन, अब गरीब सवर्णों को मिलेगा 10 प्रतिशत आरक्षण

नयी दिल्ली : संसद ने कल रात सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण वाले बिल को पास कर दिया. कल दोपहर 12 बजे से इसपर बहस चल रही थी. बहस लगभग 10 घंटे तक हुई. बहस में सभी पार्टी के सांसदों ने भाग लिया.

यह संविधान का 124 वां संशोधन विधेयक है जिसे संसद ने सात के मुकाबले 165 मतों से मंजूरी दे दी. इससे पहले सदन ने विपक्ष द्वारा लाए गये संशोधनों को मत विभाजन के बाद नामंजूर कर दिया. लोकसभा ने इस विधेयक को मंगलवार को ही मंजूरी दी थी जहां मतदान में तीन सदस्यों ने इसके विरोध में मत दिया था. आरक्षण बिल पर मुहर लगाने के साथ ही राज्यसभा की बैठक बुधवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया.

इस विधेयक का लगभग सभी पार्टियों ने समर्थन किया. हालांकि जिस तरह से सरकार संसद सत्र के अंतिम दिन विधेयक लायी उसपर विरोध हुआ और आबादी के आधार पर जातिगत आरक्षण दिये जाने की भी मांग हुई.

उच्च सदन में विपक्ष सहित लगभग सभी दलों ने इस विधेयक का समर्थन किया. कुछ विपक्षी दलों ने इस विधेयक को लोकसभा चुनाव से कुछ पहले लाये जाने को लेकर सरकार की मंशा तथा इस विधेयक के न्यायिक समीक्षा में टिक पाने को लेकर आशंका जतायी. केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए इसे सरकार का एक ऐतिहासिक कदम बताया.

उन्होंने एसटी, एससी एवं ओबीसी आरक्षण को लेकर कई दलों के सदस्यों की आशंकाओं को निराधार और असत्य बताते हुए कहा कि उनके 49.5 प्रतिशत से कोई छेड़छाड़ नहीं की जा रही है. वह बरकरार रहेगा. विधेयक को प्रवर समिति में भेजने के द्रमुक सदस्य कनिमोई सहित कुछ विपक्षी दलों के प्रस्ताव को सदन ने 18 के मुकाबले 155 मतों से खारिज कर दिया. इससे पहले विधेयक पर हुई चर्चा में कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों द्वारा इस विधेयक का समर्थन करने के बावजूद न्यायिक समीक्षा में इसके टिक पाने की आशंका जतायी गयी और पूर्व में पी वी नरसिंह राव सरकार द्वारा इस संबंध में लाये गये कदम की मिसाल दी गयी.


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