तीन राज्यों ने लगाया CBI पर बैन; अस्थाना मामले ने CBI की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा किया

नयी दिल्ली: आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के बीच चल रहे विवाद ने  सीबीआई की विश्वसनीयता और साख पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. इसके चलते कई राज्यों ने अपने यहां इस एजेंसी पर बैन लगा दिया है. 2018 अक्तूबर में सबसे पहले आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अपने राज्य में सीबीआई को छापा मारने या किसी मामले की जांच करने की सामान्य सहमति वापस ले ली थी. इसके बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री  ममता बैनर्जी ने भी यह कहते हुए कि सीबीआई का अब राजनीतिक इस्तेमाल हो रहा है,  जांच एजेंसी की गतिविधियों पर बैन लगा दिया.

शुक्रवार को छत्तीसगढ़ सरकार ने अधिकारिक तौर पर सीबीआई को राज्य में जांच करने और छापा मारने के लिये दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली है. राज्य सरकार ने 2001 में यह सामान्य सहमति सीबीआई  को दी थी.  सहमति वापस होने के बाद अब सीबीआई को यदि छत्तीसगढ़ में अदालत के आदेश पर कोई छापा मारना होगा तो उससे पहले राज्य सरकार की अनुमति लेनी होगी. इसके अलावा जांच एजेंसी को उस राज्य में तैनात केंद्र सरकार के किसी अधिकारी के खिलाफ कोई जांच शुरू करनी है या रेड डालनी है तो भी राज्य सरकार से मंजूरी लेनी पड़ेगी.

ऐसे में एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या अन्य राज्य भी इसी रास्ते पर चल निकलेंगे.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने एक बयान में कहा,  “केंद्र सरकार ने जिस तरीके से इस जांच एजेंसी का इस्तेमाल अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए किया है, उससे लोगों का भरोसा सीबीआई से उठ गया है. आलोक वर्मा को जांच एजेंसी के निदेशक पद से हटाए जाने के बाद तो सीबीआई की साख पर प्रश्नचिह्न लग रहा है। ऐसे हालात में कोई भी मुख्यमंत्री अपने राज्य में सीबीआई को केंद्र सरकार का एजेंडा सैट करने की छूट क्यों देगा.”

 दुसरे राज्य भी सीबीआई पर बैन लगा सकते हैं: 

शुक्रवार को अखिलेश यादव ने कहा, “बड़ा सवाल यह है कि सीबीआई में जो कुछ चल रहा है कि उसकी जांच कौन करेगा. यह जांच एजेंसी केंद्र सरकार का खिलौना बन कर गई है. जो कोई पार्टी या राज्य सरकार, भाजपा की बात नहीं मानते तो उनके पीछे सीबीआई को लगा दिया जाता है.”

कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी का कहना था कि सीबीआई जब स्वतंत्र नहीं है तो फिर राज्य इसे अपने यहां क्यों आने देंगे. अभी तीन राज्यों ने सीबीआई को दी सामान्य रजामंदी वापस ली है. अगर यही हालात रहे तो आगे कई अन्य राज्य भी ऐसा कदम उठा सकते हैं.   जब राज्यों को लगे कि जांच एजेंसी निष्पक्ष तरीके से काम कर रही है, तो सभी राज्य उसका सम्मान करेंगे.


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