लोकसभा चुनाव 2019 : जानें भूमिहार बहुल नवादा सीट का जातीय गणित,फायरब्रांड गिरिराज सिंह हैं सांसद

लोकसभा चुनाव 2019 नजदीक है, सभी पार्टियां चुनावी मोड में आ गयी हैं. गठबंधन, सीट शेयरिंग का दौर जारी है. भाजपा अपने कार्यकर्ताओं में नयी ऊर्जा फूंकने के लिए राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद की बैठक कर रही है, तो आज सपा-बसपा आज गठबंधन पर जॉइंट प्रेस कांफ्रेंस करने जा रहे हैं. ऐसे में यह जरूरी है कि आम जनता अपने प्रतिनिधियों और अपने संसदीय क्षेत्र की स्थिति को जानें. हमारी कोशिश होगी कि हम बिहार, झारखंड की सभी संसदीय सीट और देश के महत्वपूर्ण संसदीय सीट के बारे में आपको जानकारी दें, तो आज बात बिहार के नवादा सीट की. बिहार में कुल 40 संसदीय सीट है जबकि झारखंड में 14.

नवादा से वर्तमान सांसद गिरिराज सिंह है. गिरिराज सिंह भाजपा के ‘फायरब्रांड’ नेता हैं और अपने बयानों के कारण अकसर विवादों में रहते हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में गिरिराज सिंह ने राजद के राजवल्लभ प्रसाद को यहां से हराया था. चुनाव में तीसरे नंबर पर जदयू के कौशल यादव रहे थे.

नवादा ने सभी पार्टियों को दिया है मौका
नवादा संसदीय सीट का इतिहास देखें तो हम पायेंगे कि यहां 1952 से अबतक लगभग सभी पार्टियों ने जीत हासिल की है. कांग्रेस के अतिरिक्त यहां से माकपा, राष्ट्रीय लोकदल, राजद और भाजपा के प्रत्याशी चुनाव जीतते आये हैं. राजद की मालती देवी ने यहां से 1998 में जीत हासिल की थी. वे इस संसदीय क्षेत्र की एकमात्र महिला सांसद भी रहीं हैं.

क्या है जातीय गणित
नवादा जेनरल सीट है और यहां भूमिहार जाति की बहुलता है. यादव और मुसलमान वोटर भी यहां मजबूत स्थिति में हैं. दलित महादलित, पिछड़ी व अति पिछड़ी जातियों की मौजूदगी भी निर्णयों पर असर डालनेवाली है. यही कारण है कि सभी पार्टियां यहां अपने-अपने वोटर्स को रिझाने में जुटी हैं. हालांकि अभी भाजपा ने अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है, लेकिन गिरिराज सिंह टिकट मिलने को लेकर आशवस्त हैं.

पर जब से मुंगेर सीट पर पेंच फंसा है और चर्चा हो रही है कि जदयू के ललन सिंह, जो बिहार के मुख्यमंत्री एवं जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के बेहद करीबी हैं, मुंगेर लोक सभा सीट से चुनाव लड़ेंगे, तो ऐसे में लोजपा की वीणा देवी का भी नाम उछल कर सामने आ रहा है. गिरिराज सिंह की तरह ही वे भी भूमिहार जाति से आती हैं. वे फिलहाल मान भी गयी हैं कि जिस सीट से उन्हें खड़ा किया जाएगा, उसी सीट से वे लड़ेंगी. अगर ऐसा होता है, तो गिरिराज सिंह फिर से अपने प्रिय सीट बेगुसराई से चुनाव लड़ने की मांग उठाएंगे.

फिलहाल देखना रोचक होगा कि किसे एनडीए इस सीट से उम्मीदवार बनाता है. उम्मीद ये है कि इस सीट पर एनडीए से जो भी उम्मीदवार होगा, वो भूमिहार जाति से होगा. वही दूसरी ओर राजद बाहुबली विधायक राज्बल्लभ यादव किशोरी से बलात्कार के मामले में अपनी विधायकी गँवा चुके हैं और साथ ही उन्हें सजा भी हो चुकी है. ऐसे में राजद को अन्य विकल्पों पर ध्यान देना होगा.

वर्ष 2004 के चुनाव बिहार में लालू प्रसाद की लहर पर केंद्रित था. अब तक के सबसे ज्यादा वोट पाने वाले विजेता सांसद बने थे वीरचंद पासवान. वर्ष 2009 में भाजपा व जदयू ने संयुक्त रूप से चुनाव लड़ा. इस दौर में नीतीश लहर से इनकार नहीं किया जा सकता है. पर, वोट की प्रतिशतता कम रही. जीते सांसद डॉ भोला सिंह को सिर्फ 1,30,608 वोट ही मिले और वे 34,917 वोटों के अंतर से चुनाव जीत गये. वर्ष 2014 में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में पूरी तरह नरेंद्र मोदी का लहर दिखा. बावजूद गिरिराज सिंह 3,90,248 वोट ही ला सके.

नवादा लोक सभा से अभी तक सिर्फ एक सांसद दुबारा चुना गया है:

नवादा संसदीय क्षेत्र से किसी को ज्यादा मौके मिलने का इतिहास नहीं रहा है. लोकसभा के अबतक कुल 16 चुनावों में यहां से सिर्फ कुंवर राम को ही दोबारा मौका मिल पाया है. 1980 एवं 1984 में कांग्रेस के टिकट पर कुंवर दो बार लगातार चुने गए थे. बाकी सांसदों को नवादा के मतदाताओं ने आया राम गया राम टाइप से निपटाया है. इसे महज संयोग कह सकते हैं. किंतु भाजपा के फायर ब्रांड नेता, सांसद एवं केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने शायद इसे गंभीरता से लिया है. यही वजह है कि उन्होंने क्षेत्र में सक्रियता बढ़ा दी है हालांकि उनकी नजर बेगूसराय पर भी है, जिसके लिए वह पिछली बार भी बेताब थे. नवादा के सामान्य सीट होने के बाद के दो चुनाव नतीजों की समीक्षा के बाद तेजस्वी को अहसास हो गया है कि भूमिहार बहुल इस क्षेत्र में सिर्फ माय (मुस्लिम-यादव) समीकरण के सहारे भाजपा से मुकाबला नहीं किया जा सकता है इसलिए वह दूसरे समीकरण पर भी काम कर रहे हैं.


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