बिहार में आंध्र की मछलियों की बिक्री पर लगा प्रतिबन्ध हटा

पटना : बिहार में आंध्र की मछलियों की बिक्री पर लगा प्रतिबंध हटा लिया गया है. स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि सभी तरह की मछलियों पर लगे प्रतिबंध को हटा लिया गया है. ज्ञात हो कि बिहार सरकार ने फोर्मलिन नामक कैंसर जनक केमिकल पाये जाने की खबर के बाद आंध्र से आने वाली मछलियों की बिक्री पर रोक लगा दी थी.

बता दें की फोर्मलिन एक बेहद खतरनाक केमिकल है और इसका इस्तेमाल लाश को लम्बे समय तक फ्रेश रखने के काम आता है. आंध्र से बिहार भेजने के क्रम में मछलियों को फ्रेश रखने के लिए व्यापारियों ने फोर्मलिन का इस्तेमाल मछलियों पर भी करना शुरू कर दिया. मछली को काटने के समय सही ढंग से नहीं धोने के चलते फोर्मलिन खाने के साथ मानव शरीर में चला जाता है और फिर कैंसर जैसी घातक बीमारी को जन्म देता है.

बिहार की एक टीम मछलियों की जांच के लिए आंध्र प्रदेश पहुंची. यहां इस दल ने सीएम चंद्रबाबू नायडू से भी मुलाकात की. इस मामले की जांच को बिहार के अधिकारियों का पांच सदस्यीय दल अभी आंध्र प्रदेश में है. इस टीम में पशुपालन विभाग की प्रधान सचिव एन विजय लक्ष्मी, निदेशक फिशरीज निशात अहमद, जिला मत्स्य पालन पदाधिकारी विपिन कुमार, खाद्य सुरक्षा अधिकारी अजय कुमार शामिल हैं. आंध्र गयी टीम ने जांच के बाद बाहर से आयात की जाने वाली मछलियों पर लगे प्रतिबंध को हटाने का फैसला लिया है.

बताते चलें कि बिहार में 14 जनवरी को मछलियों की बिक्री पर रोक लगा दी गयी थी. आंध्र की मछली बैन होने के बाद मछुआरों के व्यवसाय में भारी गिरावट आयी थी क्योंकि बिहार का स्थानीय उत्पादन यहाँ की जरूरतों को पूरा करने के लिए नाकाफी था. मछुआरों ने इस निर्णय का विरोध किया. निषादों के नेता मुकेश साहनी ने इसे राजनीति से प्रेरित बताया और राज्यव्यापी आंदोलन की धमकी भी दी थी.
आंध्र की मछली की बिहार में बिक्री पर बैन के सवाल पर आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने बिहार सरकार को एक पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने आंध्र की मछलियों में फॉर्मेलिन नहीं होने की पुष्टि की थी. इसके लिए उन्होंने एक कमेटी द्वारा परीक्षण करवाने की बात भी कही थी.


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