भारत में सालाना लगभग 6 लाख लोग कैंसर से मौत के गाल में समा रहे हैं

Rajeev Ranjan

एक आंकड़े के मुताबिक भारत में कैंसर से पीड़ित लोगों की अनुमानित संख्या लगभग 25 लाख हैं. तो वही हर साल 7 लाख से अधिक नए कैंसर रोगी पंजीकृत(रजिस्टर) किए जाते हैं. हर वर्ष भारत में कैंसर से लगभग 6 लाख लोग मौत के घाट उतर जाते हैं.

इसी तरह प्रतिदिन 2500 से अधिक लोग तंबाकू संबंधित बीमारी(मुख्यत: तंबाकू से कैंसर) के कारण मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं. तो वही धूम्रपान के कारण हर 5 पुरुषों में से 1 और हर 20 महिलाओं में से 1 की मौत हो जाती है.
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आखिर! कैंसर इतना भयावह क्यों है?

कैंसर के कारण क्या हैं? और इन सबसे महत्वपूर्ण कि कैंसर का इलाज क्या है? इन सभी प्रश्नों का उत्तर पाने के लिए हमें कैंसर की दुनिया का सफर करना होगा. तो चले शुरू करते हैं अपना ये सफर!
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जैसा कि आप सभी जानते ही है कि कोशिकाओं से उत्तकों, उत्तकों से अंगों, अंगों से विभिन्न-विभिन्न अंग प्रणाली और अंतत: एक शरीर का निर्माण होता है. हमारे शरीर के कोशिकाओं को डीएनए या जेनेटिक कोड के द्वारा नियंत्रित किया जाता है. सभी कोशिकाएं डीएनए के निर्देश के अनुसार ही काम करती है. ये जेनेटिक कोड कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की तरह ही शरीर की कोशिकाओं को चलाता है. ये सब कोशिकाएं निरंतर तेजी से विभाजित होकर नई कोशिकाओं को जन्म देती हैं. ये नए कोशिकाएं पुराने कोशिकाओं की जगह लेती है. इस तरह नए-नए कोशिकाओं के जन्म से शरीर का विकास होते रहता है. और यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है.
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कभी-कभी डीएनए में किसी प्रकार की समस्या आने के कारण खराब कोशिकाओं का जन्म होता है. और ये खराब कोशिकाएं भी तेजी से विभाजित होकर अपनी संख्या बढ़ाती रहती है. और ये कोशिकाएं शरीर में सही तरह से कार्य नहीं करती है और धीरे-धीरे कैंसर का रूप ले लेती है. कैंसर के खराब कोशिकाओं के प्रभाव के कारण शरीर का कोई विशेष अंग सही से कार्य करना बंद कर देता है. चूंकि शरीर का हर अंग एक दूसरे से जुड़ा हुआ है इसलिए जब शरीर का एक अंग सही से कार्य करना बंद कर देता है तब शरीर का दूसरा अंग भी इससे प्रभावित होता है. और अगर इसका सही समय पर सही इलाज नहीं हुआ तो कैंसर की कोशिकाएं पूरे शरीर में फैल जाते हैं और पूरे शरीर को अपनी चपेट में ले लेते हैं.
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कैंसर के दो स्टेज होते हैं:
पहला स्टेज: शुरुआत में शरीर के जिस अंग में कैंसर पैदा होता है उसी में बढ़ता है. इसे कैंसर का प्राइमरी स्टेज कहते हैं.
दूसरा स्टेज: जब किसी खास अंग में फैले कैंसर की कोशिकाएं खून की मदद से शरीर के अन्य अंगों तक पहुंच जाती है तब यह शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित करना शुरू कर देती है. और इस तरह यह धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैलने लगता है. इसे कैंसर का सेकेंडरी स्टेज कहते हैं.
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कैंसर का मुख्य कारण है वातावरण का प्रदूषण. जो लोग नशा और धूम्रपान करते हैं वैसे लोगों में कैंसर होने की संभावना ज्यादा होती है. बच्चों का शरीर तेजी से विकास करता है इसलिए उनके शरीर के कोशिकाओं में खराबी आने के खतरे भी बढ़ जाती है और खराब कोशिकाओं के बढ़ने से उनके शरीर में कैंसर हो सकता है.
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कैंसर शरीर के किसी भी भाग में हो सकता है. वैसे कैंसर के मुख्यत: दो प्रकार होते हैं: ब्लड कैंसर और सॉलि़ड टयूमर.
जैसा की नाम से ही पता चलता है कि ब्लड कैंसर खून में खराब कोशिकाओं के विकास के कारण होता है. और सॉलि़ड टयूमर शरीर के किसी अंग को प्रभावित करता है. शरीर के किसी खास अंग पर कैंसर की खराब कोशिकाएं तेजी से विकास कर अपना एक समूह बना लेता है जिसे सॉलि़ड टयूमर कहते हैं. और वह सॉलि़ड टयूमर शरीर के उस अंग को अपना कार्य करने में बाधा उत्पन्न करता है.


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