Zero Tolerance day for FGM: विरोध के बावजूद, प्रतिवर्ष हो रहा 3.9 मिलियन महिलाओं का खतना

आज World FGM ( female genital mutilation) day है. संयुक्त राष्ट्र इसे इंटरनेशनल डे फॉर जीरो टॉलरेंस’ के रूप में मनाता है. FGM यानी महिलाओं का खतना. संयुक्त राष्ट्र पॉपुलेशन फंड प्रोजेक्ट द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार दुनिया में 20 करोड़ ऐसी जीवित महिलाएं हैं जिनका खतना हो चुका है. प्रोजेक्ट की रिपोर्ट के अनुसार प्रतिवर्ष विश्वभर में 3.9मिलियन महिलाओं का खतना होता है, जो वर्ष 2030 तक प्रतिवर्ष 4.6 मिलियन हो जायेगा. यह आंकड़े महिला सशक्तीकरण के युग में महिला अधिकारों की धज्जियां उड़ाते हुए दिखते हैं.

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो जीटरस ने चेतावनी देते हुए बताया था कि अगर त्वरित कार्रवाई नहीं की गयी तो 2030 तक 68 मिलियन लड़कियां महिला जननांग के संक्रमण का शिकार हो सकती हैं. महिला जननांग को अवैज्ञानिक तरीके से काटे जाने का असर महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ता है और यह महिला अधिकारों का घोर उल्लघंन है. विश्व भर के कई देशों में लगभग 20 करोड़ महिलाएं खतना का शिकार हो चुकी हैं. संयुक्त राष्ट्र ने यह लक्ष्य बनाया है कि दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ वर्ष 2030 तक इस कुप्रथा को विश्वभर से समाप्त किया जाये. लेकिन दुखद यह है कि आज भी यह परंपरा विश्व में मौजूद है.

भारत में भी होता है महिलाओं का खतना

भारत में बोहरा मुसलमानों के बीच यह रुढ़िवादी परंपरा कायम है. भारत में बोहरा मुसलमानों की कुल संख्या लगभग 10 लाख है. वे परंपरा के नाम पर इस महिला विरोधी परंपरा को जारी रखने की मांग करते हैं. यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है. कोर्ट ने इसे संविधान पीठ को सौंप दिया है. चौंकाने वाली बात यह है कि बोहरा समुदाय आर्थिक रूप से सशक्त और शिक्षित है, बावजूद इसके इस समुदाय में यह परंपरा व्याप्त है.

FGM यानी खतना की शिकार महिलाओं के लिए WHO ने handbook जारी किया

वर्ष 2015 में बोहरा समुदाय की एक महिला जेहरा पटवा ने अपनी तसवीर जारी कर इस परंपरा का विरोध किया था और बताया था कि किस तरह उन्हें इंग्लैंड से भारत लाकर उनका खतना किया गया था.

अफ्रीकी देशों में सबसे ज्यादा होता है महिलाओं का खतना

अफ्रीकी देश में महिलाओं के साथ यह बर्बरता सबसे ज्यादा होती है. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार सोमालिया में 15-49 साल की 98 प्रतिशत महिलाओं का खतना हुआ है, जबकि गुयाना में 97 प्रतिशत और मिस्र में यह आंकड़ा 87 प्रतिशत का है.

महिला अधिकारों का हनन है FGM

FGM पूरी तरह से महिला अधिकारों का उल्लघंन है. यह लैंगिक असमानता का परिचायक है. इस प्रक्रिया के द्वारा लड़कियों की सेक्स इच्छा को दबाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि इससे महिलाएं नियंत्रित रहती हैं. WHO का कहना है कि यह गलत परंपरा है और लैंगिक विभेद का सूचक भी, इसलिए WHO डॉक्टरों से यह आग्रह करता है कि वे इस तरह के किसी भी कार्य का हिस्सा ना बनें. यह एक व्यक्ति के जीने के अधिकारों का भी उल्लंघन है क्योंकि कई बार इस प्रक्रिया में महिला की मौत तक हो जाती है.

क्या है FGM की प्रक्रिया

FGM की प्रक्रिया चार चरणों में पूरी होती है. पहले चरण में मादा जननांग के बाहरी भाग (clitoris) को पूरी तरह या आशंक रूप से काटकर हटा दिया जाता है.

दूसरे चरण में योनि की आंतरिक परतों को भी काटकर हटाया जाता है.

तीसरा चरण इन्फ्यूब्यूलेशन का होता है, जिसमें योनि द्वार को बांधकर छोटा कर दिया जाता है.

चौथा चरण में भी वो तमाम क्रियाएं की जातीं हैं, जो जननांग को नुकसान पहुंचाती हैं. इस प्रक्रिया का दुष्परिणाम सेक्स के दौरान और प्रसव के दौरान भी नजर आता है. स्वास्थ्य पर असर जिन महिलाओं का खतना किया जाता है उन्हें कुछ समय तक काफी दर्द होता है. वे मानसिक सदमे में रहती हैं और उन्हें अत्यधिक रक्तस्राव होता है. साथ ही इंफेक्शन और पेशाब करने में परेशानी होती है. वही दूरगामी प्रभाव यह होता है उन्हें शारीरिक संबंध बनाने और प्रजनन में परेशानी होती है. यह लैंगिक भेदभाव का बहुत बड़ा उदाहरण है.

#World FGM ( female genital mutilation) day


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