कुपोषण से लड़ने हेतु गोदभराई की परम्परा को पुनर्जीवित करने की कवायद

समाज कल्याण मंत्री ने 21 महिलाओं का कराया गोदभराई

पटना/7 फ़रवरी: समाज कल्याण मंत्री कृषनंदन वर्मा ने पटना जिले के धनरुआ प्रखंड के रेपुरा गाँव स्थितमॉडल आंगनबाड़ी केंद्र पर 21 गर्भवती महिलाओं को विभिन्न व्यंजनों से भरी थाल भेंट कर गोदभराई करवाया. थाल में विभिन्न प्रकार के फल, चना, गुड़, मिठाई, सुखा मेवा, साग, श्रृंगार सामग्री, एवं कैल्शियम की गोली को शामिल किया गया. साथ ही समाज कल्याण मंत्री ने गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य सन्देश युक्त भागीदारी प्रमाण पत्र देते हुए उनके बेहतर स्वास्थ्य की कामना की.आज गुरुवार को पुरे राज्य में आंगनबाड़ी केन्द्रों पर गोदभराई की जा रही है. ज्ञात हो कि राज्य में तक़रीबन 90 हजार आंगनबाड़ी केंद्र कार्यरत हैं. राज्य के हर जिले में प्रत्येक महीने के 7 तारीख को आंगनवाड़ी केन्द्रों पर गर्भवती महिलाओं की गोदभराई करायी जा रही है.

गोदभराई की परम्परा हमारे समाज में पूर्व से रही है. हलाकि धीरे-धीरे यह परंपरा लुप्त हो रही थी. समाज कल्याण विभाग ने कुपोषण के विरुद्ध लड़ाई में इसे हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का निर्णय लिया. जीवन के प्रथम हजार दिन के बीच का यह सबसे अहम् उत्सव होता है जो जन्म के पहले उस बच्चे के अस्तित्व को न सिर्फ स्वीकार करता है बल्कि प्रथम बार बच्चे को भोजन में हिस्सेदारी को भी स्वीकार करता है. अर्थात अगर गर्भावस्था में माँ के पोषण का मतलब है बच्चे का पोषण.

इस अवसर पर समाज कल्याण मंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने कहा कि शिशु के स्वास्थ्य निर्माण में गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य को सुनश्चित करने की जरुरत होती है.इस दौरान महिलाओं को अधिक भोजन के साथ पौष्टिक भोजन की भी जरुरत होती है. उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के पहले दिन से ही यदि महिलाएं अपने पोषण पर ध्यान दें तब स्वस्थ जच्चा-बच्चा की परिकल्पना को आसानी से साकार किय जा सकेगा.

उत्सव की तरह मना गोदभराई: गर्भवती महिलाओं को लाल चुनरी ओढा कर एवं माथे पर लाल टीका लगा कार्यक्रम की शुरुआत हुई. महिलाओं को विभिन्न व्यंजनों में शामिल सतरंगी फल, सूखे मेवे भी भेंट की गयी. बुजुर्ग महिलाओं के आशीर्वाद थाप में गर्भवती महिलाओं के एक स्वस्थ्य जीवन की शुरुआत की कामना करते हुए उन्हें बेहतर पोषण की जानकारी भी दी गयी.

जिले के रघुनाथपुर प्रखंड के ब्रह्मपुर आंगनवाड़ी केंद्र की कार्यकर्ता रेनू गुप्ता ने बताया कि गर्भावस्था के आखिरी दिनों में बेहतर पोषण की अधिक जरुरत होती है. बेहतर पोषण के आभाव में महिलाओं में खून की कमी हो जाती है. इससे प्रसव के दौरान जटिलताएं बढ़ जाती है. उन्होंने बताया कि बेहतर पोषण एक स्वस्थ बच्चे के जन्म में सहायक होने के साथ गर्भवती महिलाओं में मातृ मृत्यु दर में कमी भी लाता है.

गर्भधारण के आखिरी महीनों में जरुरी है पोषण: गर्भ के आखिरी महीनों में शरीर को अधिक पोषक तत्वों की जरूरत होती है.इस दौरान आहार में प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट के साथ वसा की भी मात्रा होना जरुरी होता है. इसके लिए समेकित बाल विकास योजना के अंतर्गत आंगनवाडी केन्द्रों में गर्भवती महिलाओं को साप्ताहिक पुष्टाहार भी वितरित किया जाता है. इसके साथ महिलाएं अपने घर में आसानी से उपलब्ध भोज्य पदार्थों के सेवन से भी अपने पोषण का ख्याल आसानी से रख सकती हैं. हरी साग-सब्जी, सतरंगी फल, दाल, सूखे मेवे एवं दूध के सेवन से आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति आसानी से की जा सकती है.

 

इस कार्यक्रम के दौरान आईसीडीएस निदेशक आलोक कुमार, अनुमंडलीय पदाधिकारी मसौढ़ी संजय कुमार, राज्य निशक्त आयोग से डॉ. शिवाजीत, जिला कार्यक्रम अधिकारी आईसीडीएस के अलावा रेपुरा के अन्य सीडीपीओ एवं आँगनवाड़ी कार्यकर्ता उस्पस्थित थे.


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