भागलपुर लोकसभा सीट पर फिर राजद-भाजपा के बीच जंग, जानें किसका पलड़ा रहेगा भारी?

पटना : बिहार का भागलपुर का संसदीय सीट काफी प्रतिष्ठित और इस सीट की जंग काफी रोचक रही है. अगर आंकड़ों पर गौर करें तो हम पायेंगे कि भागलपुर लोक सभा क्षेत्र के मतदाताओं ने अपना प्रतिनिधि चुनने में काफी चतुराई दिखाई है और वे हर पार्टी को मौका देते रहे हैं. यही कारण है कि इस सीट को किसी खास पार्टी का गढ़ नहीं माना जा सकता और जिसने भी यह गलती उसे सीख मिली.

वर्तमान में यहां के सांसद राजद के बुलो मंडल हैं, पिछले चुनाव में बुलो मंडल ने सीटिंग एमपी शाहनवाज हुसैन को बहुत कम अंतर से हराया था. 2014 के लोक सभा चुनाव में बुलो मंडल को कुल 3,67, 623 वोट मिले थे, जो कुल मतदान का 37.74% था. वहीँ शहनबाज हुसैन को कुल 3, 58, 138 वोट मिले थे. जो कुल मतदान का 36.76% था. यानि कि 1% से भी कम का अंतर. जबकि तीसरे स्थान पर रहे जदयू के अबू कैंसर को कुल मतदान का 13,58%
वोट यानि 1,32, 256 वोट पाने में सफलता मिली. ऐसे में इस बार जब भाजपा और जदयू एक साथ आ गए हैं, तो उम्मीद की जा सकती है कि जदयू के खाते में आये वोट शहनबाज हुसैन के पक्ष में ट्रांसफर होंगे. भीतरघात की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता, पर फिर भी ट्रांसफर हुए वोटों की संख्या ज्यादा रहने की संभावना है, ऐसा राजनीतिक विश्लेषकों की राय है.

2014 में मोदी लहर और बिहार में एनडीए के अभूतपूर्व प्रदर्शन के बावजूद हार मिलने से शाहनवाज अपने ही पार्टी के सदस्यों से नाराज दिखे थे और हार के लिए अश्विनी चौबे जैसे नेताओं और उनके समर्थकों को जिम्मेदार ठहराया था. बुलो और हुसैन के बीच हार-जीत का अंतर भी काफी कम था. तीसरे स्थान पर जदयू के अबु कैसर रहे थे. शाहनवाज 2009 में यहां से सांसद चुने गये थे, उससे पहले 2004 में इस सीट से सुशील मोदी चुनाव जीते थे, लेकिन जब उन्होंने यह सीट छोड़ी तो 2006 में उपचुनाव हुआ और शाहनवाज हुसैन चुने गये.

बात अगर इस चुनाव की करें तो हम उम्मीद कर सकते हैं  कि महागठबंधन से इस बार भी इस सीट पर राजद का प्रत्याशी ही मैदान में होगा, वहीं एनडीए की तरफ से भी यह सीट भाजपा के कोटे में जायेगी ऐसी संभावना जतायी जा रही है. ऐसे में यह कहा जा सकता है कि बुलो मंडल और शाहनवाज हुसैन एक बार फिर आमने-सामने होंगे. चूंकि इस बार भाजपा और जदयू एक साथ चुनाव लड़ रहे हैं, इसलिए उनका पलड़ा भारी है, इसमें कोई दो राय नहीं है, लेकिन जैसा कि पहले ही कहा चुका है कि यहां कि जनता पसंद बदलती रहती है, कुछ भी स्पष्ट कहना थोड़ा मुश्किल ही है. हालाँकि एक बात शहनबाज हुसैन के पक्ष में जाती है कि वे चुनाव हारने के बाद भी यहाँ की जनता के संपर्क में बने रहे.

कुल  छह विधानसभा क्षेत्र है

भागलपुर लोकसभा क्षेत्र में कुल  छह विधानसभा क्षेत्र हैं जिनके नाम हैं-

नाथनगर
भागलपुर
गोपालपुर
बिहपुर
कहलगांव
पीरपैंती.

इनमे नाथनगर सीट पर जदयू उम्मीदवार अजय कुमार मंडल ने लोजपा के उम्मीदवार अमर नाथ प्रसाद को हराया. बिहपुर सीट पर राजद की वर्षा रानी ने बीजेपी के कुमार शैलेन्द्र को हराया. पीरपैंती सीट पर राजद के राम विलाश पासवान ने बीजेपी के ललन कुमार को हराया. कहलगाँव सीट पर कांग्रेस के सदानंद सिंह ने लोजपा के नीरज कुमार मंडल को हराया. भागलपुर विधान सभा सीट पर कांग्रेस के अजीत कुमार मंडल ने बीजेपी के अर्जित शाश्वत को हराया. नाथनगर सीट पर जदयू के अजय कुमार मंडल ने लोजपा नाथ प्रसाद को हराया.

इस तरह दो सीट राजद, दो सीट जदयू और दो सीट कांग्रेस के हिस्से गए. वहीँ लोजपा को तीन और भाजपा को तीन सीटों पर हार मिली.

कैसा रहा है इतिहास

भागलपुर लोकसभा क्षेत्र से 1952 के चुनाव में प्रसिद्ध गांधीवादी और सुचेता कृपलानी के पति जेबी कृपलानी के पति सांसद हुए थे. उनके बाद कांग्रेस के अनूप लाल मेहता यहां के सांसद हुए. 1957 में अनूप प्रसाद मेहता और 1962 में भागवत झा आजाद यहां से कांग्रेस की टिकट पर चुने गये. झा लगातार तीन बार यहां से सांसद चुने गये. 1977 में जनता पार्टी की लहर में भागवत झा आजाद हार गये और रामजी सिंह चुनाव जीते, लेकिन 1980 में फिर झा की वापसी हुई. 1989 में जनता दल के चुनचुन प्रसाद यादव यहां से चुनाव जीते. वे लगातार तीन बार यहां से चुनाव जीते. 1998 में भाजपा के प्रभाष चंद्र तिवारी यहां से चुनाव जीते जबकि 1999 के चुनाव में कम्युनिस्ट पारी के सुबोध रे यहां के सांसद बने. 2004 में भाजपा के सुशील मोदी को यहां की जनता ने अपना प्रतिनिध चुना. 2009 में भाजपा के ही शाहनवाज हुसैन चुनाव जीते, जबकि 2014 में राजद के बुलो मंडल यहां के सांसद बने.


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