तृणमूल विधायक की हत्या के मामले में भाजपा नेता मुकुल राय के खिलाफ FIR दर्ज

कोलकाता: तृणमूल विधायक की ह्त्या ने सनसनीखेज मोड़ ले लिया है. इस हत्याकांड में दर्ज FIR में भाजपा नेता मुकुल रॉय का नाम शामिल है. ज्ञात हो कि पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के कृष्णागंज विधानसभा से तृणमूल कांग्रेस के विधायक सत्यजीत बिस्वास की शनिवार को अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी. बिस्वास अपनी पत्नी और 7 महीने के बेटे के साथ अपने क्षेत्र में सरस्वती पूजा के कार्यक्रम में गए थे, और जब वे पूजा करने के बाद स्टेज से उतर रहे थे, तो उस समय हमलावरों ने उनपर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं. इस घटना के बाद दर्ज एफआईआर में बीजेपी नेता मुकुल रॉय का नाम है.

मातुआ समुदाय का 5 लोकसभा सीटों पर है प्रभाव: 
बता दें कि नादिया की कृष्णागंज से विधायक सत्यजीत बिस्वास प्रभावशाली मातुआ समुदाय से ताल्लुक रखते थे. मातुआ समुदाय 1950 के दशक में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से भारत आया था. राज्य में इस समुदाय की आबादी लगभग 30 लाख है. उत्तर और दक्षिण 24 परगना की 5 लोकसभा सीटों पर समुदाय का खासा असर है. 2019 लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भाजपा मातुआ समुदाय को अपना वोट बैंक बनाना चाहती है. नरेंद्र मोदी हाल ही में 24 परगना के ठाकुरनगर में मातुआ समुदाय के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे.

इस मामले में अपना हाथ होने से इंकार करते हुए मुकुल रॉय ने कहा कि FIR में उनका नाम आना राजनीति से प्रेरित है. राय ने कहा कि विधायक की हत्या की वजह तृणमूल कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई हो सकती है. राय ने ममता बनर्जी से मनमुटाव आने के बाद बीजेपी का दामन थाम लिया था.

भाजपा ने हत्या की सीबीआई जांच की मांग की है. बहरहाल, टीएमसी विधायक की हत्या ऐसे समय हुई है जब लोकसभा चुनाव को लेकर राज्य में पहले से ही बीजेपी और टीएमसी के बीच राजनीतिक तनाव बना हुआ है.

इससे पहले दिसंबर के महीने में दक्षिण 24 परगना जिला के जयनगर से तृणमूल कांग्रेस के विधायक बिस्वनाथ दास की कार पर कुछ नकाबपोश हमलावरों द्वारा अंधाधुंध फायरिंग की घटना सामने आई थी. इस हमले में तीन लोग मारे गए थे. पश्चिम बंगाल सरकार ने इस हमले की जांच सीआईडी को सौंपी है. हालांकि इस हमले में निशाना कौन था इसकी जांच हो रही है लेकिन बिस्वनाथ दास ने अपनी हत्या की साजिश का आरोप लगाया था.

पश्चिम बंगाल में वाम दलों के शासन के दौरान राजनीतिक हिंसा का लंबा इतिहास रहा है. लेकिन इस तरह के वाकये में अक्सर स्थानीय कार्यकर्ता ही निशाना बनते रहे. वाम दलों की सत्ता खत्म होने के बाद तृणमूल सरकार पर भी राजनीतिक हिंसा के आरोप लगते रहे. बंगाल में भाजपा भी राजनीतिक हिंसा की संस्कृति से दूर नहीं. भाजपा पर आरोप लगते रहे हैं कि वह रथ यात्रा के बहाने प्रदेश में सांप्रदायिक उन्माद फैला कर वोटों का ध्रुवीकरण करना चाहती है. भाजपा की इस मंशा के चलते कोलकाता हाई कोर्ट ने भाजपा को रथयात्रा की अनुमति नहीं दी.

फिलहाल पुलिस टीएमसी विधायक सत्यजीत बिस्वास की हत्या के मामले की जांच कर रही है और दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है. तो वहीं हंसखाली पुलिस स्टेशन के इंचार्ज को सस्पेंड कर दिया गया है. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह राजनीतिक हत्या का मामला है, जैसा आरोप टीएमसी लगा रही है. इससे पहले 1994 में फॉरवर्ड ब्लॉक के तत्कालीन विधायक रमजान अली की कोलकाता में हत्या हुई थी. हालांकि यह राजनीतिक हत्या नहीं थी.


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