कृमि मुक्ति हेतु 18 फरबरी को चार करोड़ बच्चों एवं किशोरों को खिलाई जाएगी दवा

पटना/ 11 फरवरी: कृमि संक्रमण इंसानों में पाया जाने वाला सबसे सामान्य लेकिन घातक संक्रमण है जो भारत जैसे विकासशील देशों में अधिक पाया जाता है. दुनियाभर में 836 मिलियन बच्चों को कृमि संक्रमण का खतरा है और विश्व स्वास्थ संगठन (WHO) के अनुसार भारत में 1 से 14 वर्ष के तक़रीबन 241 मिलियन बच्चों को कृमि संक्रमण का खतरा है.

बिहार में बच्चों एवं किशोरों को कृमि से मुक्त करने के लिए 18 फरवरी को अभियान चलाया जायेगा. यह अभियान सरकारी एवं निजी विद्यालयों के अलावा आँगनवाड़ी केन्द्रों पर 1 साल से 19 वर्ष तक के स्कूल जाने वाले एवं स्कूल नहीं जाने वाले दोनों प्रकार के बच्चे एवं किशोरों को एल्बेण्डाजोल की गोली खिलाई जाएगी. साथ ही 5 मार्च को मॉप दिवस पर अभियान में छुटे हुए बच्चों को दवा खिलाई जाएगी.

राज्य स्तर पर राष्ट्रीय कृमि दिवस कार्यक्रम के कुशल क्रियान्वयन के लिए एविडेंस एक्शन (Evidence Action) नामक संस्था सहयोग कर रही है. एविडेंस एक्शन के राज्य संयोजक निरपेंद्र कुमार ने बताया कि राज्य के 25 जिलों में कुल 3.88 करोड़ बच्चों एवं किशोरों को  एल्बेण्डाजोल की दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

यह अभियान राज्य के 25 जिलों में चलाया जायेगा जिसमें अररिया, बांका, बेगूसराय,भागलपुर,बक्सर,गया,गोपालगंज,जहानाबाद,कैमूर,कटिहार,खगड़िया,मधेपुरा,जमुई,मधुबनी,मुंगेर,मुज्ज़फरपुर,प०चम्पारण, पटना, पूर्वी चम्पारण, सहरसा, सारण, शेखपुरा, सीतामढ़ी, सिवान एवं सुपौल जिले को शामिल किया गया है.

निदेशक समेकित बाल विकास योजना आलोक कुमार ने कृमि मुक्ति के लिए चयनित जिलों के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी आईसीडीएस को पत्र लिखकर अभियान में शत-प्रतिशत दवा सेवन कराने का निर्देश दिया है. पत्र में बताया गया है कि राज्य के 25 जिलों में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस 18 फरवरी को कृमि से मुक्ति के लिए विद्यालयों के अलावा आँगनवाड़ी केंद्र पर बच्चों को एल्बेण्डाजोल का सेवन कराया जायेगा.

गत चरण(अगस्त,18) में आयोजित किये गए राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम में आँगनवाड़ी केन्द्रों पर अपेक्षाकृत कम बच्चों की उपस्थिति के कारण शत-प्रतिशत बच्चों ने दवा का सेवन नहीं किया था. इसलिए आगामी राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम में आँगनवाड़ी केन्द्रों में बच्चों की उपस्थिति में वृद्धि हेतु आशा एवं आंगनवाडियों के सहयोग से 1 से 6 वर्ष तक के सभी पंजीकृत बच्चों तथा विद्यालय नहीं जाने वाले 6 से 19 वर्ष के सभी बच्चों की सूची तैयार कर कार्यक्रम के दिन सभी बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्र पर लंने एवं दवा सेवन सुनश्चित कराने का आलोक कुमार द्वारा पत्र के माध्यम से निर्देशित किया गया है.साथ ही इसके लिए आँगनवाड़ी कार्यकर्ता को माताओं की बैठक में इसके विषय में चर्चा करने एवं पंजीकृत, अपंजीकृत एवं स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों की कार्यक्रम में शत-प्रतिशत उपस्थिति हेतु उन्हें प्रोत्साहित करने का भी निर्देश दिया गया है.

कैसे होता है कृमि संक्रमण:बच्चों के नंगे पैर खेलने व घूमने, हाथ धोये बिना खाना खाने,खुले में शौच करने, शौच के बाद हाथ नहीं धोने से एवं दूषित खाना खाने से कृमि संक्रमण की संभावनाएं बढ़ जाती है.

कृमि मुक्ति क्यों जरुरीहै: बच्चों एवं किशोरों में बच्चों के पेट मे कीड़ा होने से उनका शारीरिक एवं मानसिक विकास अवरुद्ध हो जाता है जिससे वह एनीमिया जैसे गंभीर रोग से भी ग्रसित हो सकते हैं. इस दवा के सेवन से बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास होगा. इससे उनकी स्कूल में उपस्थिति भी बढ़ेगी.

ऐसे कराया जायेगा एल्बेण्डाजोल का सेवन : 1 से 2 साल तक के बच्चों को एल्बेण्डाजोल की आधी टेबलेट चूर कर खिलाया जायेगा. 2 से 3 साल तक के बच्चों को एक पूरी गोली चूर कर खिलानी है एवं 3 से 19 साल तक के बच्चों एवं किशोरों को यह गोली चबाकर खानी है.


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