जब गुप्तेश्वर पांडेय से नवरुणा अपहरण कांड में सीबीआई ने पूछताछ की थी…

बिहार पुलिस के नए डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने अपराधियों को चेतावनी देते हुए कहा कि गोली का जवाब गोली से दिया जायेगा. उन्होंने कहा कि किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने मुजफ्फरपुर में मुथूट फाइनेंस कंपनी में लूट के मामले को सुलझाने के लिए अपनी पीठ थपथपाई. पर एक केस जो उनकी पीठ पर बैताल की तरह बैठा हुआ है, और जिसके दाग से उनकी वर्दी पर छींटे पड़े हुए हैं, वह केस है नवरुणा किडनेपिंग और मर्डर केस.
2014 में नवरुणा केस के जांच के सिलसिले में सीबीआई ने उनसे पूछताछ की थी. उस समय नवरुणा केस की मॉनिटरिंग सुप्रीम कोर्ट अपने स्तर से कर रहा था. उस समय गुप्तेश्वर पांडेय मुजफ्फरपुर के आई जी थे.

सितम्बर 2012 में क्लास 7 की छात्रा नवरुणा अपने घर के बैडरूम से अगवा कर ली गयी थी. नवरुणा का परिवार आरोप लगाता रहा है कि मुजफ्फरपुर का लैंड माफिया उनकी जमीन पर नज़र गड़ाए बैठा था. नवरुणा के पिता अतुल्य चक्रवर्ती ने कहा, ” मैंने गुप्तेश्वर पांडेय पर मेरी बेटी के अपहरण के मामले में शामिल होने का आरोप लगाया था, फिर भी वे बिहार पुलिस के डीजीपी बना दिए गए. हमारे लिए अब क्या उम्मीद बची है?” उन्होंने आगे कहा, ” पुरे मामले में पुलिस शुरू से अंत तक शामिल थी, इसलिए पूरी आईपीएस लॉबी एकजुट हो गयी एक दूसरे को बचाने के लिए.”
नवरुणा के अपहरण के एक महीने के बाद चक्रवर्ती हाउस के पास के नाले से कंकाल बरामद हुआ. डीएनए टेस्ट में पता चला कि कंकाल नवरुणा का था. हालाँकि केस सीबीआई को 5 साल पहले ट्रांसफर कर दिया गया था, पर अभी तक केस अनसुलझा हुआ है.

इस मामले से कुछ साल पहले 2009 में गुप्तेश्वर पांडेय ने पुलिस की नौकरी से इस्तीफा देकर भाजपा ज्वाइन कर लिया था. उनका इरादा 2009 में भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने का था. लेकिन जब गुप्तेश्वर पांडेय को भाजपा से टिकट नहीं मिला, तो वोलंटरी रिटायरमेंट के 9 महीने के बाद बिहार सरकार ने उन्हें पुनः नौकरी में वापस ले लिया.

नवरुणा मामला बिहार की चेतना पर एक रिसता हुआ जख्म है, बिलकुल गौतम और शिल्पी मर्डर और रेप काण्ड की तरह, चम्पा विश्वास बलात्कार काण्ड की तर्ज पर. 7 साल होने को आये, पर आज भी एक पिता को अपनी बेटी का इन्तजार है.

 

नवरूणा हत्याकांड (2012):

सातवीं कक्षा की बंगाली मूल की 12 वर्षीया नवरुणा नगर थाना क्षेत्र के जवाहर लाल रोड निवासी अतुल चक्रवर्ती की पुत्री थी. 18 सितंबर, 2012 की रात वह अचानक गायब हो गयी, जब वह अपने कमरे में सो रही थी. परिजन जब सुबह उठे, तो नवरुणा के कमरे में गये. वहां उन्होंने देखा कि नवरुणा के कमरे में लगी खिड़की का छड़ उखड़ा है. नवरुणा अपने बिछावन पर नहीं है. इसके बाद मां मैत्री चक्रवर्ती ने नवरुणा के अपहरण को लेकर नगर थाने में मामला दर्ज कराया था.

थाना व सीआईडी जांच के बाद मामला सीबीआई को

नगर थाने की पुलिस ने नवरुणा के गायब हो जाने के मामले को प्रेम प्रसंग बताया था. मामला बढ़ने पर सीआइडी जांच करायी गयी थी. लेकिन, जनवरी, 2014 में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से सीबीआई को जांच सौंप दी गयी थी.

फॉरेंसिक टेस्टडीएनए के बाद बरामद कंकाल की पुष्टि 

26 नवंबर, 2012 को ही नवरुणा के घर के पास स्थित नाले से कंकाल मिला था. अगले दिन बरामद कंकाल को जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेज दिया गया. इसके बाद 10 दिसंबर, 2012 को फॉरेंसिक रिपोर्ट में बरामद कंकाल 12 से 15 वर्ष की लड़की बतायी गयी. इसके बाद 25 दिसंबर, 2012 को डीजीपी ने डीएनए जांच की अनुमति दे दी थी. हालांकि, नवरुणा के माता-पिता ने पुलिस को अपना ब्लड सैंपल देने से इनकार कर दिया. बाद में सीबीआई के अनुरोध पर 25 मार्च, 2014 को नवरुणा के माता-पिता ने अपना ब्लड सैंपल दे दिया. इसके बाद जांच में नवरुणा का कंकाल होने की पुष्टि हुई थी.

जांच में मुजफ्फरपुर के भू माफियाओं का नाम उभर कर सामने आया. जेल भेजे जाने वालों में जिप के पूर्व उपाध्यक्ष तीन कोठिया निवासी शाह आलम शब्बू, बेला रोड के विक्रांत कुमार शुक्ला उर्फ विक्कू शुक्ला, शिवाराम होटल के मालिक अभय गुप्ता, सूतापट्टी शीतलागली के ब्रजेश सिंह, दुर्गास्थान रोड मोतीपुर के विमल अग्रवाल व अंडीगोला रघुवंश रोड के राकेश कुमार सिंह शामिल हैं.

संपत्ति के लोभ में घटना में सभी थे शामिल
सीबीआइ के अनुसार नवरुणा की हत्या संपत्ति की खरीद-बिक्री के विवाद को लेकर हुई. गिरफ्तार किए गए सभी संदिग्ध आरोपित वास्तव में नवरुणा के पिता की संपत्ति से लाभान्वित होने वालों में शामिल हैं. इसी लोभ में सभी एक मत होकर साजिश रच कर इस घटना को अंजाम दिया.


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