2019 का बैडेन पॉवेल अवार्ड डॉ सागरिका चौधरी को दिया जाएगा

नयी दिल्ली: 2019 का प्रतिष्ठित बैडेन पॉवेल अवार्ड जदयू नेत्री और पटना यूनिवर्सिटी की सिंडिकेट मेंबर डॉ सागरिका चौधरी को उनके राजनीतिक, सामाजिक और अकादमिक योगदान के लिए दिया जाएगा. यह अवार्ड नयी दिल्ली में वर्ल्ड स्काउट्स के संस्थापक लार्ड बैडेन पॉवेल की जयंती के अवसर पर 22 फरबरी को दिया जाएगा. इस पुरस्कार की शुरुआत 2007 में की गयी थी. अतीत में यह अवार्ड संगीतकार स्वर्गीय रविंद्र जैन, एक्टर रवि किशन, लोक गायिका तृप्ति शाक्या, कोरियोग्राफर सरोज खान जैसी जानी मानी हस्तियों को दिया जा चुका है.

डॉ सागरिका चौधरी जदयू नेत्री और पटना यूनिवर्सिटी की सिंडिकेट मेंबर हैं. उन्होंने मगध यूनिवर्सिटी से इतिहास में पीएचडी किया है. वे जदयू में 2013 से हैं. वे महादलित समाज से आती हैं. जदयू मह्दलित प्रकोष्ठ के प्रदेश एग्जीक्यूटिव कमिटी के सदस्य होने के नाते उन्होंने बिहार के कई जिलों में शराबबंदी के पक्ष में माहौल तैयार किया है. महादलित समुदाय के सैकड़ों लोगों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा है, दूसरी ओर उन्हें त्वरित न्याय दिलाने के लिए राज्य प्रशासन और पुलिस, महिला हेल्प लाइन की मदद ली है.

इसके अलावा पटना यूनिवर्सिटी के सिंडिकेट मेंबर होने के नाते वे चीन के यूनिवर्सिटीज के साथ अकादमिक कोलैबोरेशन के लिए चीन के दौरे पर गयीं थीं. उनके प्रयासों का नतीजा है कि गुझाओ यूनिवर्सिटी के साथ पटना यूनिवर्सिटी का स्टूडेंट और फैकल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम को लेकर समझौता हुआ है. पटना यूनिवर्सिटी में फॉरेन लैंग्वेज की पढ़ाई शुरू हुई है.

इतना ही नहीं, वे पासी समुदाय के वर्क हैज़ार्डस को कम करने और साथ ही प्रदेश में नीरा व्यवसाय को सफल बनाने के लिए प्रयासरत हैं. उनका प्रयास है कि ताड़ के पेड़ पर चढ़ने के लिए क्लाइम्बिंग मशीन को सरकार सब्सिडी दे, साथ ही नीरा व्यवसाय से अधिक से अधिक संख्या में महादलित परिवार जुड़ें, ताकि उनके लिए वैकल्पिक रोजगार  की व्यवस्था हो सके, जिसका सपना खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने देखा है.


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