हमारे पास मेहँदी हसन हैं, तो आपके पास तलत महमूद हैं

Balendushekhar Mangalmurty

1964 का साल था. तलत महमूद अपने सिंगिंग करियर को लेकर संघर्ष कर रहे थे.  50 के दशक की शुरुआत में तलत महमूद नंबर 1 सिंगर थे. हालाँकि उस दौर में रफ़ी, और मुकेश भी स्थापित हो चुके थे. रफ़ी जहाँ नौशाद के प्रिय गायक थे, वहीँ मुकेश आर के बैनर तले राज कपूर की आवाज बन चुके थे और शंकर जयकिशन के लिए गाया करते थे. मन्ना डे अपनी तमाम प्रतिभा के बावजूद किसी एक्टर की आवाज के रूप में स्थापित नहीं हो पाए थे.
महान गायक के एल सहगल का देहांत हो चुका था और हिंदी सिनेमा उनके अचानक गुज़र जाने के सदमे से था.  सहगल न केवल एक अभिनेता थे, बल्कि वे परदे पर अपने गाने खुद गाते थे. प्लेबैक सिंगिंग का चलन नहीं शुरू हुआ था और कलाकारों को अपने गाने भी खुद गाने पड़ते थे, ऐसे में गायक कलाकारों की चलती थी. सहगल, खुर्शीद, नूरजहां, सुरैया, श्याम आदि कलाकार काफी डिमांड में थे. पर 1947 में सहगल का अत्यधिक शराब पीने के चलते देहांत हो गया.


अब गायकों की नयी पौध आयी, जो प्लेबैक सिंगिंग में अपनी किस्मत आजमा रही थी. पर सहगल का प्रभाव स्पष्ट था. रफ़ी, किशोर, मुकेश सब पर सहगल की गायकी की छाप थी. ये गायक न केवल सहगल की गायकी से प्रभावित थे, बल्कि उनकी तरह ही अपनी किस्मत एक्टिंग में भी आजमाना चाह रहे थे. गायकों में रफ़ी अपने सिंगिंग करियर को लेकर फोकस्सड थे. वहीँ मुकेश अपनी फिल्म “अनुराग” बनाने को लेकर व्यस्त थे. उसी समय राजकपूर चोरी चोरी फिल्म में व्यस्त थे, पर मुकेश इस फिल्म के गाने के लिए समय नहीं निकाल पा रहे थे, ऐसे में इस फिल्म में प्लेबैक के लिए मन्ना डे को मौक़ा मिला. अब तक मन्ना डे राजकपूर के लिए एक्का दुक्का गाने गाते आये थे; खासकर जो गाने हाई पिच के होते थे, और उन गानों के लिए मुकेश की आवाज सूट नहीं करती थी, तो मन्ना डे के हिस्से में वे गाने आते थे.

तमाम गायकों में मुकेश के अलावा तलत महमूद भी अपनी एक्टिंग करियर को लेकर प्रयासरत थे. उन्होंने 50 के दशक में सोने की चिड़ियाँ और कुछ फिल्मों में बतौर एक्टर काम किया था. पर राजकपूर, देव आनंद और दिलीप कुमार, मोतीलाल, बलराज साहनी और अशोक कुमार जैसे नेचुरल एक्टर्स के आ जाने से पहली बार एक्टिंग में गंभीरता और सहजता आयी थी. अब दौर specialisation का हो चला था. प्लेबैक सिंगिंग को लेकर भी कई प्रयोग हो रहे थे. गायकों की नयी पौध ट्रेंड सिंगर्स की पौध थी. संगीतकार नौशाद, अनिल विश्वास गायकों को माइक्रोफोन पर गाने के तरीके बता रहे थे. ब्रीथिंग कण्ट्रोल, कितनी दूर से माइक पर गाना है, तमाम चीजों पर ध्यान दिया जा रहा था. गायकी में बदलाव आ रहा था.


50 के दशक के पूर्वार्ध में तलत महमूद नंबर वन सिंगर थे. वे ट्रेजेडी किंग दिलीप कुमार की आवाज बन चुके थे. प्रसिद्द संगीतकार अनिल विश्वास के प्रिय गायक बन चुके थे. तलत महमूद की रेशमी आवाज, आवाज में कम्पन खासकर ग़ज़ल गायकी में अलग प्रभाव छोड़ रही थी.

पर तलत अपने सिंगिंग करियर में फोकस नहीं थे, जिस तरह से रफ़ी फोकस्सड थे. ऐसे में दोनों के बीच गैप भरता जा रहा था. रफ़ी नौशाद के मार्गदर्शन में तेजी से पार्श्व गायन के गुर सीख रहे थे. युवा रफ़ी ने अपनी आवाज और उच्चारण में पंजाबियत को ख़त्म किया. उर्दू शब्दों के शुद्ध उच्चारण पर ध्यान दिया. ऐसे में वे लगातार निखर रहे थे.

फिर 50 के दशक के आते आते  रफ़ी तलत को काफी पीछे छोड़ चुके थे. मुकेश, मन्ना डे, हेमंत कुमार इस रेस में काफी पीछे छूट चुके थे. 60 के दशक में तलत महमूद एक प्रोग्राम के सिलसिले में पाकिस्तान गए थे. उनके ग़ज़लों को सुनकर पाकिस्तानी सुखद आश्चर्य में भर गए. उन लोगों ने टिप्पणी की: हमारे पास मेहदी हसन हैं, तो आपके पास तलत महमूद हैं.

60 के दशक में तलत महमूद के पास गाने के अवसर लगातार कम होते चले गए. ये दौर रफ़ी का स्वर्णिम दौर था. वे उन संगीतकारों के लिए गए रहे थे, जिनकी पहली पसंद कभी तलत हुआ करते थे. मदन मोहन, इस डी बर्मन जैसे दिग्गज संगीतकार भी अब रफ़ी की और मुड़ चुके थे. दिलीप कुमार पर अब रफ़ी की आवाज जम चुकी थी.

इसी संघर्ष के दौर में 1964 में एक फिल्म बनने वाली थी. जहाँआरा फिल्म मुग़ल घराने के पृष्ठभूमि पर बननी थी. फिल्म के डायरेक्टर विनोद कुमार चाह रहे थे कि रफ़ी से इस फिल्म की ग़ज़लें गवाई जाएँ. पर फिल्म के संगीतकार मदन मोहन इस बात पर अड़े थे कि फिल्म में ग़ज़लों को आवाज तलत महमूद ही देंगे. रफ़ी के उठान के दौर में यह तलत के करियर को पुनर जीवन देने का अंतिम प्रयास था.
फिल्म में राजेंद्र कृष्ण ने नज़्म लिखे और मदन मोहन के संगीत निर्देशन में तलत ने अपनी पुरसोज आवाज से ग़ज़लों को अमर कर दिया. पर दुर्भाग्य से फिल्म नहीं चली. और इसके साथ ही तलत प्लेबैक सिंगिंग की दुनिया से दूर होते चले गए.


[jetpack_subscription_form title="Subscribe to Marginalised.in" subscribe_text=" Enter your email address to subscribe and receive notifications of Latest news updates by email."]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.