पुलवामा हमले के बाद भारत ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से पाक को अलग थलग करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज किये

पुलवामा हमले के बाद सीआरपीएफ ने विस्फोटक भरे वाहन से आतंकी हमले की चुनौती से निपटने के लिए जवानों के काफिले की आवाजाही की मानक संचालन प्रक्रिया में बदलाव का फैसला किया है. पुलवामा में आतंकियों ने विस्फोटकों से भरी कार को सीआरपीएफ के काफिले से टकराकर हमले को अंजाम दिया था. अर्धसैनिक बल के महानिदेशक आरआर भटनागर ने कहा कि 14 फरवरी की घटना के बाद हमने काफिले की आवाजाही में नए नियम जोड़े हैं. यातायात नियंत्रण के अलावा काफिले की आवाजाही के समय में भी बदलाव किया गया है. साथ ही काफिले के ठहराव और आगे बढ़ने की योजना सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस से तालमेल के साथ तय की जाएगी. हमले के बाद घाटी के दौरे के बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि सुरक्षा बलों के काफिले की आवाजाही के समय आम जनता के वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई जाएगी.

सीआरपीएफ महानिदेशक ने कहा कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के जवानों को कई बार बीएसएफ और वायुसेना के हेलीकॉप्टरों व विमानों से भी कश्मीर घाटी में एयरलिफ्ट किया जाता है. जम्मू-श्रीनगर हाईवे भूस्खलन के कारण बंद था. इसलिए 10 दिन के अंतराल के बाद काफिले को 14 फरवरी को जम्मू से श्रीनगर रवाना किया गया।

जम्मू-कश्मीर में पिछले पांच साल में आईईडी और अन्य बम विस्फोटों में बढ़ोतरी

जम्मू-कश्मीर में पिछले पांच साल में आईईडी और अन्य बम विस्फोटों में बढ़ोतरी देखी गई है. राज्य में 2018 से अब तक आईईडी विस्फोटों में 57 फीसदी की वृद्धि हुई. वहीं दूसरी तरफ नक्सल प्रभावित इलाकों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में ऐसे धमाकों में तेजी से कमी आई है. राज्य में आईईडी विस्फोट की घटनाओं में 2017 में 21 फीसदी, 2018 में 33 फीसदी और अब तक कुल 57 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इसके उलट उत्तर-पूर्वी राज्यों में इसी दौरान ऐसी वारदातों में 52 फीसदी की कमी आई है. वर्ष 2017 में देश में 244 आईईडी धमाके हुए, जिनमें 61 लोगों को जान गंवानी पड़ी. वहीं पिछले साल 174 घटनाओं में 108 लोगों की मौत हुई। जम्मू-कश्मीर में 2017 में आईईडी विस्फोट से महज एक जान गई थी, वहीं 2018 में यह आंकड़ा बढ़कर 13 हो गया. इस बात पर चिंता जताई गई है कि आतंकियों के पास मौजूद विस्फोटक सेना के पास मिलने वाले ‘हाई ग्रेड’ स्तर का है.

देश की खुफिया एजेंसी रॉ के पूर्व चीफ विक्रम सूद ने कहा है कि पुलवामा हमले के पीछे सिर्फ हमलावर ही नहीं और भी कई लोग शामिल होंगे। इस तरह का हमला बिना सुरक्षा में चूक के नहीं हो सकता है.

अलगाववादी नेताओं से उनकी सुरक्षा वापस ले ली गयी है:

पुलवामा हमले में उपजे देशव्यापी रोष के बाद सरकार ने अलगाववादी नेताओं से उनकी सुरक्षा के इंतजाम वापस ले लिया है. ये अलगाववादी नेता हैं: मीरवाइज़ ओमर फ़ारूक़, अब्दुल गनी भट्ट, बिलाल लोन, हशीम कुरैशी और शब्बीर शाह.

आतंकी हमले के लिए अत्यंत आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे थे

(जेईएम) के हैंडलर्स और पुलवामा का आत्मघाती हमलावर पीयर-टू-पीयर सॉफ्टवेयर सर्विस-वाईएसएमएस- या इसके अनुरुप कोई मोबाइल एप्लीकेशन का इस्तेमाल दिसंबर 2018 तक कर रहा था. जिससे पूरी तरह से मोबाइल फोन की निगरानी से बचा जा सके. वाईएसएमएस एक अल्ट्रा हाई रेडियो फ्रीक्वेंसी मॉडल होता है जिसके जरिए इनक्रिप्टिड टेक्स्ट मैसेज भेजा जाता है. वाईएसएमएस एप्लीकेशन डार्क वेब पर 2012 से उपलब्ध है लेकिन पाकिस्तान में स्थित आतंकी संगठनों ने अब इसका नया वर्जन तैयार कर लिया है जो एक फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल करती है. इस फ्रीक्वेंसी को दिसंबर से अभी तक कोई भी निगरानी उपकरण पकड़ नहीं पाया है.

भारत ने कूटनीतिक गतिविधि तेज की:

पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हुए फिदायीन हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर अलग-थलग करने की मुहिम तेज कर दी है. पाकिस्तान और आतंकी गुट जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ प्रभावशाली देशों को साधने के लिए विदेश में स्थित भारतीय मिशनों ने कूटनीतिक अभियान शुरू कर दिया है. पाकिस्तान को अलग-थलग करने के लिए विदेश मंत्रालय अपने कूटनीतिज्ञों, राजदूतों और उच्चायुक्तों से चरणबद्ध तरीके से बैठक कर रहा है. मिशन, उच्चायोग और दूतावास को खुद से जुड़े देशों को कूटनीतिक माध्यमों से पाकिस्तान के खिलाफ साधने का निर्देश दिया जा रहा है. करीब 60 प्रभावशाली देशों में कार्यरत मिशनों से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों को ब्रीफ किया जा चुका है. वहीं, आतंकी गुटों के वित्त पोषण पर निगाह रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) संदेह के आधार पर पाकिस्तान को ग्रे सूची में डाल चुकी है.

‘ऑपरेशन 25’

सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड आतंकी गाजी राशिद को पकड़ने की है. सेना ने राशिद की तलाश में ‘ऑपरेशन 25’ चलाया है. इसके तहत जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर पंपोर से पुलवामा तक 25 किमी के इलाके को घेरकर गाजी को पकड़ने का अभियान तेज कर दिया गया है. खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, हमले के समय अफगानी आतंकी राशिद पुलवामा में ही मौजूद था.


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