मिड डे मील में बच्चों को को सप्ताह में सिर्फ एक अंडा क्यों? सुप्रीम कोर्ट ने पूछा बिहार सरकार से

पटना: मिड डे मील के तहत बच्चों को सप्ताह में सिर्फ एक दिन ही अंडा क्यों दिया जाता है, जबकि कोर्ट ने सूखाग्रस्त राज्यों में सप्ताह में पांच दिन दूध और अंडे देने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से सवाल किया है. सुप्रीम कोर्ट इस मसले पर एक एनजीओ के द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी.

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और संजीव खन्ना की पीठ ने बिहार सरकार के साथ केंद्र सरकार को भी नोटिस भेजकर इसपर 4 सप्ताह में जवाब मांगा है. ‘वेटरन फोरम फॉर ट्रांसपैरेंसी इन पब्लिक लाइफ’ नाम की एनजीओ ने इस पर जनहित याचिका दायर की थी. एनजीओ ने अपने याचिका में कहा था कि पिछले तीन सालों में बिहार में औसत से कम बारिश हुई है और इसके 23 जिले सूखाग्रस्त घोषित किये गये हैं.

एनजीओ ने याचिका में कहा कि नीतीश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 2015 के स्वराज अभियान केस के फैसले का पालन नहीं किया है, जिसमें कोर्ट ने बिहार, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे सूखाग्रस्त राज्यों में मिड डे मील के तहत बच्चों को अंडा, दूध और ज्यादा प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों का वितरण करने को कहा था. आदेश में कहा गया था कि बच्चों को सप्ताह में सामान्य रूप से 5 दिन और कम से कम 3 दिन ज्यादा प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ दिये जायें.

सूखे की गंभीरता और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन करते हुये, बिहार सरकार ने 20 अक्टूबर, 2017 को सभी जिला कार्यक्रम अधिकारियों को सप्ताह में एक दिन केवल 1 उबला हुआ अंडा या मौसमी फल प्रदान करने का निर्देश दिया था. एनजीओ ने कहा कि उसने पिछले दो सालों से सार्वजनिक प्राधिकरणों के समक्ष याचिका दायर की थी लेकिन कोई कदम नहीं उठाये गये.


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