नीतीश के नए बिहार की परिकल्पना की ब्रांड अम्बेसडर हैं डॉ सागरिका चौधरी !!

हाल के दो वर्षों में बिहार में जो नेत्री काफी तेजी से चर्चा में आयी है, वो हैं जदयू नेत्री और पटना यूनिवर्सिटी की सिंडिकेट मेंबर डॉ सागरिका चौधरी. जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सागरिका चौधरी को पटना यूनिवर्सिटी का सिंडिकेट मेंबर बनाया बिहार सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर, तो सबको बड़ा आश्चर्य हुआ. आखिर सागरिका चौधरी की उम्र बेहद कम थी और उन्हें जदयू में आये हुए महज दो साल ही हुए थे. पर आने वाले समय में सागरिका चौधरी ने मुख्यमंत्री के खुद पर विश्वास को सही साबित किया. इस नियुक्ति के साथ सागरिका चौधरी पटना यूनिवर्सिटी के इतिहास में चली गयीं. इतनी कम उम्र में सिंडिकेट मेंबर बनने वाली वे सबसे कम उम्र की महिला हैं. सागरिका चौधरी महिला सशक्तिकरण का बेहतरीन उदाहरण हैं.

आर सी पी सिंह से पार्टी के कार्यों के लिए सम्मानित होते हुए

सागरिका चौधरी का कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं है. परिवार में कोई कभी राजनीति में नहीं रहा. पिता पहले पारम्परिक जातिगत व्यवसाय में लगे थे. वे महादलित परिवार से आती हैं, पासी जाति। एक बार उनके पिता ताड़ के पेड़ से गिर गए थे, बुरी तरह जख्मी हुए और काफी समय तक अपने काम से अलग रहे. लम्बे समय तक बिस्तर पर पड़े रहने के चलते परिवार भीषण आर्थिक संकट में फंस गया. पर पिता ने उन्हीं बुरे दिनों में ठान लिया कि इस व्यवसाय से निकलना है और अपने बच्चों को पढ़ाना है. स्वास्थ्य लाभ के उन दिनों पिता के हाथ आंबेडकर की जीवनी लगी, उन्हें पढ़कर पिता के सोचने की दिशा बदल गयी.

आंबेडकर से सागरिका चौधरी का परिचय अपने पिता के माध्यम से ही हुआ. राजनीति में प्रवेश के मुद्दे पर सागरिका चौधरी अपने दो प्रेरणा श्रोत का उल्लेख करना नहीं भूलतीं. एक तो आंबेडकर और दूसरे नीतीश कुमार. नीतीश कुमार के बारे में बोलते हुए वे कहती हैं: ” बिहार में राजनीति का जिस तरह का ढांचा रहा है, उसमे महिलाओं के लिए, खासकर उन महिलाओं के लिए बहुत मुश्किल है, पर नीतीश कुमार ने जिस तरह से लोकल लेवल पॉलिटिक्स में महिलाओं की भागेदारी बढ़ाई, उसने बिहार में स्थानीय स्तर पर राजनीति का चेहरा बदला. महिलाएं दिखने लगीं. इससे और लोगों को हौसला मिला कि एक ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जो पारम्परिक राजनीतिक नेतृत्व से अलग सोच रहे हैं.
ऐसे में मैंने जदयू ज्वाइन करने का फैसला किया. पार्टी के लिए सोशल मीडिया में काम किया. उन पर एक बुकलेट भी लिखा, जिसकी कई हज़ार कॉपियां प्रदेश भर में बंटवाई गयीं.

जदयू विधान पार्षद प्रोफ़ेसर रणबीर नंदन के साथ

महादलित प्रकोष्ठ में प्रदेश उपाध्यक्ष भी बनाया गया. इस नाते बिहार के अलग अलग जिलों में गयी. मुख्यमंत्री महोदय का समर्थन मिला. काम में उत्साह था. फिर उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी में सिंडिकेट मेंबर बनाया. ये मेरे लिए बड़ा क्षण था. कुछ करने का अवसर था.”

बतौर पटना यूनिवर्सिटी सिंडिकेट मेंबर सागरिका चौधरी ने चीन का दौरा किया 2016 में. गुझाउ यूनिवर्सिटी के साथ पटना यूनिवर्सिटी के अकादमिक कोलैबोरेशन के लिए. उनके प्रयास ने 2019 में रंग दिखाया जब गुझाउ यूनिवर्सिटी से डेलीगेशन पटना यूनिवर्सिटी आया और स्टूडेंट और फैकल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम को लेकर हस्ताक्षर हुए.
वे यूनिवर्सिटी की कई कमिटी की सदस्य हैं. और इस नाते यूनिवर्सिटी के माहौल, पढ़ाई में सुधार के मुद्दे सिंडिकेट की बैठक में लगातार उठाती रहती हैं.
इतना ही नहीं, जदयू नेत्री के नाते उन्होंने कई महिलाओं को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा, और साथ ही पुलिस, प्रशासन से लगातार मिलकर उनकी समस्यायों को सुलझाने का प्रयास किया.

कई मोर्चों पर सक्रिय हैं डॉ सागरिका चौधरी:
फिलहाल वे जदयू की सोशल मीडिया टीम का भी अभिन्न हिस्सा हैं. सोशल मीडिया पर सागरिका चौधरी के बहुत बड़ी संख्या में फॉलोवर्स हैं. वे सोशल मीडिया में काफी एक्टिव रहती हैं. और इस मंच का बेहतरीन इस्तेमाल करती हैं.

वे बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन में भी कई कमिटी में सदस्य हैं और इस नाते नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट उद्यमिता विकास” से जुडी हुई हैं. इतना ही नहीं बिहार में नीरा प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक चले, इसके लिए वे राज्य भर में दौरा करती रहती हैं.

नीरा: रोजगार, स्वास्थ्य और सम्मान का बेजोड़ संगम
डॉ सागरिका चौधरी महिला सशक्तिकरण का शानदार उदाहरण हैं. बिना किसी गॉडफादर के उन्होंने राजनीति में कम समय में अच्छी पहचान बनायी है. उन्होंने समाज के हर तबके से स्नेह और सम्मान पाने में सफलता अर्जित की है. उन्होंने इतिहास विषय में पीएचडी किया है. वे न सिर्फ अपने परिवार में बल्कि बिहार की महिला नेत्रियों में सबसे पढ़ी लिखी महिलाओं में शामिल हैं.

सोशल मीडिया के अलावा वे टीवी पर पार्टी का पक्ष मुस्तैदी से रखती नज़र आती हैं.

2019 का बैडेन पॉवेल अवार्ड डॉ सागरिका चौधरी को दिया जाएगा

उन्हें 22 फरबरी को दिल्ली में 2019 का बैडेन पॉवेल अवार्ड से सम्मानित किया जाना है.

अभी उन्हें सार्वजनिक जीवन में काफी लम्बी पारी खेलनी है. वे नीतीश कुमार के सपनों के बिहार की ब्रांड अम्बेसडर हैं, शिक्षित, सशक्त, और सार्वजनिक जीवन में लगातार आगे बढ़ती हुई महिला. वे न सिर्फ महादलित महिलाओं, बल्कि राजनीति में आने की इच्छा रखने वाली महिलाओं के लिए प्रेरणाश्रोत बन गयी हैं.

बिहार में नीरा के उत्पादन और साथ ही सफल मार्केटिंग से एक क्रांति लायी जा सकती है.

 


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