पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन मिलने वाले निःशुल्क सरकारी बंगलों को खाली करना होगा: पटना हाई कोर्ट का आदेश

पटना: पटना हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्रियों को आजीवन मिलने वाली निःशुल्क सरकारी बंगलों पर अपना निर्णय सुना दिया है. पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन नि:शुल्क आवास की मिलने वाली सुविधा को समाप्त कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश एपी शाही की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया.

मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने कहा कि ये असंवैधानिक है और सार्वजनिक धन का दुरूपयोग है. नीतीश कुमार, राबड़ी देवी, डॉ जगन्नाथ मिश्र, जीतनराम मांझी और सतीश प्रसाद सिंह को यह सुविधा फिलहाल मिली हुई है. लालू यादव को अलग से आवास नहीं मिला है. वे राबड़ी देवी को आवंटित सरकारी बंगले में रह रहे थे. फिलहाल वे रिम्स में भर्ती हैं.

चीफ जस्टिस एपी शाही की खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई की थी और फैसला सुरक्षित रखा था. मंगलवार को फैसले सुनाया गया. कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह सुविधा, संवैधानिक और आम जनता की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग है. पद से हटने के बाद इस तरह की सुविधाओं को दिया जाना गलत है.

हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता दीनू कुमार ने कहा कि पटना हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री अब सुरक्षा स्टाफ और बंगले की सुविधा नहीं ले पाएंगे. निश्चित समय सीमा के भीतर सरकार बंगला खाली कराने के लिए स्वतंत्र है.

सतीश प्रसाद सिंह केवल तीन दिनों के लिए मुख्यमंत्री बने थे:
बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और लालू प्रसाद अपने पूरे परिवार के साथ एक ही बंगले 10, सर्कुलर रोड में रहते हैं. 2005 में सत्ता से बेदखल होने के बाद से ही राबड़ी देवी के नाम पर इस बंगले को आवंटित किया गया था. राबड़ी देवी 1997 से लेकर 1999 और फिर 1999 से लेकर 2000 तथा 2000 से लेकर 2005 के बीच तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री रहीं और लालू प्रसाद यादव 1990 से 1995 और 1995 से लेकर 1997 के बीच दो बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे थे. इन दोनों के साथ-साथ ,नीतीश कुमार, जीतन राम मांझी, जगन्नाथ मिश्र और सतीश प्रसाद सिंह भी पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते सरकारी बंगले में रह रहे हैं. सतीश प्रसाद सिंह 1968 में केवल 3 दिनों के लिए मुख्यमंत्री बने थे.

जीतन राम मांझी ने कोर्ट के फैसले को स्वीकार किया:

जीतन राम मांझी ने कोर्ट के फैसले को स्वीकारते हुए कहा कि सरकार जब बंगला खाली करने के लिए कहेगी तो मैं खाली कर देंगे, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्रियों को सुविधा मिलनी चाहिए क्योंकि वो आजीवन राजनीति में रहते हैं और उनका एक सामाजिक स्तर है. उन्हें लोगों से मिलना पड़ता है और हर किसी के पास घर नहीं होता न ही संसाधन. इसलिए सरकार उन्हें सुविधा और संसाधन उपलब्ध कराती है.


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