यादव बहुल सुपौल लोकसभा सीट पर क्या रंजीत रंजन एक बार फिर देंगी जदयू-भाजपा के उम्मीदवार को कड़ी टक्कर

बिहार के सुपौल लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस की रंजीत रंजन सांसद हैं. रंजीत रंजन पप्पू यादव (Pappu Yadav) की पत्नी हैं. बिहार के बाहुबली की पत्नी की सीट होने के कारण सुपौल लोकसभा क्षेत्र पर न केवल बिहार, बल्कि पुरे हिंदी बेल्ट की नजर है. रंजीत रंजन (Ranjeet Ranjan) यहां से सीटिंग एमपी हैं इसलिए उम्मीद है कि इस बार भी यह सीट कांग्रेस के खाते में ही जायेगा. रंजीत रंजन ने 2014 के चुनाव में जदयू के दिलेश्वर कमैत को शिकस्त दी थी. सुपौल लोकसभा सीट 2009 में अस्तित्व में आया है. जब पहली बार यहां चुनाव हुआ तो यहां से जदयू प्रत्याशी विश्व मोहन कुमार जीते थे. 2002 के परिसीमन के पहले यह सीट सहरसा के नाम से जाना जाता था.

मात्र दो बार हुए हैं लोकसभा चुनाव
सुपौल लोकसभा क्षेत्र में वर्ष 2009 में जदयू प्रत्याशी ने जीत हासिल की थी , लेकिन 2014 में रंजीत रंजन ने जदयू प्रत्याशी दिलेश्वर कमैत को शिकस्त दी थी. भाजपा उम्मीदवार कामेश्वर चौपाल तीसरे नंबर पर रहे थे. इस नजरिये से देखें तो यह चुनाव रंजीत रंजन के लिए टेढ़ी खीर हो सकता है, क्योंकि इस बार जदयू और भाजपा साथ-साथ हैं.

क्या है जातीय गणित
सुपौल में यादव और ब्राह्मण जाति के मतदाताओं का बोलबाला है. साथ ही कुछ अति पिछड़ी जातियां भी यहां जीत-हार तय करती हैं. कांग्रेस ब्राह्मणों की पसंद रहा है, लेकिन इस बार यहां की जनता किसे चुनती है, यह तो समय ही बतायेगा. हालांकि रंजीत रंजन को पप्पू यादव की पत्नी होने के कारण यादवों का वोट मिल जाता है.

कौन हो सकता है उम्मीदवार
इस बार सभी राजनीतिक दलों ने अपने पत्ते खोलने में अत्यधिक देरी कर दी है. बावजूद इसके यह तय माना जा रहा है कि यह सीट महागठबंधन में कांग्रेस के खाते में ही जायेगी और रंजीत रंजन ही यहां से उम्मीदवार होंगी. लेकिन एनडीए में यह सीट जदयू को मिलेगी या भाजपा को यह अभी तय नहीं है. हालांकि संभावना यही है कि यह सीट जदयू के खाते में जायेगी. जदयू से विजेंद्र प्रसाद यादव और दिलेश्वर कमैत के नामों की चर्चा हो रही है.

छह विधानसभा क्षेत्र हैं शामिल
सुपौल लोकसभा क्षेत्र (Supaul Loksabha Seat) में छह विधानसभा क्षेत्र हैं जिनमें निर्मली,पिपरा, सुपौल, त्रिवेणीगंज, छातापुर और सिंघेश्वर शामिल है. इनमें से चार पर जदयू और एक-एक सीट पर राजद व भाजपा के विधायक हैं. सुपौल जिला वर्तमान सहरसा जिले से 14 मार्च 1991 में विभाजित होकर अस्तित्व में आया है. क्षेत्रफल के अनुसार यह कोसी प्रमंडल का सबसे बड़ा जिला है.

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