झंझारपुर लोक सभा सीट: जदयू के खाते में जाएगी सीट; महागठबंधन के उम्मीदवार होंगे पांच बार विजयी देवेंद्र प्रसाद यादव

बिहार में मिथिलांचल की तीन लोकसभा सीटों मधुबनी, झंझारपुर और दरभंगा में झंझारपुर का सियासी इतिहास काफी रोचक रहा है. कोसी और कमला की गोद में बसा झंझारपुर इलाका दरभंगा जिले का हिस्सा है लेकिन अलग जिले की मांग यहां लगातार तेज हो रही है.  झंझारपुर में बाढ़ वर्षों से एक बड़ी समस्या के तौर पर मुंह बाए खड़ी है. बेरोजगारी, पलायन और पिछड़ेपन  विकास को दशकों से मुंह चिढ़ा रहे हैं .यहां के जीर्ण-शीर्ण हो चुके किले, मूर्तियां एवं शिलालेख अपनी ऐतिहासिकता की गवाही देते हैं. 11वीं सदी में यह क्षेत्र मिथिला राज्‍य की राजधानी माना जाता है.

झंझारपुर संसदीय क्षेत्र जनता दल का मजबूत गढ़ माना जाता है. जनता दल परिवार से निकलीं पार्टियों आरजेडी-जेडीयू के उम्मीदवारों ने यहां बारी-बारी से जीत का परचम लहराया. इस संसदीय क्षेत्र में वोटरों की कुल संख्या 1,418,977 है. इसमें पुरुष वोटर 757,310 और महिला वोटर 661,667 हैं.

झंझारपुर लोकसभा सीट इस बार किसके हिस्से जाएगा? जदयू या भाजपा? और महागठबंधन इस सीट पर एनडीए को चुनौती देने की स्थिति में किस हद तक है? तमाम सवाल हैं जो राजनीतिक विशेलषकों के दिमाग में घूम रहे हैं.

झंझारपुर लोक सभा क्षेत्र के अंतर्गत 6 विधान सभा सीट आते हैं:
झंझारपुर लोकसभा क्षेत्र के तहत 6 विधानसभा सीटें आती हैं- खजौली, बाबूबरही, राजनगर, झंझारपुर, फूलपरास और लौकहा. 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में इन 6 सीटों में से 3 पर जेडीयू, 2 पर आरजेडी और एक सीट पर बीजेपी ने जीत हासिल की.

झंझारपुर लोकसभा सीट का इतिहास:
2014 के लोकसभा चुनाव में, जब मोदी लहर ने पुरे बिहार में एनडीए को अभूतपूर्व सफलता दिलाई थी, यहाँ से भाजपा उम्मीदवार वीरेंद्र कुमार चौधरी को सफलता मिली थी. उन्होंने राजद के मंगनी लाल मंडल को 55,408 वोटों के अंतर से हराया था. मतदान का कुल प्रतिशत रहा था 57. 02 %.
भाजपा के उम्मीदवार वीरेंद्र कुमार चौधरी को कुल 335481 वोट हासिल हुए थे, जो कुल डाले गए वोटों का 35. 64 प्रतिशत था. वहीँ राजद उम्मीदवार मंगनीलाल मंडल को 280073 वोट मिले थे, जो कुल डाले गए वोटों का 29. 75 प्रतिशत था.

1972 में इसे लोकसभा क्षेत्र बनाया गया। देश के लिए हुए पांचवे लोकसभा निर्वाचन में पहली बार यहां के लोगों ने सांसद के चुनाव के लिए मतदान किया। यह विधानसभा सीट भी है। यह क्षेत्र मधुबनी जिले का हिस्‍सा है। बिहार के मुख्यमंत्री डॉक्टर जगन्नाथ मिश्र इसी सीट से विधायक चुने जाते थे। यहां के जीर्ण-शीर्ण हो चुके किले, मूर्तियां एवं शिलालेख अपनी ऐतिहासिकता की गवाही देते हैं। 11वीं सदी में यह क्षेत्र मिथिला राज्‍य की राजधानी माना जाता है।

1972 में पहली बार झंझारपुर लोक सभा सीट पर चुनाव हुआ, जिसमे कांग्रेस के उम्मीदवार जगन्नाथ मिश्रा को जीत हासिल हुई. 1980 में कांग्रेस की केंद्र में वापसी के समय इस सीट पर कांग्रेस को हार मिली और जनता दल (स) के उम्मीदवार धनिक लाल मंडल को जीत हासिल हुई. पर 1984 के चुनाव में इंदिरा गाँधी की ह्त्या के फलस्वरूप उपजी सहानुभूति लहर पर सवार कॉंग्रेस् ने वापसी की और कांग्रेसी उम्मीदवार जी एस राजहंस इस सीट से लोक सभा पहुंचे. 1989, 1991 और 1996 में हुए तीन लगातार लोक सभा चुनाव में जनता दल के उम्मीदवार देवेंद्र प्रसाद यादव् जीत हासिल करके लोक सभा पहुंचे. उसके बाद फिर 1998  में सुरेंद्र प्रसाद यादव और
1999 और फिर 2004 में इस सीट पर राजद के उम्मीदवार देवेंद्र प्रसाद यादव ने जीत हासिल की. 2009 में राजद के हाथों से झंझारपुर लोक सभा सीट निकल गया. इस बार जीतने वाले थे जदयू के मंगनीलाल मंडल. 2014 में चुनावी समीकरण बदला हुआ था और इस चुनाव में जदयू और भाजपा अलग अलग लड़ रहे थे. भाजपा उम्मीदवार बीरेंद्र कुमार चौधरी विजयी हुए और राजद के उम्मीदवार को उन्होंने परास्त किया. 2014 में जदयू के मंगनीलाल मंडल राजद के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे.

झंझारपुर सीट इस बार किसके हिस्से?

2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा 30 सीटों पर लड़ी थी.उसे 22 सीटों पर जीत हासिल हुई थी. अब जबकि जदयू-भाजपा के बीच 17 -17 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान हो चुका है. तो ऐसे में राजनीतिक गलियारे में रोचक चर्चाये चल रही हैं. राजनीतिक विश्लेषकों की राय है कि इस बार ये सीट जदयू के पाले में जाएगी. भाजपा इसके लिए सीट एडजस्टमेंट पर भी काम कर रही है. इसके तहत एक ओर मौजूदा सांसदों के कामकाज पर एक आंतरिक सर्वे किया गया है. इसके आधार पर की गई ग्रेडिंग में जो फिट नहीं बैठेंगे, उन्हें टिकट नहीं मिलेगा, वही दूसरी और जीत सुनिश्चित करने के लिए एनडीए इस रणनीति पर काम कर रहा है कि जिस प्रत्याशी की जीत की संभावना अधिक है, उन्हें ही टिकट दिया जाए. अगर संभावित जिताऊ उम्मीदवार किसी एक दल में हैं और सीट किसी दूसरे दल को मिला है तो उम्मीदवार के साथ ही संबंधित दल को लोकसभा सीट दे दी जाएगी. जदयू-भाजपा आपस में प्रत्याशियों की अदला-बदली भी कर सकते हैं. वहीं  बे-टिकट होने वालों को पार्टी राज्यसभा या अन्य जिम्मेवारी देकर  शांत करने की कोशिश की जा सकती है.

कहा जा रहा है कि महागठबंधन की और से झंझारपुर की सीट के प्रत्याशी देवेंद्र प्रसाद यादव हो सकते हैं. पिछले चुनाव में देवेंद्र प्रसाद यादव जदयू के प्रत्याशी थे. देवेंद्र प्रसाद यादव इस क्षेत्र के दिग्गज नेता हैं और इस सीट से लोकसभा में पांच बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.

कुल मिलाकर 2019 में ऊंट किस करवट बैठता है, इसके लिए इन्तजार करना होगा. खासकर इसलिए कि एनडीए और महागठबंधन दोनों ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं.


[jetpack_subscription_form title="Subscribe to Marginalised.in" subscribe_text=" Enter your email address to subscribe and receive notifications of Latest news updates by email."]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.