लालू के घर गोपालगंज में इस बार किसकी चलेगी ठसक, जदयू करेगा कमाल या फिर राजद चौंकायेगा

बिहार की राजनीति में लालू यादव एक ऐसा फैक्टर हैं जिनकी चर्चा के बगैर बिहार की राजनीति की चर्चा अधूरी रहती है. लालू आज बीमार हैं, सक्रिय राजनीति से दूर हैं, पटना से दूर रांची में बंदी जीवन बिता रहे हैं, पर आज भी वे बिहार के तमाम राजनेताओं में सबसे ज्यादा पढ़े जाते हैं. आगामी लोकसभा चुनाव में लालू यादव भाग नहीं ले रहे हैं और ना ही वे चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन गोपालगंज सीट की जब चर्चा चलती है, तो फिर बात अलग हो जाती है. गोपालगंज लालू यादव का पैतृक जिला है.

16वीं लोकसभा के लिए 2014 में हुए चुनाव में गोपालगंज की सीट से बीजेपी के जनक राम विजयी रहे. उन्हें 4,78,773 वोट मिले. उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार को 2,86,936 वोटों से हराया. दूसरे नंबर पर रही थीं कांग्रेस की डॉ. ज्योति भारती जिन्हें 1,91,837 वोट मिले. जदयू के अनिल कुमार 1,00,419 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे.

गंडक नदी के पश्चिमी तट पर बसा गोपालगंज जिला भोजपुरी भाषी है

गंडक नदी के पश्चिमी तट पर बसा गोपालगंज जिला भोजपुरी भाषी है और ईंख उत्पादन के लिए जाना जाता है. यह उत्तर प्रदेश की सीमा से सटा हुआ है. यहां ग्रामीण जनसंख्या 93.93 प्रतिशत और शहरी जनसंख्या 6.07 प्रतिशत है.गोपालगंज लोकसभा क्षेत्र अनसूचित जाति के लिए रिजर्व सीट है, हालांकि वर्ष 2009 में निर्वाचन आयोग ने गोपालगंज लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र को सुरक्षित कर दिया था. उसके बाद भाजपा और जदयू गठबंधन ने बगहा के पूर्णमासी राम को अपना उम्मीदवार बनाया था.वहीं राजद और कांग्रेस ने अनिल कुमार राम को उम्मीदवार बनाया था. पूर्णमासी राम लोकसभा पहुंचने में कामयाब हो गए, लेकिन दोबारा नहीं दिखे. वर्ष 2014 के चुनाव में जदयू के खाते से गोपालगंज लोकसभा की सीट भाजपा के खाते में चली गई. 2009 के परिसीमन में यह रिजर्व सीट घोषित कर दिया गया. उससे पहले इस सीट से लालू यादव के साले साधु यादव चुनाव जीतकर आये थे. गोपालगंज सीट के सीटिंग एमपी भाजपा के जनक राम हैं, हालांकि चर्चा यह है कि यह सीट जदयू के खाते में जा सकती है. बिहार के 40 में से जो छह सीट एससी के लिए रिजर्व हैं, उनमें से तीन पर रामविलास पासवान की पार्टी लोजपा का कब्जा है जबकि तीन पर भाजपा का. लेकिन इस बार गोपालगंज सीट पर जदयू अपनी दावेदारी ठोंक रहा है और सूत्रों के हवाले से ऐसी खबर मिल रही है कि इस बार यह सीट जदयू के खाते में जायेगा. इस परिस्थिति में भाजपा के जनक राम का पत्ता कटना तय है.

कैसा रहा है इतिहास
गोपालगंज जिला का निर्माण 1976 में छपरा से अलग करके किया गया था. यहां के पहले सांसद सैयद महमूद थे जो कांग्रेस की टिकट पर 1952 और 1957 में सांसद चुने गये. 1962 से 1977 तक हुए चार लोकसभा चुनाव में द्वारिकानाथ तिवारी को जीत मिली. वे 1962, 1967 और 1971 में कांग्रेस की टिकट पर जीते थे, लेकिन 1977 में वे जनता पार्टी की टिकट पर लोकसभा पहुंचे थे. 1980 में कांग्रेस की टिकट पर नगीना राय जीते. 1984 में जब देश में कांग्रेस की हवा थी यहां से निर्दलीय प्रत्याशी काली प्रसाद पांडेय चुनाव जीते थे. 1989 में जनता दल की लहर में यहां से राजमंगल मिश्रा चुनाव जीतकर आये. 1991 में राष्ट्रीय जनता दल का प्रभाव दिखा और अब्दुल गफूर चुनाव जीते. 1996 में भी राजद के लाल बाबू प्रसाद यादव चुनाव जीते. 1998 में समता पार्टी से अब्दुल गफूर जीतकर आये. जबकि 1999 में समता पार्टी की टिकट पर रघुनाथ झा जीते. 2004 में यहां से साधु यादव चुनाव जीते, जो राजद उम्मीदवार थे और 2009 में जब यह सीट रिजर्व हो गया तो जदयू के पूरणमासी राम चुनाव जीते. 2014 में मोदी लहर में यह सीट भाजपा के खेमे में चली गयी और जनक राम सांसद बने.उन्हें चार लाख से ज्यादा वोट मिला था.

जातीय समीकरण
गोपालगंज के इतिहास पर नजर डालें तो हम पायेंगे कि यह इस सीट पर ब्राह्‌मणों का वर्चस्व रहा है और वे यहां गेमचेंजर भी साबित हुए हैं, कहने का आशय यह है कि उनकी आबादी इतनी है कि वे किसी प्रत्याशी के हार-जीत को सुनिश्चित कर सकते हैं. यादवों का भी इलाके में प्रभाव है.
2014 के लोकसभा चुनाव में जनक राम ने कांग्रेस उम्मीदवार को पटखनी देकर बीजेपी का खाता खोला. खास बात ये है कि एससी के लिए सुरक्षित इस सीट पर बीजेपी प्रत्याशी जनक राम को 52.98 फीसदी वोट मिले. गोपालगंज संसदीय सीट की एक और खासियत पर गौर करें.  2014 के चुनाव में महिलाओं ने पुरुषों के मुकाबले अधिक मतदान किया था. जबकि महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों के मुकाबले लगभग 70 हज़ार कम है. कुल 55 फीसदी मतदान हुआ था. आम तौर पर भाजपा को शहरी इलाकों में अच्छा प्रदर्शन करने वाली पार्टी के तौर पर देखा जाता है मगर गोपालगंज इसका अपवाद है. अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित होकर भी गोपालगंज में अनुसूचित जाति की आबादी महज 12.49 फीसदी है.

छह विधानसभा क्षेत्र हैं
गोपालगंज संसदीय क्षेत्र में वोटरों की कुल संख्या 1,349,072 है. इसमें से 729,998 पुरुष वोटर और 619,074 महिला वोटर हैं.गोपालगंज लोकसभा क्षेत्र अंतर्गत विधानसभा की 6 सीटें आती हैं- बैकुंठपुर, बरौली, गोपालगंज, कुचाइकोट, भोरे और हथुआ. इनमें से 2-2 सीटों पर भाजपा और जदयू के विधायक हैं जबकि आरजेडी और कांग्रेस को 1-1 सीट पर सफलता मिली है. बैकुंठपुर और गोपालगंज की सीट बीजेपी के पास है तो जेडीयू के पास कुछाईकोटे और हथुआ की सीटें हैं. बरौली की सीट आरजेडी के पास है तो भोरे सुरक्षित सीट कांग्रेस ने जीती है.

क्या है संभावनाएं
1989 के बाद से ही गोपालगंज की सीट पर जनता दल, राष्ट्रीय जनता पार्टी, समता पार्टी या जेडीयू का कब्जा रहा है. मगर, जिस मजबूती के साथ बीजेपी ने इस सीट पर कब्जा जमाया और अकेले बाकी उम्मीदवारों से ज्यादा वोट लिया और अब जबकि जदयू भी साथ है, तो ऐसे में एनडीए का पलड़ा भारी दिख रहा है.


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