क्या आप जानते हैं पहली लोकसभा में बिहार से सांसद बनीं सुषमा सेन को, जिन्होंने बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ लड़ी जंग

आजादी के बाद जब पहली लोकसभा गठित हुई, तो उसमें 24 महिला सांसद थीं. यह कहने की जरूरत ही नहीं है कि वे महिलाएं कद्दावर और क्षमतावान थीं, क्योंकि वे अपने दम पर लोकसभा पहुंची थीं. पहली लोकसभा में बिहार से दो महिला सांसद थीं, पटना ईस्ट से तारकेश्वरी सिन्हा और भागलपुर दक्षिण से सुषमा सेन. तारकेश्वरी सिन्हा भारतीय राजनीति की एक ऐसी राजनेता हैं, जो केंद्रीय मंत्रिमंडल में रहीं और उनकी खूब चर्चा भी हुई, लेकिन सुषमा सेन उस तरह से चर्चित नहीं पायीं. तो तारकेश्वरी सिन्हा की बात दूसरे आलेख में. आज हम आपका परिचय करा रहे हैं सुषमा सेन से.

सुषमा सेन भागलपुर दक्षिण से जीतकर आयीं थीं, यहां गौर करने वाली बात यह है कि बिहार के भागलपुर से बंगालियों का बहुत पुराना नाता रहा है. बांग्ला के प्रसिद्ध लेखक शरतचंद्र चटर्जी, प्रीतीश नंदी और दादामुनि अशोक कुमार का भी यहां से अटूट नाता रहा है. बंगाली कायस्थों की तो एक बड़ी आबादी भागलपुर में रहती है, जो अब यहीं की होकर रह गयी है.  जिनकी बोलचाल की भाषा तो अब अंगिका है लेकिन वे हैं बंगाल से. सांसद सुषमा सेन भी बंगाल से ही थीं लेकिन भागलपुर उनकी कर्मस्थली बनी. सुषमा सेन कांग्रेस की टिकट पर भागलपुर दक्षिण से जीतकर आयीं थीं. उनके पिता कोलकाता के रहने वाले थे उनका नाम पीएन बोस था.

सुषमा सेन का जन्म कोलकाता में 25 अप्रैल 1889 को हुआ था. उन्होंने लोरेटो हाउस कोलकाता, दार्जिलिंग और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी. उनकी शादी डॉ पीके सेन से हुई. बंगाल विभाजन के बाद वे महात्मा गांधी के प्रभाव में आयीं और उनके स्वदेशी आंदोलन से जुड़ गयीं. इससे पहले वे सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में काम कर रही थीं. उन्होंने बाल विवाह, दहेज प्रथा और जातिवाद की समाप्ति के लिए बहुत प्रयास किया. इतना ही नहीं उन्होंने 1910 में लंदन में मताधिकार के लिए महिलाओं के आंदोलन में भी शिरकत की. 1908-15 तक वे अघौर नारी समिति पटना की प्रेसिडेंट रहीं. वे चाइल्ड वेलफेयर कमेटी,बिहार कौंसिल ऑफ़ वूमेन की प्रेसिडेंट भी रहीं. उन्होंने महिला अधिकार और बच्चों के लिए कई काम किये.

उन्होंने बिहार में रिफ्यूजियों के लिए बहुत काम किया, जो बंटवारे के बाद सिंध प्रांत से आये थे. उन्होंने भागलपुर में महिला कॉलेज की स्थापना और भागलपुर में महिला वार्ड की स्थापना करवाई थी. उन्होंने देश-विदेश की यात्रा की थी. कला में उनकी गहरी रुचि थी और वे भारतीय और अंग्रेजी गानों की शौकीन थी. गायन और चित्रकारी में भी माहिर थीं. उन्हें घूमने का शौक था और फोटोग्राफी की भी शौकीन थी. वे कुकिंग की शौकीन थीं. उन्होंने पटना को अपना स्थायी निवास बनाया, हालांकि उनके बारे में लोगों को जानकारी बहुत कम है.

दूसरी लोकसभा की सदस्य सत्यभामा, जो नवादा लोकसभा सीट से चुनकर आयीं थीं…


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