बिहार के एम आर अभियान (मीजल्स और रुबैला का टीकाकरण) में 100% कवरेज वाला पहला जिला बना शेखपुरा

  • 17 दिनों में15 लाख बच्चों का मीजल्स और रुबैला का टीकाकरण कर शेखपुरा ने पेश की मिसाल
  • कवरेज़ रिपोर्ट के अनुसार शेखपुरा में 100 % हुआएम. आर टीकाकरण

पटना : राज्य मुख्यालय से 120 किलोमीटर दूरी पर स्थित शेखपुरा बिहार का पहला जिला है जिसने मीजल्स और रुबैला टीकाकरण अभियान में 100 प्रतिशत टीकाकरण के लक्ष्य को प्राप्त किया है. शेखपुरा जिला प्रशासन की कवरेज रिपोर्ट के अनुसार15 जनवरी 2019 को शुरू हुए एम.आर अभियान में शेखपुरा जिले ने 17 दिनों में 2लाख 15 हज़ार लक्षित बच्चों का टीकाकरण कर अन्य जिला के लिए एक मिसाल पेश किया है.पहले 2 हफ्तों में इस अभियान के तहत 514 सरकारी, 212जी और 13 मदरसों सहित कुल 749 विद्यालओं में 1.18 लाख बच्चों  को एम. आर का टीकालगाया गया. अगले फेज़में  582 आउटरीच स्थलों और 18 दूरस्थ स्थलों  पर कुल 96,925 बच्चों को एम .आर का टीका लगाया गया है.

शेखपुरा के अतिरिक्तबिहार में नालंदाऔरलखीसरायऐसे जिले हैं जहाँ एम. आरटीकाकरण 90 प्रतिशत से ज्यादा है. 80 प्रतिशत से ज्यादा टीकाकरण वाले जिलों में पटना, औरंगाबाद, बांका, भागलपुर और शिवहरप्रमुख है.  वही पुरे बिहार का  कवरेज 72 प्रतिशत है.

इस अभियान की  सफलता के बारे में बताते हुए शेखपुरा के जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ  के पुरुषोतम ने कहा कि जिला पदाधिकारी के नेतृत्व में इस पुरे अभियान को हमने 17 दिनों में पूरा किया. राज्य स्वास्थ्य समिति के नेतृत्व में लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जिलापदाधिकारी,सिविल सर्जन, डेवलपमेंट पार्टनर्स के द्वारा नियमित रूप से प्रगति का रिव्यु और कारवाई की गई. इसको अभियान नहीं एक आन्दोलन के रूप में किया गया है.  इस पूरे अभियान में विश्व स्वस्थ्य संगठन और यूनिसेफ का तकनीकी सहयोग मिला. जीविका की दीदीयों और स्वयं सहायजा समूह, पंचायती राज प्रतिनिधियों विकास मित्र, टोला सेवक, स्कूल शिक्षकों, धर्म और अध्यात्मिक गुरुओं, मीडिया और प्रचार प्रसार की भी भागीदारी, महत्वपूर्ण रही है।

विद्यालय में लिटिल फ्रेंड्स कैम्पेन का पड़ा सकारात्मक प्रभाव

अभियान में विद्यालयों का कवरेज 100 प्रतिशत रहा है. इसका कारण स्कूलों के साथ अच्छी लामबंदी है. स्कूलों में जब बच्चों के साथ बात करते थे तो मोटिवेशन स्पीच के माध्यम से उसकी शुरुआत की जाती थी जिससे बच्चे संवाद की  प्रक्रिया  से जुड़े रह सके. इसके दौरान डॉ  के पुरुषोतम ने  सभी बच्चों को जोड़ने के लिए उनको लिटिल फ्रेंड के नाम से संबोधित करते थे. जिसके फलस्वरूप बच्चे ज्यादा जुड़ पाते थे. ऐसे में बच्चे ही अपने अभिभावकों को इस पहल के बाते में बताते थे और टीकाकरण के फायदों के बारे में अपने घर – परिवार में बात करते थे.

विभिन्न धर्म और अध्यात्मिक गुरूओं का भी रहा महत्वपूर्ण योगदान

धर्मगुरुओं के सहयोग के बारे में बताते हुए शेखपुरा के सिविल सर्जन डॉ मृगेंद्र प्रसाद ने कहा कि टीकाकरण को लेकर लोगों की आशंकाओं को दूर करने  और एम आर टीकाकरण अभियान में मांग बढ़ाने में विभिन्न धर्म और अध्यात्मिक गुरूओं की भी भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है. इमाम मो तौशिफ इकबाल के नेतृत्व में  जिलों के प्रसिद्ध और बड़ी मस्जिदों के इमामों के साथ मिलकर समुदाय को जागरूक करने के लिए सामुदायिक बैठकें की  गई और जुम्मे के नमाज़ के बाद सम्बंधित मस्जिदों के इमाम द्वारा 10-15 मिनट का एक सत्र संबोधित किया जाता था. जिसमे वो अपने अनुसार एम-आर के  महत्वपूर्ण संदेशों को समुदाय को बताते थे.

यूनिसेफकी  संचार विशेषज्ञनिपुण गुप्ता ने कहा कि इस पहल को सफल बनाने में ए.एन.एम,  मोबिलाईजर, सभी सेशन तक टीकों को सही सलामत और सुरक्षित पहुचने वाले वैक्सीन कूरियरों सहित टीकों को सुरक्षितरखने में  कोल्डचेनसे जुड़े लोगोंकी भी भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है . मीडिया के माध्यम से जागरूकता औरअन्य संचार सामग्रियों का भी काफी अनुकूल असर इस अभियान पर पड़ा.

यूनिसेफ बिहार के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ हुब्बे अली ने कहा कि जिला प्रशासन की रिपोर्टिंग के अनुसार शेखपुरा ने 100 प्रतिशत टीकाकरण किया है. 100 प्रतिशत टीकाकरण के बाद डेवलपमेंट पार्टनर्स के द्वारा कंकरेंट मॉनिटरिंग / अनुश्रवण किया जाता है कि सभी बच्चों को टीके लगे हैं या नहीं. उसके बाद ही 100 प्रतिशत टीकाकरण तय हो पता है.  छूटे हुए बच्चों को मॉप – अप राउंड  में टीका लगाया जाता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के पदाधिकारी डॉ निहार रंजन राय ने कहा कि भारत सरकार के द्वारा इस अभियान में 100 प्रतिशत का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. क्यूंकि खसरा और रुबैला संक्रामक बीमारियाँ हैं और यदि बच्चे छूट जाएंगे तो उस क्षेत्र में अन्य बच्चों के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है और ऐसे में बीमारी बढ़ने की आशंका रहती है. शेखपुरा में अभी अनुश्रवण की प्रक्रिया चल रही है.

यूनिसेफ की सोशल मोबिलाईजेशन कोऑर्डिनेटर डॉ प्रतिभा कुमारी के कहा कि इस पहल के दौरान हमने लोगों को टीकाकरण के आर्थिक महत्व पर बल दिया . हम अपनी सभाओं और रैलियों के दौरान लोगों को बताते थे कि 2 साल तक जितने टीके सरकार के द्वारा दिए जाते हैं उसकी बाज़ार में कीमत  28,800 रुपए होती है पर सरकार के टीकाकरण कार्यक्रम में बच्चों को मुफ्त में दिया जाता है.  इस पूरे अभियान को जिला पदाधिकारी महोदय के नेतृत्व में चलाया गया .

 


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