दूरबीन लगभग13 अरब प्रकाश वर्ष दूर देख सकते हैं. इससे दूर देखना मतलब बीते समय को देखना

राजीव रंजन

आज से नहीं, हजारों साल पहले से मानव चांद,तारों को देखा करते होंगे, बार-बार देखने से उनके मन में इसके बारे में कई सवाल जन्मे होंगे. जब उन्हें इसके बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं मिली होगी तो उन्हें किसी उपकरण की आवश्यकता पड़ी होगी,ताकि वे इसके मदद से चांद,तारों एवं अन्य खगोलीय घटनाएं का गहरा अध्ययन कर सके. उनकी इसी उत्सुकता और आवश्यकता ने दूरबीन की खोज की नींव रखी होंगी. ऐसा हम यकीन से कह सकते हैं.

दूरबीन का आविष्कार विज्ञान जगत का महान आविष्कारों में से एक था जिसने विज्ञान को कई उपलब्धियां हासिल करने में मदद की. आज उसी दूरबीन के मदद से हम करोड़ों मील दूर स्थित ग्रहों एवं नक्षत्रों के बारे में चंद सेकेंडों में जानकारी हासिल कर लेते हैं.

दूरबीन की मदद से हम कई प्राकृतिक रहस्यों को उजागर करने में सफल हुए हैं. इनकी मदद से कई ग्रहों एवं नक्षत्रों आदि की स्थिति एवं गतिके बारे में सटीक जानकारी हासिल हुई है.

डच निवासी वैज्ञानिक हैन्स लिपाशे ने सबसे पहले ऑप्टिकल टेलीस्कोप 1608 इसवी में बनाया था. ऑप्टिकल टेलीस्कोप – दूरबीन जो दृश्यमान प्रकाश को देखने के लिए उपयोग किए जाते हैं. गैलीलियो ने पहली बार दूरबीन का उपयोग रात के आकाश के अवलोकन के लिए किया था. गैलीलियो ने दूरबीन को आकाश की ओर घुमाया, जिससे बृहस्पति के उपग्रहों और चंद्रमा पर क्रेटरों की खोज हुई. गैलेलियो ने सन् 1609 ईसवी में एक दूरबीन बनाया जिसके मदद से वह दुनिया के सामने यह सिद्ध कर पाए कि कॉपरनिकस का सूर्य केंद्रीय सिद्धांत  ( Heliocentric Theory) सही है.

दूरबीन के साथ गैलिलिओ

अब तक तो इन दूरबीनों के मदद से कई नए ग्रहों ,उपग्रहों और तारों को खोजा जा चुका था और कई नई-नई जानकारियां मिल रही थी. परंतु ,ये सभी दूरबीन मनुष्य को संतुष्ट नहीं कर पाए उदाहरण के लिए, जब कभी पृथ्वी पर मौसम असमान्य हो जाता तो यह दूरबीन पृथ्वी से बाहर की तस्वीरों को साफ-साफ नहीं ले पाता और कभी-कभी पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में स्थित बादलों के कारण भी पृथ्वी के बाहर की तस्वीर धुंधली हो जाती.

इस दुर्लभ तस्वीर में गैलिलियो जॉन मिल्टन को चाँद के दाग दिखा रहे हैं.

यह दूरबीन के इतिहास का सुनहरा दौर था जब दूरबीन का आधुनिकीकरण करके इसे पृथ्वी के वायुमंडल के बाहर पृथ्वी के अक्ष में भेजे जाने का तैयारी की जा रही थी . आखिरकार सन् 1990 को एक लंबे अवधि के कोशिश के फलस्वरुप इसे पृथ्वी के अक्ष में भेज दिया गया. यह पृथ्वी के चारों ओर घूमते हुए अंतरिक्ष की तस्वीरों को कैद करता रहता है. यह उस समय का सबसे विशाल एवं आधुनिक दूरबीन था जो आज भी हम तक अंतरिक्ष की तस्वीरें पहुँचाता है जिसका नाम रखा गया था “हबल टेलीस्कोप” सर एडविन हबल के सम्मान में.
यह आज भी सबसे विशाल एवं आधुनिक दूरबीनों में से एक है. इससे पहले भी अंतरिक्ष में दूरबीन भेजे जा चुके थे परंतु यह उनमें से सबसे विशाल था.

दूरबीन न केवल दूर की वस्तुओं को बड़ा करके हमें देखने में में मदद करती हैं, बल्कि वे गामा किरणों, एक्स-किरणों, पराबैंगनी किरणों, अवरक्त किरणों, माइक्रोवेव, और रेडियो तरंगों के स्पेक्ट्रम के हिस्सों को देखने में भी हमारी मदद करती हैं. दूरबीन तीन मुख्य कार्य करते हैं: लाइट गैदरिंग [प्रकाश एकत्र करना], रिजॉल्विंग और मैग्नीफाइंग. दूरबीन का लेंस यह निर्धारित करता है कि दूरबीन कितना बेहतर कार्य करेगा. मतलब कि दूरबीन के लेंस का एपार्चर जितना ज्यादा होगा तस्वीर उतनी ही साफ और बेहतर होगी _ एपार्चर का अर्थ है लेंस का व्यास.

दूरबीन के प्रकार, डिजाइन और कार्यप्रणाली

अब लौटते है दूरबीन के प्रकार, डिजाइन और कार्यप्रणाली पर. मैंने सुविधा के लिए कहीं कहीं दूरबीन के जगह टेलीस्कोप लिखा है.
तीन मूल टेलीस्कोप डिजाइन हैं: रेफ्रेक्टर, रिफ्लेक्टर और कैटैडोप्ट्रिक. प्रकाश को इकट्ठा करने और उसे केंद्रित करने के लिए एक रेफ्रेक्टर टेलिस्कोप के सामने एक बड़ा लेंस होता है. एक परावर्तक टेलीस्कोप ऐसा करने के लिए दर्पण का उपयोग करता है. अधिकांश छोटे दूरदर्शी यानि टेलिस्कोप रेफ्रेक्टर होते हैं और लगभग सभी बड़े टेलिस्कोप रिफ्लेक्टर. कैटैडोप्ट्रिक टेलिस्कोप दर्पण और लेंस का एक संयोजन होते है और ये सबसे आधुनिक डिजाइन हैं.

प्रत्येक दूरबीन का अलग अलग लाभ है, उदाहरण के लिए रेफ्रेक्टर ग्रहों और चंद्रमा के अवलोकन के लिए और रिफ्लेक्टर गहरे आकाश की वस्तुओं जैसे आकाशगंगाओं के अवलोकन के लिए बेहतर है.
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अधिकांश आधुनिक खगोलविद दूरबीनों को कंप्यूटर से संचालित किया जाता हैं और बहुत कम शायद ही कभी दूरबीन के आई पिस के माध्यम से देखा जाता हैं.

दूरबीन लगभग 13 अरब प्रकाश वर्ष दूर देख सकते हैं और वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि यह ब्रह्मांड की उम्र है. इसके और दूर देखना मतलब कि बीते समय को देखना.


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