क्या दुमका में इस बार होगी शिबू सोरेन की जय या झामुमो के गढ़ में कोई देगा गुरुजी को चुनौती?

झारखंड के लोकसभा क्षेत्रों की बात की जाये, तो सबकी नजर जिस सीट पर सबसे पहले जाकर टिकती है वो है दुमका. दुमका संसदीय क्षेत्र झारखंड के दिशोम गुरु शिबू सोरेन का क्षेत्र है और यह सीट झारखंड मुक्ति मोरचा का गढ़ माना जाता है. आजादी के बाद से लेकर अभी तक इस सीट पर झामुमो का वर्चस्व रहा है और कोई भी पार्टी इस सीट पर शिबू सोरेन को टक्कर देने में संकोच करती है. मोदी की लहर में भी शिबू सोरेन को उनके गढ़ में चुनौती देना आसान नहीं रहा है. शिबू सोरेन यहां से आठ बार सांसद रह चुके हैं. उन्हें यहां से हराने का दुस्साहस एकमात्र नेता बाबूलाल मरांडी ने किया और वे सफल भी हुए. दुमका संसदीय क्षेत्र अनुसूचित जनजाति के लिए रिजर्व सीट है. इस सीट के अंतर्गत पूरा जामताड़ा जिला, दुमका और देवघर के कुछ हिस्से भी आते हैं.

शिबू सोरेन आठ बार रहे हैं सांसद
दुमका संसदीय क्षेत्र से शिबू सोरेन आठ बार सांसद रहे हैं. वे पहली बार यहां से 1980 में चुनाव जीते थे. 1952 में यहां से सांसद रहे थे पाॅल सोरेन, वे कांग्रेस की टिकट पर जीतकर आये थे, उस वक्त यह सीट पूर्णिया-संताल सीट के नाम से जाना जाता था. 1957 में यहां से झारखंड पार्टी के देबी सोरेन जीते, फिर 1962 में कांग्रेस के एससी बेसरा, 1967 और 1971 में भी देबी बेसरा ही यहां से कांग्रेस की टिकट पर जीते. इमरजेंसी का असर इस सीट पर दिखा और 1977 में यहां से जनता पार्टी के हेमब्रम बटेश्वर जीतकर आये. उसके बाद 1980 से यहां शिबू सोरेन का युग शुरू हुआ जो आजतक चल रहा है. बीच में 1984 में कांग्रेस के पृथ्वीचंद किस्कू, जीते और 1998 और 1999 में भाजपा की लहर में झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने उन्हें शिकस्त दी. इसके अलावा 1989, 1991, 1996, 2002, 2004, 2009 और 2014 में यहां से शिबू सोरेन ही सांसद चुने गये.

छह विधानसभा क्षेत्र हैं

झारखंड अलग राज्य का गठन वर्ष 2000 में हुआ, उसके बाद से आजतक इस सीट पर शिबू सोरेन ही सांसद हैं उन्हें कोई हरा नहीं सका है. इस संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत छह विधानसभा क्षेत्र आते हैं जिनके नाम हैं-शिकारीपाड़ा, नाला, जामताड़ा, सारठ, दुमका और जामा.

आसान नहीं है शिबू सोरेन को हराना
शिबू सोरेन अब 75 साल के हो गये हैं और ऐसे में उनके लिए चुनाव लड़ना कितना मुनासिब होगा, यह तो वही बेहतर जानते होंगे. हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में उनकी भूमिका अभी तय नहीं हुई है, इसलिए यह माना जा सकता है कि वे दुमका से चुनाव लड़ेंगे. पिछले चुनाव में उन्होंने भाजपा के सुनील सोरेन को एक लाख से अधिक मतों से हराया था.झारखंड की राजनीति में अभी कोई ऐसा प्रखर नेता भी नहीं दिखता है, जो शिबू सोरेन को उनके गढ़ में चुनौती दे. बाबूलाल मरांडी का आभा मंडल भी अब लुप्त हो चुका है, इसलिए वे भी कुछ कर पायेंगे यह बात निरर्थक ही मानी जायेगी. यह बात दीगर है कि अगर वे दुमका से चुनावी मैदान में उतरते हैं तो मीडिया को कुछ दिनों के लिए गाॅशिप का मुद्दा मिला जायेगा. दुमका में कौन-कौन चुनावी मैदान में होंगे, इस बार में अभी कोई जानकारी नहीं है. किसी पार्टी ने इसे लेकर कोई घोषणा नहीं की है, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है कि दुमका लोक सभा सीट  झारखंड का सबसे हाॅट सीट इस चुनाव में भी बनने जा रहा है  इस पर पूरे प्रदेश की निगाहें रहेंगी.

 


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